ओंकारेश्वर मन्दिर omkareshwar jyotirlinga A 2 Z Complete & Easy Guide
मध्य प्रदेश के इंदौर नगर के निकट (लगभग 77 किमी दूर ) और नर्मदा नदी के किनारे विराजित है प्रभु ओंकारेश्वर | 12 ज्योतिलिंगो में प्रभु ओंकारेश्वर का स्थान चौथा आता है |

मध्य प्रदेश के इंदौर नगर के निकट (लगभग 77 किमी दूर ) और नर्मदा नदी के किनारे विराजित है प्रभु ओंकारेश्वर | 12 ज्योतिलिंगो में प्रभु ओंकारेश्वर का स्थान चौथा आता है |

हिन्दू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक मकर सक्रांति पर्व है | मकर संक्रान्ति ( makar sankranti) पर्व उस दिन को मनाया जाता है,जिस दिन सूर्य 12 राशियों में दसवी राशी यानि मकर राशी में प्रवेश करते है और सूर्य सामान्यतः 14 जनवरी या 15 जनवरी तक मकर राशी ( Capricorn ) में आ जाते है |

प्रभु नागेश्वर नागों के ईश्वर है इसलिए यह मंदिर विष और विष से संबंधित रोगों से मुक्ति के लिए प्रसिद्ध है। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर में भगवान शिव की ध्यान मुद्रा में एक बड़ी ही मनमोहक विशाल प्रतिमा है जिसकी कारण यह मंदिर बहुत दूर से ही दिखाई देने लगता है

हिन्दू पंचांग में योग का महत्व importance of yoga in hindu panchanga – 27 different yoga मित्रों प्रतिदिन ग्रह नक्षत्रो की स्थिति बदलती है और साथ ही प्रतिदिन पंचांग मे योग भी बदलते हैं , हिन्दू पंचांग में योग का महत्व (importance of yoga ) बहुत अधिक होता है क्योंकि योग से हमे ये पता…

पूर्णिमा से अमावस्या तक 15 तिथियाँ और फिर अमावस्या से पूर्णिमा 15 तिथियाँ इस प्रकार कुल 30 तिथि होती है

उड़ीसा राज्य के पुरी नगर में बंगाल की खाड़ी के तट पर पूरी सृष्टि के स्वामी श्री जगन्नाथ विराजित है| हिन्दू धर्म में अति पवित्र चार धाम में से एक धाम है जगन्नाथ पुरी , अन्य तीन धाम है – बद्रीनाथ,द्वारिका और रामेश्वरम|

बद्रीनाथ मन्दिर की प्राचीनता इसी से पता चलती है कि बद्रीनाथ मंदिर का उल्लेख विष्णु पुराण, महाभारत तथा स्कन्द पुराण समेत कई प्राचीन ग्रन्थों में मिलता है और प्रभु बद्रीनाथ तीर्थ के बारे में ये कहा गया है कि स्वर्ग, पृथ्वी तथा नर्क तीनों ही स्थान में चाहे कितने ही तीर्थ हो किन्तु बद्रीनाथ जैसा तीर्थ न कभी था, न है और न ही कभी होगा।

गुजरात के जामनगर जनपद में गोमती नदी जिसे गोदावरी के नाम से भी जाना जाता है के तट पर स्थित है , प्रभु श्री कृष्णा की नगरी द्वारका | देवता विश्वकर्मा ने एक ही रात में इस भव्य नगरी का निर्माण कर दिया था |

शिवपुराण में घुश्मेश्वर महादेव का वर्णन मिलता है,जिन दम्पतियों को अनेक स्थानों पर उपचार कराने के बाद और अनेक वर्षों के बाद भी जब संतान नही होती है , तो प्रभु घुश्मेश्वर के पूजन से और प्रभु की कृपा से उनको भी संतान प्राप्त हो जाती है |

ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी
तुम को निशदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी. ॐ जय अम्बे…