बसंत पंचमी कब और क्यों मनाई जाती है ? when & why basant panchami celebrated ? full information
बसंत पंचमी पर्व विद्या प्राप्ति के साथ साथ वसंत ऋतु के आगमन की ख़ुशी में भी मनाया जाता क्योंकि बसंत ऋतु को सभी ऋतुओं में सर्वश्रेष्ट माना गया है|
बसंत पंचमी पर्व विद्या प्राप्ति के साथ साथ वसंत ऋतु के आगमन की ख़ुशी में भी मनाया जाता क्योंकि बसंत ऋतु को सभी ऋतुओं में सर्वश्रेष्ट माना गया है|

साथियों समस्त संसार में जिसके पास भी विद्या है,ज्ञान है,संगीत है,सुरलय और ताल है वो सभी कुछ वीणा वादिनी-हंस वाहिनी-विद्या दायिनी माँ सरस्वती के आशीर्वाद से ही है और हिन्दू धर्म में माँ भगवती अपने भिन्न भिन्न गुणों जैसे सतोगुण , रजोगुण , तमोगुण के साथ अपने भक्तों का कल्याण करती है जिसमे माँ सरस्वती सतोगुणी , माँ लक्ष्मी रजोगुणी और माँ काली तमोगुणी देवियाँ है|

हिन्दू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक मकर सक्रांति पर्व है | मकर संक्रान्ति ( makar sankranti) पर्व उस दिन को मनाया जाता है,जिस दिन सूर्य 12 राशियों में दसवी राशी यानि मकर राशी में प्रवेश करते है और सूर्य सामान्यतः 14 जनवरी या 15 जनवरी तक मकर राशी ( Capricorn ) में आ जाते है |

हिन्दू पंचांग में योग का महत्व importance of yoga in hindu panchanga – 27 different yoga मित्रों प्रतिदिन ग्रह नक्षत्रो की स्थिति बदलती है और साथ ही प्रतिदिन पंचांग मे योग भी बदलते हैं , हिन्दू पंचांग में योग का महत्व (importance of yoga ) बहुत अधिक होता है क्योंकि योग से हमे ये पता…

पूर्णिमा से अमावस्या तक 15 तिथियाँ और फिर अमावस्या से पूर्णिमा 15 तिथियाँ इस प्रकार कुल 30 तिथि होती है

ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी
तुम को निशदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी. ॐ जय अम्बे…

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके॥

शिवजी की आरती bhagwan shiv ji ki aarti देवो के देव महादेव की महिमा कोई नही समझ सकता है लेकिन कहा जाता है की ये बहुत भोले है,यदि मन अशांत हो तो शिवजी की आरती (shiv ji ki aarti) करे,इससे कुंडली का चन्द्र सही होगा *शिवजी की आरती shiv ji ki aarti* ॐ जय शिव…

गणेश जी की आरती Ganesh ji ki aarti in hindi & english गणेश जी की आरती Ganesh ji ki aarti in hindi english : गणेश जी सभी देवों में प्रथम पूजनीय है, प्रत्येक कार्य प्रारम्भ करने से पूर्व और राहु,बुद्ध और केतु को शांत करने के लिए गणेश जी का नाम लेना अति आवश्यक होता…

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे।भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे।