Dwarkadheesh

Dwarkadheesh

प्रभु द्वारिकाधीश धाम

गुजरात के जामनगर जनपद में गोमती नदी जिसे गोदावरी के नाम से भी जाना जाता है के तट पर स्थित है , प्रभु श्री कृष्णा की नगरी द्वारका | देवता विश्वकर्मा ने एक ही रात में इस भव्य नगरी का निर्माण कर दिया था |

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गुजरात के जामनगर जनपद में गोमती नदी जिसे गोदावरी के नाम से भी जाना जाता है के तट पर स्थित है , प्रभु श्री कृष्णा की नगरी द्वारका |हिन्दू धर्म के अनुसार द्वारकाधीश मंदिर का निर्माण भगवान श्री कृष्ण के पोते वज्रभ ने करवाया था जिसको कालांतर में पुनःस्थापित आदि शंकराचार्य ने किया| गुजरात के अहमदाबाद से लगभग 380 किलोमीटर की दूर स्थित है द्वारका ।इस नगरी का निर्माण प्रभु श्री कृष्णा ने मथुरा छोड़ने पर किया था और अपने सभी बंधू बान्धव के साथ यहाँ निवास किया था |

ये वही द्वारका है जिसे द्वारकापुरी ,जगत मंदिर और त्रिलोक मंदिर के नाम से भी जाना जाता है और ये प्रभु कृष्णा की सप्तपुरियों में से एक है । द्वारिका वही जगह है जहां भगवान श्री हरि विष्णु ने शंखासुर नाम के राक्षस का वध किया था | द्वारकाधीश मंदिर 4 धामों में से एक है अन्य तीन धाम बद्रीनाथ,जगन्नाथपुरी और रामेश्वरम धाम हैं। द्वारिकाधीश मंदिर भगवन श्री हरी विष्णु के अंशावतार प्रभु श्री कृष्णा का मंदिर है|

द्वारका के बारे में कहा जाता है कि द्वारका को देवता विश्वकर्मा(जिन्हें देवतायों का वास्तुकार माना जाता है ) ने भगवान् श्रीकृष्ण के कहने पर समुद्र से प्राप्त भूमि के एक टुकड़े पर एक ही रात में इस भव्य नगरी का निर्माण कर दिया था |

भगवन श्रीकृष्ण की द्वारिका तत्कालीन समय की अत्यधिक समृद्ध नगर था जहाँ सोने चांदी और बहुमूल्य रत्नों से जड़ित अनेक महल थे , अनेक सुंदर झीलें ,उद्यान थे , बंदरगाह थे,द्वारिका तत्कालीन समय का प्रमुख व्यापारिक केंद्र था |

भगवान श्री कृष्ण के पृथ्वी छोड़ने पर ,उनके द्वारा बसायी गई द्वारका नगरी भी समुद्र में समा गई|

द्वारकाधीश मंदिर वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है , मंदिर कई मंजिल में बना हुआ है ,जिसके शिखर की ऊँचाई लगभग 235  मीटर है, मंदिर में 72 स्तम्भ है |

मंदिर में मुख्य दो प्रवेश द्वार हैं। उत्तरी प्रवेश द्वार को “मोक्ष द्वार” कहा जाता है,जिसका मार्ग एक बाज़ार में से होकर मंदिर तक आता है और दक्षिण प्रवेश द्वार जिसे “स्वर्ग द्वार” भी कहा जाता है,जो  बाहर की ओर ले जाने वाली 56 सीढ़ियों के द्वारा गोमती नदी की ओर ले जाता है ।

मंदिर के शिखर पर विविध रंगों में बनी 84 फुट लम्बी ध्वजा लहराती रहती है जोकि दूर से ही दिखाई देती है ये ध्वजा पूरे दिन में 5 बार  बदल जाता है, लेकिन प्रतीक एक ही रहता है।| मंदिर के गर्भगृह में चांदी के सिंहासन पर भगवान श्री कृष्ण की चार भुजाओं वाली शयामवर्णी मूर्ती विराजित है और प्रभु के चार हाथो में सुदर्शनचक्र,शंख,कमल और गदा हैं। 

 द्वारिकाधीश के मूल मंदिर का निर्माण कृष्ण के पोते  वज्रभ द्वारा श्री कृष्ण जिस महल में रहते थे उसके ऊपर किया गया था।जबकि वर्तमान मंदिर का निर्माण 15-16 वीं शताब्दी में चालुक्य शैली में किया गया है|

द्वारकाधीश मंदिर के दर्शन का समय

(dwarkadhish temple timing)

प्रातः 7 :00 बजे से अपराह्न 12:30 तक 

शाम  05.00 से 09.30 तक 

द्वारकाधीश मंदिर कैसे जाएँ

(how to reach dwarkadhish temple)

द्वारिकाधीस मंदिर से निकटतम हवाईअड्डा :- द्वारिकाधीस मंदिर से लगभग  47 किलोमीटर दूर जामनगर हवाईअड्डा है , इसके अतिरिक्त आप पोरबंदर हवाईअड्डे (एयरपोर्ट) तक फ्लाइट से आ सकते है जोकि द्वारिकाधीस मंदिर से लगभग 100 किलोमीटर दूर है। जहाँ से ऑटो , टैक्सी के द्वारा आप आराम से द्वारिकाधीस मंदिर जा सकते है |

द्वारकाधीश मंदिर से निकटतम रेलवे स्टेशन :- द्वारका रेलवे स्टेशन से मात्र 1 किमी दूर है| जहाँ से ऑटो , टैक्सी के द्वारा आप आराम से द्वारिकाधीस मंदिर जा सकते है |

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