Sankat Mochan Hanuman Mandir Varanasi

हनुमान चालीसा || sankat mochan hanuman chalisa

साथियों जो भक्त ,संकट मोचन हनुमान चालीसा (sankat mochan hanuman chalisa) का नित्य पाठ करते है, उन्हें प्रभु हनुमान जी की कृपा अवश्य मिलती है…

अपने जानने वालों में ये पोस्ट शेयर करें ...

sankat mochan hanuman chalisa

साथियों जब भोर में उठते ही कहीं दूर से कानों में हनुमान चालीसा सुनाई पड़ती है तो कितनी शांति मिलती है न ?

भोले बाबा के अवतार ( रुद्रावतार)  हनुमान जी की भक्ति आराधना से हमारे बड़े से बड़े कष्ट धीरे धीरे दूर होने लगते है | हमें आंतरिक शक्ति का अनुभव होता है, चित की व्याकुलता शांत होती है और जीवन में आने वाले सभी संकटों का हल स्वतः मिलने लगता है|

साथियों जो भक्त , संकट मोचन हनुमान चालीसा (sankat mochan hanuman chalisa) का नित्य पाठ करते है, उन्हें प्रभु हनुमान जी की कृपा अवश्य मिलती है|

संकट मोचन हनुमान चालीसा हिन्दी अर्थ सहित :-

sankat mochan hanuman chalisa in hindi :-

श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि।

बरनऊं रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।

हिन्दी में अर्थ –> श्री गुरु के चरण कमलों की धूल से अपने मन रूपी दर्पण को सुधारते (पवित्र करते ) हुए श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूं, जो चारों फल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला है।

 

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरो पवन-कुमार।

बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार।

 

हिन्दी में अर्थ –> हे पवन कुमार- आप तो जानते ही हैं कि मै  बुद्धि और शरीर से निर्बल है। मैं आपका सुमिरन करता हूं।  मुझे  बल, बुद्धि और विद्या दीजिए और मेरे कलेशों (दुखों) व दोषों का नाश कर दीजिए।

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर, जय कपीस तिहुं लोक उजागर॥1॥

हिन्दी में अर्थ –> हे हनुमान जी- आपकी जय हो। आपका ज्ञान और गुण के सागर है। हे कपीश्वर- आपकी जय हो- तीनों लोकों (स्वर्ग लोक, भूलोक और पाताल लोक) में आपकी कीर्ति है।

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

राम दूत अतुलित बलधामा, अंजनी पुत्र पवन सुत नामा॥2॥

हिन्दी में अर्थ –> आप राम दूत है और आपके समान दूसरा बलवान नहीं हैं। हे अंजनी के पुत्र,आप पवन पुत्र के नाम से विख्यात है  

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

महावीर विक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी॥3॥

हिन्दी में अर्थ –> सभी वीरों में सबसे बड़े वीर हे महावीर बजरंग बली । आप कुमति (दुष्ट बुद्धि ) को दूर करते है सुमति( सद्बुद्धि ) का साथ देते हैं |

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

कंचन बरन बिराज सुबेसा, कानन कुण्डल कुंचित केसा॥4॥

हिन्दी में अर्थ –> आप सुनहरे रंग के है , सुन्दर वस्त्रों से सुशोभित है ,आपके कानों में कुण्डल है और आपके घुंघराले बाल हैं।

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

हाथबज्र और ध्वजा विराजे, कांधे मूंज जनेऊ साजै॥5॥

हिन्दी में अर्थ –> आपके हाथ में बज्र और ध्वजा है और कन्धे पर मूंज के जनेऊ सजी हुई है।

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

शंकर सुवन केसरी नंदन, तेज प्रताप महा जग वंदन॥6॥

हिन्दी में अर्थ –> हे शंकर के अवतार-केसरी नंदन आपके पराक्रम और यश समस्त संसार में वन्दनीये है।

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

विद्यावान गुणी अति चातुर, राम काज करिबे को आतुर॥7॥

हिन्दी में अर्थ –> आप अति चतुर और विद्यावान है और प्रभु श्री राम के काज ( कार्यों को ) करने के लिए आतुर रहते हैं।

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया, राम लखन सीता मन बसिया॥8॥

हिन्दी में अर्थ –> हे हनुमान जी आपको प्रभु श्री राम के विषय में सुनने से आनंद रस की प्राप्ति होती हैं और प्रभु श्री राम, सीता और लक्ष्मन  आपके हृदय में बसते हैं।

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा, बिकट रूप धरि लंक जरावा॥9॥

हिन्दी में अर्थ –> हे हनुमान जी जब आप सीता मैया के निकट गये तो आपने अपना बहुत सूक्षम रूप धारण कर लिया था वहीं भयंकर रूप धारण करके आपने लंका को जला दिया |

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

भीम रूप धरि असुर संहारे, रामचन्द्र के काज संवारे॥10॥

हिन्दी में अर्थ –> हे हनुमान जी आपने विकराल रूप धारण करके राक्षसों को मारा और प्रभु श्री रामचन्द्र जी के कार्यो (उद्‍देश्यों) को सफल कराया।

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

लाय सजीवन लखन जियाये, श्री रघुवीर हरषि उर लाये॥11॥

हिन्दी में अर्थ –> हे हनुमान जी आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी को पुनर्जीवित किया जिससे श्री रघुवीर ( भगवान् राम ) प्रसन्न हुए  और आपको हृदय से लगा लिया।

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई, तुम मम प्रिय भरत सम भाई॥12॥

हिन्दी में अर्थ –> प्रभु श्री रामचन्द्र जी ने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा कि तुम मुझे ठीक वैसे ही प्रिय हो और मेरे भाई हो जैसे भरत है |

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥13॥

हिन्दी में अर्थ –> प्रभु श्री राम ने आपको यह कहकर हृदय से लगा लिया कि तुम्हारा यश ( कीर्ति ) हजारों  लोग गाते है।

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा,नारद, सारद सहित अहीसा॥14॥

हिन्दी में अर्थ –> हे हनुमान जी – श्री सनक, श्री सनातन, श्री सनन्दन, श्री सनत्कुमार आदि मुनि ब्रह्मा आदि देवता नारद जी, सरस्वती जी, शेषनाग जी सब आपका गुण गान करते हैं।

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

जम कुबेर दिगपाल जहां ते, कबि कोबिद कहि सके कहां ते॥15॥

हिन्दी में अर्थ –> यमराज, कुबेर आदि सब दिशाओं के रक्षक, कवि विद्वान, पंडित या कोई भी आपके यश का पूर्णतः वर्णन नहीं कर सकते है ।

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा, राम मिलाय राजपद दीन्हा॥16॥

हिन्दी में अर्थ –>हे हनुमान जी  आपने सुग्रीव जी को श्रीराम से मिलाकर उनपर उपकार किया, जिससे आगे चलकर सुग्रीव जी राजा बने।

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

तुम्हरो मंत्र विभीषण माना, लंकेस्वर भए सब जग जाना॥17॥

हिन्दी में अर्थ –> जब आपका कहा विभिषण जी ने माना तो वो लंका के राजा बन गये , इस बात को सारा संसार जानता है।

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

जुग सहस्त्र जोजन पर भानू, लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥18॥

हिन्दी में अर्थ –>  हे हनुमान जी आपने एक युग सहस्त्र योजन की दूरी पर स्थित भानु अर्थात सूर्यदेव को मीठा फल समझ कर खा लिया था। 

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहि, जलधि लांघि गये अचरज नाहीं॥19॥

हिन्दी में अर्थ –> आपने प्रभु श्री रामचन्द्र जी की अंगूठी मुंह में रखकर समुद्र को लांघ लिया, इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है।

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

दुर्गम काज जगत के जेते, सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥20॥

हिन्दी में अर्थ –> हे प्रभु ,संसार में जितने भी कठिन से कठिन कार्य हैं , वो आपकी कृपा से सहज हो जाते है।

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

राम दुआरे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसा रे॥21॥

हिन्दी में अर्थ –> हे हनुमान जी ,  भगवान् श्री रामचन्द्र जी के द्वार के आप रखवाले हैं, जिसमें आपकी आज्ञा बिना किसी को प्रवेश नहीं मिलता अर्थात् आपकी प्रसन्नता के बिना प्रभु राम की  कृपा नही मिलती है।

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू को डरना ॥22॥

हिन्दी में अर्थ –> जो भी आपकी शरण में आते हैं, उन सभी को आनन्द की प्राप्ति होती है  और जब आप ही रक्षक होंगे तब किसी का भय नहीं रहता है ।

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

आपन तेज सम्हारो आपै, तीनों लोक हांक तें कांपै॥23॥

हिन्दी में अर्थ –> आप अपना वेग स्वंम ही सँभालते है ,आपके अतिरिक्त आपके वेग को कोई नहीं रोक सकता, आपकी गर्जना से तीनों लोक कांप जाते हैं।

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

भूत पिशाच निकट नहिं आवै, महावीर जब नाम सुनावै॥24॥

हिन्दी में अर्थ –> जहां महावीर हनुमान जी का नाम सुनाया जाता है, वहां भूत, पिशाच निकट आने का सहस भी नहीं कर पाते है |

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥25॥

हिन्दी में अर्थ –> हे हनुमान जी जो आपका नाम जपते है उनके सभी रोगों का नाश हो जाता है और सभी कष्ट दूर हो जाते है ।

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

संकट तें हनुमान छुड़ावै, मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥26॥

हिन्दी में अर्थ –> हे हनुमान जी- जो अपने मन में , अपने कर्मों में , अपनी वाणी में आपका ध्यान करते है उनके सभी संकटों से आप उन्हें दूर कर देते हैं |

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

सब पर राम तपस्वी राजा, तिनके काज सकल तुम साजा॥27॥

हिन्दी में अर्थ –> जो तपस्वी राजा प्रभु श्री रामचन्द्र जी सबसे श्रेष्ठ हैं, उनके सब कार्यों को आपने सहज ही कर दिया।

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

और मनोरथ जो कोइ लावै, सोई अमित जीवन फल पावै॥28॥

हिन्दी में अर्थ –> हे प्रभु , आपके सम्मुख कोई व्यक्ति किसी अभिलाषा के साथ आता है तो उसकी अभिलाषा अवश्य पूरी होती है जिसका फल उसे जीवन पर्यंत मिलता रहता है ।

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

चारों जुग परताप तुम्हारा, है परसिद्ध जगत उजियारा॥29॥

हिन्दी में अर्थ –> हे प्रभु ,चारो युगों सतयुग, त्रेता, द्वापर तथा कलियुग में आपका यश फैला हुआ है जिसके प्रकाश समस्त संसार में फैला हुआ है |

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

साधु सन्त के तुम रखवारे, असुर निकंदन राम दुलारे॥30॥

हिन्दी में अर्थ –> हे प्रभु श्री राम के दुलारे- आप साधु संतो की रक्षा करने वाले  और दुष्टों का नाश करने वाले है ।

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता॥31॥

हिन्दी में अर्थ –> हे प्रभु , आपको श्री जानकी माता  से ऐसा वरदान मिला हुआ है कि आप किसी को भी आठों सिद्धियां और नौ निधियां दे सकते है।  ( अष्ट सिद्धि नौ निधि का नीचे वर्णन है | )

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

राम रसायन तुम्हरे पासा, सदा रहो रघुपति के दासा॥32॥

हिन्दी में अर्थ –> आप निरंतर प्रभु श्री रघुनाथ जी की शरण में रहते हैं  , आपके पास राम नाम है जो संसार की सबसे बड़ी औषधि ( रसायन ) है ।

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

तुम्हरे भजन राम को पावै, जनम जनम के दुख बिसरावै॥33॥

हिन्दी में अर्थ –> प्रभु आपके भजन करने से प्रभु श्री राम जी प्राप्त होते हैं जिससे जन्म जन्मांतर के दुख दूर हो जाते हैं।

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

अन्त काल रघुबर पुर जाई, जहां जन्म हरि भक्त कहाई॥34॥

हिन्दी में अर्थ –> प्रभु आपके भजन करने से अंत समय प्रभु श्री रघुनाथ जी का धाम प्राप्त होता है और यदि कहीं जन्म होता है तो वहाँ प्रभु श्रीराम के भक्त ही कहलायेंगे 

 *  *  *  *

और देवता चित न धरई, हनुमत सेई सर्व सुख करई॥35॥

हिन्दी में अर्थ –> हे हनुमान जी- आपकी सेवा करने से सब प्रकार के सुख मिलते हैं, इसके बाद अन्य किसी देवता की आवश्यकता नहीं रह जाती है ।

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥36॥

हिन्दी में अर्थ –> हे वीर हनुमान जी- जो आपका सुमिरन करता रहता है, उसके सब संकट कट जाते हैं और सब पीड़ा मिट जाती हैं।

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करहु गुरु देव की नाई॥37॥

हिन्दी में अर्थ –> हे स्वामी हनुमान जी- आपकी जय हो, जय हो, जय हो- आप मुझ पर मेरे गुरु जी के समान कृपा कीजिए।

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

जो सत बार पाठ कर कोई, छूटहि बंदि महा सुख होई॥38॥

हिन्दी में अर्थ –> जो कोई इस हनुमान चालीसा का सौ बार पाठ करेगा वह सब बंधनों से छूट जाएगा और उसे परमानन्द मिलेगा।

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा, होय सिद्धि साखी गौरीसा॥39॥

हिन्दी में अर्थ –> भगवान गौरी शंकर साक्षी हैं कि जो भी इस हनुमान चालीसा का पाठ करेगा उसके सभी कार्य सिद्ध होंगे ।

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

तुलसीदास सदा हरि चेरा, कीजै नाथ हृदय मंह डेरा॥40॥

हिन्दी में अर्थ –> हे स्वामी हनुमान जी- तुलसीदास सदा ही प्रभु श्री राम का दास रहा है। इसलिए आप उसके हृदय में निवास कीजिए।

*  *  *  *  *  *  *  *  *  *

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सूरभूप॥

 

हिन्दी में अर्थ –> हे संकट मोचन पवन कुमार- आप आनंद मंगलों के स्वरूप हैं। हे देवराज- आप श्री राम, सीता जी और लक्ष्मण सहित मेरे हृदय में निवास कीजिए।

माँ सीता के द्वारा हनुमान जी को दी गयी अष्ट सिद्धियाँ इस प्रकार है

अष्ट सिद्धियाँ

1.) अणिमा- जिससे साधक किसी को दिखाई नहीं देता है और कठिन से कठिन पदार्थ में प्रवेश कर जाता है।

2.) महिमा- जिसमें योगी अपने को बहुत बड़ा बन जाता है।

3.) गरिमा- जिससे साधक अपने को  जितना चाहे उतना भारी बना लेता है।

4.) लघिमा- जिससे जितना चाहे उतना हल्का बन जाता है।

5.) प्राप्ति- जिससे इच्छित पदार्थ की प्राप्ति होती है।

6.) प्राकाम्य- जिससे इच्छा करने पर वह पृथ्वी में समा सकता है, आकाश में उड़ सकता है।

7.) ईशित्व- जिससे सभी पर शासन करने की सामर्थ्य मिल जाती है।

8.) वशित्व- जिससे सभी को वश में किया जाता है।

Also Read :- संकट मोचक हनुमानाष्टक हिन्दी में अर्थ सहित 

Also Read :- संकट मोचक हनुमान मंदिर वाराणसी 

 

अपने जानने वालों में ये पोस्ट शेयर करें ...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!