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Dakshineswar Kali Temple-माँ काली का विश्व प्रसिद्द दक्षिणेश्वर काली मंदिर

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Dakshineswar Kali Temple-माँ काली का विश्व प्रसिद्द दक्षिणेश्वर काली मंदिर

(दक्षिणेश्वर काली मंदिर कहां है)

दक्षिणेश्वर काली मंदिर (Dakshineswar Kali Temple):  पश्चिम बंगाल राज्य  के कोलकाता नगर में, माँ काली को समर्पित विश्व प्रसिद्द मंदिर है देवी काली को देवी भद्रारिणी भी कहा जाता हैं, जो काली माता का ही एक रूप है।  दक्षिणेश्वर काली मंदिर जो कि बेलूर मठ के दूसरी ओर हुगली नदी तट पर स्थित है। ऐसा कहा जाता है की इस मंदिर समूह में भगवान शिव के अनेक मंदिर थे जिसमें से अब मात्र 12 मंदिर बचे हुए हैं।

बेलूर मठ और दक्षिणेश्वर काली मंदिर (dakshineswar temple) बंगाल राज्य में बहुत पुराने समय से अध्‍यात्‍म का प्रमुख केंद्र रहें है। यहाँ से रामकृष्ण परमहंस का भी जुडाव था जो विवेकानंद जी के गुरु थे और काली माता के परम उपासक थे ।

ऐसा कहा जाता है कि संत रामकृष्ण परमहंस को माँ काली ने दक्षिणेश्वर काली मंदिर में दर्शन दिए थे । दक्षिणेश्वर काली मंदिर के निकट ही संत रामकृष्ण परमहंस का कमरा है जिसमें वो रहा करते थे , इस कमरे में उनकी स्मृति से जुड़े समान और उनका पलंग भी रखा हुआ है।

दक्षिणेश्वर काली मंदिर के बाहर संत रामकृष्ण परमहंस की धर्मपत्नी श्रीशारदा माता और साथ ही रानी रासमणि की समाधि स्थल के रूप में  मंदिर है और वह वट( बरगद का पेड़ ) वृक्ष है, जिसके नीचे रामकृष्ण परमहंस जी ध्यान किया करते थे।

दक्षिणेश्वर काली मंदिर में माँ काली के दर्शन करने देश विदेश से लोग आते हैं और इसी लिए माँ काली के दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतार लग जाती है जिसमे खड़े होकर देवी काली माता के भक्त अपनी बारी के आने की प्रतीक्षा करते हैं। 

दक्षिणेश्वर काली मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?

Why is Dakshineswar Kali Temple famous?

(दक्षिणेश्वर काली मंदिर का रहस्य )

दक्षिणेश्वर काली मंदिर देशभर में स्थित माता के 51 शक्तिपीठों में से एक है , जब प्रभु श्री विष्णु भगवान ने अपने चक्र से मां सती के शरीर के टुकड़े किए थे तो माँ सती के दाएं पैर की कुछ उंगलियां इसी स्थान पर गिरी थीं और यहां पूजा करने वाले भक्तो की माँ काली अवश्य ही मनोकामना पूरा करती है.

ये मंदिर संसार के प्रसिद्द माँ काली के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है. रामकृष्ण परमहंस ने यहां माँ काली की साधना की थी और उन्हें काली माता के दर्शन भी हुए थे 

दक्षिणेश्वर काली मंदिर का इतिहास

(दक्षिणेश्वर काली की कथा : Story of Dakshineswar Kali in Hindi)

दक्षिणेश्वर काली मंदिर का इतिहास – dakshineswar temple History in Hindi

वर्ष 1847 के समय देश में अंग्रेजों का शासन था और पश्चिम बंगाल में रानी रासमनी रहती थी जोकि एक बहुत ही पैसे वाली समृद्ध रानी थी किंतु वो एक बहुत ही परोपकारी और देवी काली की भक्त थी। । रानी रासमनी विधवा थी और अपने जीवन की मध्यायु तक प्रभु भक्ति में डूब चूँकि थी , स्वाभाव में धार्मिकता बढ़ जाने पर उनके मन में भारत के सभी तीर्थों के दर्शन करने का विचार आया।

रानी रासमनी ने ये सोचा कि क्यों न वो अपनी तीर्थ यात्रा का आरंभ वाराणसी से करें ? वाराणसी रहकर वो माँ काली का कुछ दिनों तक ध्यान भी कर लेंगी । उन दिनों कोलकाता से वाराणसी जाने के लिए लोग नाव प्रयोग किया करते थे क्योंकि वाराणसी और कोलकाता के बीच कोई रेल लाइन की सुविधा नहीं थी। अब चूँकि वाराणसी और कोलकाता दोनों ही नगरों से गंगा नदी बहती है इसलिए लोग गंगा नदी के जल मार्ग से ही वाराणसी जाते थे।

इसलिए रानी रासमनी ने भी यही मार्ग अपनाने की सोची किंतु रानी रासमनी की काली माता में अत्यधिक आस्था थी इसलिए जाने के ठीक एक रात पहले रानी अपने मन में काली माता का ध्यान करके गईं और रात में उन्हें एक स्वप्न आया जिसमे माँ काली ने रानी से कहा कि वाराणसी जाने की कोई आवश्यकता नहीं है।

तुम गंगा के किनारे एक सुंदर मंदिर का निर्माण कराओ और उसमे मेरी एक प्रतिमा को स्थापित करवाओ – “मैं उस मंदिर की प्रतिमा में स्वंम प्रकट होकर श्रद्धालुओं की पूजा को स्वीकार करुंगी”। इस स्वप्न को देखकर रानी रासमनी की आंख खुल गयी और दूसरे दिन सुबह उन्होंने वाराणसी जाने का कार्यक्रम निरस्त कर दिया और गंगा के किनारे मां काली के मंदिर के लिए स्थान ढूँढने के विषय में सोचने लगी ।

रासमनी गंगा के किनारे स्थान ढूँढ़ते ढूँढ़ते जब इस घाट पर आईं तो उनकी अंतरात्मा में से एक आवाज आई कि इसी स्थान पर मंदिर का निर्माण होना चाहिए।

और इसी के साथ  दक्षिणेश्वर काली मंदिर  बनने का काम प्रारंभ हो गया। इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1847 में आरंभ हुआ और वर्ष 1855 में अर्थात कुल 8 वर्षो में मंदिर बन कर तैयार हो गया ।

दक्षिणेश्वर काली मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए 1 लाख से अधिक ब्राह्मण एकत्रित हुए थे 

दक्षिणेश्वर काली मंदिर (Dakshineswar Kali Temple) माँ काली 2

दक्षिणेश्वर काली मंदिर की वास्तुकला

(Architecture of Dakshineswar Kali Temple in Hindi)

दक्षिणेश्वर काली मंदिर के गर्भगृह में देवी काली की एक मूर्ति स्थापित है जिन्हें भद्रारिणी भी कहा जाता हैं जो भगवान् शिव के वक्षस्थल पर खड़ी है वहीँ दो मूर्तियों चांदी से निर्मित एक हजार पंखुड़ियों वाले कमल के पुष्प रुपी सिंहासन पर विराजित है। ये  मंदिर लगभग 25 एकड़ के विशाल क्षेत्र में स्थित है 

मंदिर के अंदर माँ काली की मूर्ती रखने के लिए चांदी से बना हुआ कमल का फुल रखा गया है जिसमे हजार पंखुड़ियां बनी हुई है। उनका मुख काले पत्थरों से बनाया गया है और उनके हाथ, जीभ और दांत को सोने से मढ़ा गया है।

दक्षिणेश्वर मां काली के इस मंदिर की ऊंचाई 100 फुट है और चौड़ाई 46 फुट है। मां काली का इस मंदिर में तीन तल हैं जिसमे उपरी दो तलों में सुंदर आकृतियां बनाई गई है और 9 मीनारों का निर्माण किया गया है जो इस मंदिर की सुंदरता को कई गुना बढ़ा देती हैं। 

दक्षिणेश्वर मां काली का ये मंदिर विश्व में सबसे प्राचीन मंदिरो मे से एक  है। 

दक्षिणेश्वर काली मंदिर का निर्माण बंगाल वास्तुकला की नवरत्न शैली में हुआ है। मंदिर 46 फुट लंबा चौड़ा है साथ ही इसकी ऊँचाई 100 फुट है।

काली मंदिर Dakshineswar Kali Temple माँ काली

 

दक्षिणेश्वर काली मंदिर के दर्शन का समय

Darshan Timings of Dakshineswar Kali Temple in Hindi

दक्षिणेश्वर काली मंदिर में माँ काली के दर्शन

प्रातः  6.00 बजे से  दोपहर 12.30 तक

सायं 3.00 बजे से रात्रि 8.30 बजे तक होते हैं खुलता है

दक्षिणेश्वर काली मंदिर का प्रवेश शुल्क :

Entry fees of Dakshineswar Kali temple in Hindi

दक्षिणेश्वर काली मंदिर में माँ काली के दर्शन करने के लिए भक्तो को मंदिर में प्रवेश और माता के दर्शन के लिए कोई भी शुल्क नही देना होता है।

दक्षिणेश्वर काली मंदिर में दर्शन निशुल्क होते हैं 

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दक्षिणेश्वर काली मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय

Best time to visit Dakshineswar Kali Temple in Hindi

सर्दियों के महीने जैसे अक्टूबर से फरवरी तक के बीच का समय दक्षिणेश्वर काली मंदिर की यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय होता है क्योंकि सर्दियों का मौसम के समय में कोलकाता में विभिन्न उत्सव आयोजित होते है जैसे दुर्गा पूजा होती है जोकि कोलकाता की सबसे बड़ी पूजा होती है।

ग्रीष्मकाल में इस क्षेत्र की यात्रा से बचें क्योंकि गर्मियों में कोलकाता का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर ही रहता है और समुद्री क्षेत्र के निकट होने से यहाँ आद्रता ( humidity ) भी बढ़ जाती है . 

दक्षिणेश्वर काली मंदिर कैसे पहुचें ?

How to reach Dakshineswar Kali Temple in Hindi

दक्षिणेश्वर काली मंदिर कोलकाता नगरीय क्षेत्र में आता है इसलिए यहाँ पहुंचना बहुत ही सरल है क्योंकि ये कोलकाता नगर से 13 km और हावड़ा से 19 km दूर स्थित है , यहाँ पहुँचने के लिए हम निजी वहां या निजी बस,सरकारी बस या टैक्सी आदि का प्रयोग करके जा सकते है।

तो आइये जानते है कि दक्षिणेश्वर काली मंदिर जायें –

फ्लाइट से दक्षिणेश्वर काली मंदिर कैसे पहुंचे 

How To Reach Dakshineswar Kali Temple By Flight In Hindi

कोलकाता नगर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (Netaji Subhas Chandra Bose International Airport (IATA: CCU, ICAO: VECC) है जो नगर के केंद्र से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा कोलकाता , भारत के लगभग सभी प्रमुख नगरों के साथ-साथ संसार के अनेक प्रमुख देशों जैसे यूरोप के देशों और दक्षिण पूर्व एशिया के देशों से जुड़ा है।

वायुयान से उतरने के बाद आप बस, ऑटो, टैक्सी आदि की सहायता से दक्षिणेश्वर काली मंदिर पहुंच सकते हैं।

ट्रेन से दक्षिणेश्वर काली मंदिर कैसे पहुंचे 

How To Reach Dakshineswar Kali Temple By Train In Hindi

दक्षिणेश्वर काली मंदिर यदि आप ट्रेन से जाना चाहते है तो कोलकाता में हावड़ा रेलवे स्टेशन (Howrah railway station- station code : HWH )  और सियालद रेलवे स्टेशन (Sealdah railway station- Station code:SDAH) नाम के दो मुख्य रेलवे स्टेशन हैं और ये दोनों रेलवे स्टेशन भारत के सभी बड़े स्टेशनों से जुड़े हुए है ।

इसलिए आप भारत के प्रमुख नगरों से ट्रेन से यात्रा करके हावड़ा और सियालद रेलवे स्टेशन सरलता से आ सकते है और यहाँ आकर ऑटो,टैक्सी या अन्य स्थानीय वाहनों की सहायता से दक्षिणेश्वर काली मंदिर तक पहुंच सकते हैं।

विभिन्न ट्रेनों में रिजर्वेशन की स्थिति जानने के लिए यहाँ click करें 

click करे : – IRCTC 

सड़क मार्ग से दक्षिणेश्वर काली मंदिर कैसे पहुंचे 

How To Reach Dakshineswar Kali Temple By Road In Hindi

कोलकाता भारत के सभी प्रमुख नगरों से सड़क मार्ग से बहुत अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। भारत के लगभग किसी भी भाग से आप कोलकाता स्वंम के वाहन या नियमित चलने वाली बस परिवहन की सेवा ले सकते है । दिल्ली से, आगरा , कानपुर , वाराणसी , पटना जैसे महानगरों से कोलकाता रास्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा हुआ है , वहीँ दक्षिणी भारत के नगरों से यहाँ आने के लिए रास्ट्रीय राजमार्गों को प्रयोग कर सकते है

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