आपके घर की भूमि धनदायक है या धननाशक? bhumi vastu

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आपके घर की भूमि धनदायक है या धननाशक? bhumi vastu

(vaastu niyam in hindi)

हिन्दू संस्कृति संसार की सर्वाधिक परिष्कृत संस्कृति है, इस संस्कृति से जुड़े तथ्यों का मात्र धार्मिक ही नही वरन वैज्ञानिक आधार भी है| हिन्दू संस्कृति में चाहे ज्योतिष हो अथवा वास्तु सभी पूर्णत: प्रमाणित विधा है और इनकी सत्यता को नकारा नही जा सकता है | ये बात अलग है कि कुछ स्वार्थी लोगों ने ज्योतिष और वास्तु से लोगो को भयभीत करके धन कमाने का काम किया है, जिससे ज्योतिष,वास्तु को अनेक लोग गलत मानने लगे है|

किन्तु maihindu.com के द्वारा हम आप सभी को इनसे जुड़े तथ्यों को बताने का प्रयास कर रहे है|

यदि आपको कोई संदेह हो तो आप निसंकोच नीचे दिए गये comment box में comment कर सकते है|

इस लेख के द्वारा हम आपको वास्तु से जुड़े कुछ तथ्य बता रहे है, आशा है आपको पसंद आयेंगे:

हमारे निवास की भूमि का ढलान और इसका हमारे जीवन पर प्रभाव

  1. भूमि का ढलान सर्वोत्तम ईशान कोण की तरफ माना जाता है क्योंकि इस प्रकार के ढलान को धनदायक , विद्यादायक,पुत्रदायक माना जाता है, इस प्रकार का ढलान अनेक सुखों को देने वाला होता है| जबकि इसके विपरीत अर्थात ईशान कोण की तरफ ऊंचाई गृह कलेश दायक , इससे वंश वृद्धि भी रुक सकती है|
  2. पूरब की ओर ढलान वाली भूमि समाज में सम्मान,पद और पुत्र दायक होती है|
  3. आग्नेय कोण की तरफ भूमि का ढलान होने पर धननाश ,आग्निकांड जैसे संकट का सामना करना पद सकता है | जबकि अग्निकोण की भूमि ऊँची होने पर धनवृद्धि होती है |
  4. दक्षिण दिशा की ओर ढलान वाली भूमि रोग देने वाली ,धननाशक,वंशनाशक होती है
  5. नैरत्य कोण की ओर ढलान वाली भूमि- भूत प्रेत का प्रभाव या डर ,अज्ञात भय देने वाली ,धन नाशक,रोग देने वाली होती है,यहाँ चोरी की भी सम्भावना अधिक होती है|
  1. पश्चिम दिशा की ओर ढलान वाली भूमि रोग और शोक देने वाली होती है|
  2. वायव्य कोण की ओर ढलान वाली भूमि निवास स्थान से दूर रहने को विवश कर देती है,कलेश,मानसिक अशांति देने वाली होती है|
  3. उत्तर दिशा में ढलान वाली भूमि भरपूर अवसरों को खोलने वाली,सभी इच्छाओं की पूर्ती करने वाली ,धन देने वाली होती है |
  4. ईशान कोण और पूरब दिशा की भूमि ऊँची और पश्चिम दिशा और नैरत्य कोण की भूमि नीची हो तो कुलहानि होती है|
  5. ईशान कोण , आग्नेय कोण और पश्चिम में भूमि ऊँची हो लेकिन नैरत्य कोण में नीची हो तो निर्धनता आती है |
  6. ईशान कोण ,वायव्य कोण और नैरत्य कोण में ऊँची भूमि किन्तु आग्नेय कोण में नीची भूमि मृत्यु या मृत्यु तुल्य कष्ट देने वाली होती है |
  7. आग्नये कोण की ऊँची भूमि धनदायक होती है |
  8. आग्नये कोण में ऊँची भूमि किन्तु नैरत्य,वायव्य,ईशान कोण की नीची भूमि ठीक ठाक होती है
  9. नैरत्य कोण में ऊँची किन्तु वायव्य, ईशान और आग्नये कोण में नीची भूमि लाभ प्रदायक होती है |
  10. भूमि का मध्य भाग यानि ह्रदय स्थान ऊँचा और शेष सभी दिशायों में नीची भूमि सभी प्रकार के सुख देने वाली और धन धन्य से भरपूर होती है |

साथियों किसी भी भूमि में भिन्न भिन्न दिशायों में अनेक प्रकार की स्थिति हो सकती है और ये ध्यान से देखने पर ही पता लगता है किन्तु जो स्थितियां ऊपर दी गयीं है उनसे आप अपने निवास स्थान की भूमि का मिलान करके कभी भी हमें अपने विचार ,संदेह निसंकोच बता सकते है|

आने वाली post में आप जानेंगे की आपको आपके राशि नाम के अनुसार,अपने निवास के निकट किस प्रकार के वनस्पति यानि पेड़ पौधे लगाने चाहिए|     

 

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