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संगीतमय गधा:पंचतंत्र की कहानी musical donkey

इतने सारे फल और सब्जियां तो एक साथ उसने जीवन में नही देखे थे,ताजे  रसीले फल और सब्जियां देखकर हीरा गधा अपने आप को रोक नहीं पाता है और बिना देरी किये वह अपनी भूख मिटाने के लिए फल और सब्जियों को खाने लगता है। अब ज्यादा खाने के बाद नींद तो आती ही है…

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पंचतंत्र की कहानी: संगीतमय गधा 

The Musical Donkey panchtantra story in Hindi

(sangeetmay gadha)(musical donkey)

एक समय की बात है, एक गांव में एक धोबी रहता था जिसका नाम रामू था ।  रामू के पास एक गधा था, जिसका नाम हीरा था। चूंकि, रामू धोबी स्वाभाव से बहुत ही कंजूस था,वो हमेशा पैसे खर्च न हो इस बात पर ध्यान देता था , इसलिए रामू अपने गधे को जान बूझकर सही प्रकार से चारा नहीं देता था जिससे उसके पैसे खर्च न हो और हीरा गधे को चरने के लिए बाहर भेज दिया करता था। अब जब हीरा गधे को बाहर मैदान में घास मिल जाती थी तो वो खा लेता था किन्तु अनेक बार जैसे गर्मियों के दिनों में घास न मिलने के कारण हीरा भूखा ही रह जाता था इससे वो गधा बहुत ही निर्बल हो गया था। जब एक दिन रामू धोबी ने उसे घास चरने के लिए बाहर छोड़ा तो वह चरते-चरते दूर एक वन में चला गया जहाँ उसकी उसकी मुलाकात एक गीदड़ से हुई।

गीदड़ ने हीरा गधे से पूछा, “गधे भईया तुम इतने निर्बल कैसे हो क्या तुम्हे चारा नही मिलता है क्या ?” तो गधे ने गीदड़ को बताया “ मेरा मालिक रामू बहुत कंजूस है वो मुझसे दिनभर काम करवाता है और मुझे चारे में खाने के लिए कुछ भी नहीं देता है , इस कारण मै इधर-उधर भटक-भटक कर जहाँ कुछ मिलता है उससे अपना पेट भर लेता हूँ | अनेक बार कुछ खाने को नही मिलता है तो मुझे भूखा भी रहना पड़ता है जिससे मैं बहुत कमजोर हो गया हूं।”  हीरा गधे की यह बात सुनकर गीदड़ को बहुत दया आई और फिर उस गीदड़ ने हीरा गधे से कहा “मैं तुम्हें एक उपाय बताता हूं, जिससे तुम बहुत ही जल्दी स्वस्थ और बलवान हो जाओगे।”|

हीरा गधे ने पुछा कि बताओ वो क्या उपाय है तब गीदड़ ने कहा  “यहां निकट में ही एक बहुत बड़ा बगीचा है। उस बगीचे में हरी-भरी सब्जियां और फल लगे हुए हैं। मैं स्वंम उस बगीचे में चुपके से जाता हु और इसके लिए मैंने एक खुफिया रास्ता बना रखा है, जिससे मैं प्रतिदिन रात को बगीचे में जाकर हरी-भरी सब्जियां और फल खा लेता हूं और देखो मै कितना स्वस्थ और बलवान हूँ ।”

उस गीदड़ की बात सुनते ही हीरा गधा उसके साथ उस बग़ीचे में जाने के लिए तैयार हो जाता है और फिर गीदड़ और हीरा गधा दोनों ही मिलकर उस बगीचे में हरी-भरी सब्जियां और फल खाने के लिए चल देते हैं।

बग़ीचे में पहुंच कर हीरा गधे की ख़ुशी से आंखे चमक उठती हैं। इतने सारे फल और सब्जियां तो एक साथ उसने जीवन में नही देखे थे,ताजे  रसीले फल और सब्जियां देखकर हीरा गधा अपने आप को रोक नहीं पाता है और बिना देरी किये वह अपनी भूख मिटाने के लिए फल और सब्जियों को खाने लगता है। अब ज्यादा खाने के बाद नींद तो आती ही है इसलिए गीदड़ और गधा जी भर के खाने के बाद उसी बग़ीचे में सो जाते हैं।

रात बीतने के बाद अगले दिन सूरज निकल जाता है और सबसे पहले पहले गीदड़ उठ जाता है और हीरा गधे को तुरंत बग़ीचे से बाहर निकलने को कहता है। हीरा गधा बिना सवाल किए गीदड़ की बात मान लेता है और दोनों वहां से तेजी से भाग जाते हैं।

अब तो गीदड़ और गधे का ये रोज का काम हो जाता है ,वो दोनों रोज बग़ीचे में जाकर हरी-भरी सब्जियां और फल खाते और वहीँ सो भी जाते । धीरे-धीरे समय के साथ हीरा गधे की कमजोरी दूर होने लगी और वो स्वस्थ और बलवान हो गया ।

अब तो हीरा गधे की खाल के बाल चमकने लगे और थकान तो जाने कहाँ छू-मंतर हो गयी । एक दिन हीरा गधा रसीले फल और सब्जियां खूब खाकर मस्त हो गया और जमीन पर लोटने लगा। तभी गीदड़ ने हीरा से पुछा पूछा, “ हीरा भाई तुम्हारी तबीयत तो ठीक है न? तुम जमीन पर क्यों लोट रहे हो ” तो हीरा गधा गीदड़ से बोला  “आज मैं बहुत खुश हूं आज तो मेरा मन गाना गाने का हो रहा है।”

गधे की यह बात सुनकर गीदड़ घबराया और बोला, “न हीरा भाई, यह काम भूलकर भी मत करना। ये मत भूलो कि हम चोरी से रसीले फल और सब्जियां खा रहे हैं। कहीं बग़ीचे के मालिक ने तुम्हारा बेसुरा गाना सुन लिया और वो यहां आ गया, तो बड़ी दिक्कत हो जाएगी। भाई गाना कहीं और गा लेना , यहाँ गाओगे तो लेने के देने पड़ जायेंगे ”

गीदड़ की यह बात सुनकर हीरा गधा बोला, “तुम क्या जानो मै कितना अच्छा गाता हूँ । हम गधे तो खानदानी गायक होते हैं। हम गधों का ढेंचू राग तो पूरे संसार में प्रसिद्द है और लोग इसे बड़े शौक से सुनते हैं। आज तो मेरा मन है गाना गाने का  इसलिए मैं तो गाऊंगा भाई ।”

गीदड़ समझ जाता है कि मूर्ख गधे को अब गाना गाने से कोई नही रोक सकता है ।

गीदड़ ये सोचने लगा कि क्यों मै इस मूर्ख गधे के चक्कर में पड़ गया। कुछ सोचते हुए वो हीरा गधे से बोला, “ हीरा भाई तुम सही कह रहे हो, गाने-वाने के बारे में हम क्या जानते है । अब तुम कह रहे हो तो हो सकता है कि तुम्हारी सुरीली आवाज सुनकर बग़ीचे का मालिक खुश होकर तुम्हें फूल माला लेकर पहनाने आ जाये , तुम गाना गा लो ।” गीदड़ की बात सुनकर हीरा गधा खुशी से धरती पर और लोटने लगा । लोटने के बाद हीरा गधा कहता है, “ठीक है,अब मैं अपना गाना गाना शुरू करता हूं।”

ये सुनकर गीदड़ कहता है, “मैं भी तुम्हें फूल माला पहनाना चाहता हूँ  इसलिए तुम अपना गाना मेरे जाने के 15 मिनट बाद शुरू करना। जैसे ही तुम्हारा गाना खत्म होगा मै स्वंम फूल माला लेकर वापस आ जाऊंगा।”

गीदड़ की यह बात सुनकर गधा और भी प्रसन्न हो जाता है और गधे ने गर्व से सहमति में सिर हिलाया और कहा , “जाओ गीदड़ भाई मेरे सम्मान की तैयारी करो जाओ मेरे लिए फूल माला लेकर आओ। मैं तुम्हारे जाने के 15 मिनट बाद ही गाना शुरू करूंगा।”

ये सुनने के बाद गीदड़ वहां से नौ दो ग्यारह हो जाता है।

गीदड़ के जाने के बाद मूर्ख गधा अपना गाना शुरू कर देता है यानि गधे ने मस्त होकर रेंकना शुरू कर दिया । हीरा गधे की आवाज सुनते ही बग़ीचे का मालिक बड़ी सी लाठी लेकर दौड़ता हुआ आ जाता है और गधे को देख कहता है कि अब समझ आया कि वो तू ही है जो मेरे बग़ीचे को रोज चर के चला जाता है। आज मैं तुझे नहीं छोड़ूंगा। इतना कहते ही बग़ीचे मालिक लाठी से गधे की जमकर पिटाई करने लगता है। बग़ीचे मालिक हीरा गधे को इतना मारता है कि वो मूर्ख गधा पिटाई से गधा अधमरा हो जाता है और बेहोश होकर जमीन पर गिर जाता है।

पंचतंत्र की कहानी: संगीतमय गधा से मिलने वाली सीख 

संगीतमय गधा कहानी से सीख मिलती है कि अगर कोई हमारी भलाई के लिए कुछ बात समझाता है, तो उसे मान लेना चाहिए। कभी-कभी हालात ऐसे हो जाते हैं कि दूसरों की बात न मानने से हम मुसीबत में पड़ सकते हैं।

(sangeetmay gadha)(musical donkey)

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