Lata-Mangeshkar

लता मंगेशकर:स्वर कोकिला (lata ji success story)

भारतीय फिल्म जगत में लता जी एकमात्र ऐसी गायिका कहीं जा सकती है जिन्होंने नरगिस  और मधुबाला जैसी अभिनेत्रियों से लेकर तो माधुरी दीक्षित,मनीषा कोइराला,करिश्मा कपूर जैसी नए दौर की अभिनेत्रियों को फिल्मो में अपनी आव़ाज…

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लता मंगेशकर जीवनी (Lata Mangeshkar Success Story )

lata mangeshkar biography in hindi 

लता मंगेशकर:निर्धन कन्या से सफलतम गायिका बनने की कहानी

लता जी का जीवन 13 वर्ष की आयु में कन्धों पर परिवार का बोझ लेकर चलने से संसार की सफलतम गायिका बनने की यात्रा है ,

साथियों जीवन में कितना भी अँधेरा क्यों न हो लेकिन जिन्हें अँधेरे से लड़ना आता है …उनकी जीत निश्चित होती है और इस बात का जीता जागता उदाहरण है लता जी का जीवन …

जी हाँ, लता जी यानि लता मंगेशकर जब मात्र 13 वर्ष की थी तभी उनके सर पर से पिता का साया हट गया और परिवार की जिम्मेदारी भी कंधो पर आ गयी लेकिन लता जी ने जीवन के संघर्ष से हार नही मानी और आज संगीत की दुनिया में उनका क्या स्थान है ये हम सब जानते है|

(लता मंगेशकर का परिवार  )(Lata Mangeshkar Family)

मित्रों लता मंगेशकर (जिनका पूरा नाम लता दीनानाथ मंगेशकर है ) का जन्म 28 सितम्बर, 1929 इंदौर, मध्यप्रदेश में गोमंतक मराठा परिवार में हुआ था। लता जी के पिता का नाम दीनानाथ मंगेशकर था जोकि एक मराठी संगीतकार, शास्त्रीय गायक और रंगमंच के कलाकार और साथ ही एक कुशल रंगमंचीय गायक भी थे और लता जी की माता का नाम शुधामती था जिन्हें शेवंती के नाम से भी पुकारा जाता था ,वो गुजराती थी और  लता जी के पिता दीनानाथ मंगेशकर की दूसरी पत्नी थी।

उनकी पहली पत्नी का नाम नर्मदा था जिसकी मृत्यु के बाद दीनानाथ ने नर्मदा की छोटी बहन शेवंती से विवाह कर लिया |

जन्म के समय लता जी का नाम हेमा रखा गया था जिसे बाद में उनके पिता ने एक नाटक के पात्र लतिका से प्रभावित होकर लता कर दिया |
लता के बाद मीना, आशा, उषा और हृदयनाथ का जन्म हुआ।

लता जी के पिता भी एक कलाकार थे इसलिए लता जी को भी बचपन से ही गीत संगीत का वातावरण ही मिला जिससे प्रभावित होकर लता जी ने मात्र 5 वर्ष की आयु में ही संगीत सीखना प्रारम्भ कर दिया और इसी संगीत की शिक्षा को लेते हुए जब वो स्कूल पढने गयी तो साथ के दूसरे बच्चो को भी संगीत सिखाने लगी जिससे उनकी टीचर उनसे बहुत नाराज हुई |

लता जी आपने साथ अपनी छोटी बहन को भी स्कूल लेकर जाने लगी तो स्कूल के टीचर्स ने उन्हें छोटी बहन को लाने से मन कर दिया जो लता जी को बहुत बुरा लगा और उन्होंने स्कूल जाना ही छोड़ दिया |

(लता जी के जीवन का संघर्ष )

जब लता जी मात्र 13 वर्ष की हुई तो वर्ष 1942 में इनके पिता की हृदयघात से मृत्यु हो गई। वो समय लता जी के जीवन का सबसे कठिन समय था क्योंकि लता जी का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था और बिना पिता के सहारे घर चलाना बहुत ही कठिन था | ऐसे में उनके पिता के मित्र नवयुग चित्रपट फिल्‍म कंपनी के मालिक मास्‍टर विनायक दामोदर ने लता जी के परिवार की बहुत सहायता की थी |

जब पिता की मृत्यु के बाद परिवार को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा था तो लता जी ने कुछ फिल्मो में अभिनय भी किया लेकिन उनकी पहली पसंद तो गायन ही थी | उन्होंने कुछ हिंदी और मराठी फिल्मों में अभिनय किया जिनके नाम इस प्रकार है :-पाहिली मंगलागौर (1942) जोकि एक अभिनेत्री के रूप में लता जी की पहली फ़िल्म थी , इस फिल्म में उन्होंने स्नेहप्रभा प्रधान की छोटी बहन की भूमिका निभाई थी । इसके बाद माझे बाल, चिमुकला संसार (1943), गजभाऊ (1944), बड़ी मां (1945), जीवन यात्रा (1946),माँद (1948), छत्रपति शिवाजी (1952) इतियादी फिल्मों में लता जी ने अभिनय किया था । 

लता जी को ये लगने लगा कि फिल्मो में काम करना है तो मुंबई में रहना होगा इसलिए वर्ष 1945 में ही लता जी मुंबई आ गई थीं |

मुम्बई आकर उन्होंने उस्ताद अमानत अली खान से संगीत का प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया | 1947 में देश विभाजन के बाद उस्ताद अमानत अली खान पाकिस्तान चले गये इसलिए वो रजब अली खा के भतीजे अमानत खा से शास्त्रीय संगीत सीखने लगी |

सन् 1947 में आई फ़िल्म “आपकी सेवा में” में गाये हुए उनके गीत से लोग लता जी पहचानने लगे और इसके बाद उन्हें दूसरी फिल्मो में भी गाने का अवसर मिलने लगा | 

लता जी के जीवन का पहला हिट गाना ‘मजबूर’ (1948) में गाया गीत ‘दिल मेरा तोड़ा, मुझे कहीं का ना छोड़ा’ माना जा सकता है जिसे गुलाम हैदर ने लता से गवाया था ,ये उनके जीवन का पहला हिट गाना बना | गुलाम हैदर लता जी के संगीत गुरु भी थे | इसीलिए लता जी गुलाम हैदर जी को ही अपना गॉडफादर मानती है क्योंकि गुलाम हैदर जी ने संघर्ष के दिनों में उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें काम दिया |

उस समय एक नए कलाकार को काम मिलना बहुत कठिन था क्योंकि फिल्म इंडस्ट्री में गायिका नूर जहान, शमशाद बेगम जैसी गायिकाओं की चलती थी और लोग उन्हें ही सुनना पसंद करते थे इसलिए फिल्म मेकर्स भी नए कलाकारों को लेकर कोई रिस्क नही लेना चाहते थे,  इसीलिए लता जी भी इन गायिकाओं की शैली में ही गाती थीं लेकिन लता जी ये भी जानती थी कि यदि फिल्मो में टिके रहना है तो अपनी शैली विकसित करनी होगी और उन्होंने यही किया। लता जी ने हिन्दी और उर्दू के उच्चारण को सीखना प्रारम्भ कर दिया  |

लेकिन तब भी लता जी फिल्मो में गायन में सक्रिय रही और वर्ष 1949 लता जी की life का turning point साबित हुआ क्योंकि वर्ष 1949 में लता जी ने एक साथ 4 हिट फिल्मों बरसात, दुलारी, अंदाज व महल में गायन किया और लोग उन्हें पहचानने लगे |

महल फिल्म का गाना ‘आएगा आनेवाला’ सुपर हिट हुआ जिसे हम आज भी बहुत ही शौक से सुनते है और इसी के साथ लता मंगेशकर ने हिन्दी फिल्म जगत में एक महत्वपूर्ण स्थान बना लिया |

लता जी ने मदर इंडिया, मुग़ल ए आज़म,दो बीघा ज़मीन, दो आँखें बारह हाथ जैसी हमेशा याद की जाने वाली फिल्मो में गाने गाये है। लता जी की आव़ाज से ही “महल”, “बरसात”, “एक थी लड़की”, “बडी़ बहन” जैसी फिल्मे बहुत ही लोकप्रिय हुई । इसके बाद एक के बाद एक अनेक सुपरहिट फिल्मो में उन्होंने अपनी आव़ाज दी जैसे :-

(latas hit songs)

  • “आजा रे परदेसी” (मधुमती-1958),
  • “ओ सजना बरखा बहार आई” (परख-1960),
  • “एहसान तेरा होगा मुझ पर”, (जंगली-1961),
  • “इतना ना मुझसे तू प्यार बढा़” (छाया- 1961),
  • “अल्ला तेरो नाम”, (हम दोनो-1961),
  • “ये समां” (जब जब फूल खिले-1965)   
  • दीदार,
  • बैजू बावरा,
  • उड़न खटोला,
  • मदर इंडिया,
  • बरसात,
  • आह,
  • श्री 420,
  • चोरी चोरी,
  • सज़ा,
  • हाउस नं 44,
  • देवदास,
  • मधुमति,
  • आज़ाद,
  • आशा,
  • अमरदीप,
  • बागी,
  • रेलवे प्लेटफॉर्म,
  • देख कबीरा रोया,
  • चाचा जिंदाबाद,
  • मुगल-ए-आजम,
  • दिल अपना और प्रीत पराई,
  • बीस साल बाद,
  • अनपढ़,
  • मेरा साया,
  • वो कौन थी,
  • अनारकली,
  • मिलन,
  • अनिता,
  • शगिर्द,
  • मेरे हमदम मेरे दोस्त,
  • दो रास्ते,
  • जीने की राह,
  • अमर प्रेम,
  • गाइड,
  • आशा,
  • प्रेमरोग,
  • सत्यम् शिवम् सुन्दरम्,
  • पाकीज़ा,
  • प्रेम पुजारी,
  • अभिमान,
  • हंसते जख्म,
  • हीर रांझा,
  • कटी पतंग,
  • आंधी,
  • मौसम,
  • लैला मजनूं,
  • दिल की राहें,

lata mangeshkar songs 1980 to 1990

लता जी की 1980 -1990 में बनी फ़िल्में जैसे :-

  • हिना,
  • रामलखन,
  • नागिन,
  • सिलसिला,
  • फासले,
  • विजय,
  • चांदनी,
  • कर्ज,
  • एक दूजे के लिए,
  • आसपास,
  • अर्पण,
  • नसीब,
  • क्रांति,
  • संजोग,
  • मेरी जंग,
  • राम लखन,
  • रॉकी,
  • फिर वही रात,
  • अगर तुम न होते,
  • बड़े दिल वाला,
  • मासूम,
  • सागर,
  • मैंने प्यार किया,
  • बेताब, लव स्टोरी,
  • राम तेरी गंगा मैली
  • डर,
  • लम्हें,
  • दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे,
  • दिल तो पागल है,
  • मोहब्बतें,
  • दिल से,
  • पुकार,
  • ज़ुबैदा,
  • रंग दे बसंती,
  • 1942 ए लव स्टोरी

जैसी अनेक फिल्मों में गाकर लता जी ने लोगों के जीवन में संगीत का आनंद घोला है |

अस्सी और नब्बे के दशक के कई नए संगीकार जैसे राम-लक्ष्मण,अनु मलिक, शिवहरी, आनंद-मिलिंद का भी ये सपना होता था की लता दी उनकी फिल्म में कोई एक ही गाना गा दे ।

भारतीय फिल्म जगत में लता जी एकमात्र ऐसी गायिका कहीं जा सकती है जिन्होंने नरगिस  और मधुबाला जैसी अभिनेत्रियों से लेकर तो माधुरी दीक्षित,मनीषा कोइराला,करिश्मा कपूर जैसी नए दौर की अभिनेत्रियों को फिल्मो में अपनी आव़ाज दी है |

लता जी ने पांच मराठी फिल्मों में संगीत निर्देशन भी दिया था। ये फिल्मे थीं :-

  1. राम और पाव्हना (1960)
  2. मराठा टिटुका मेलेवा (1962),
  3. साहित्यांजी मंजुला (1963),
  4. साधु मानसे (1955)
  5. तबाड़ी मार्ग (1969) 

सन 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिये आयोजित किये गये एक कार्यक्रम जिसमे भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू भी उपस्थित थे, लता जी के द्वारा गाए गये लता जी के द्वारा गाए गये ह्रदय को छू लेने वाले गीत  “ऐ मेरे वतन के लोगों” को सुन कर पं नेहरू के साथ साथ वहां उपस्थित अधिकतर लोगो की आँखें भर आईं थीं।

आज भी 15 अगस्त – स्वतंत्रता दिवस और 26 जनवरी – गणतंत्र दिवस के दिन पूरे देश में इस गीत को सुना जाता है और ये गीत आज भी हम सभी में देशप्रेम की अग्नि प्रज्वलित कर देता है , देश भक्ति के सर्वश्रेष्ठ गीतों में इस गीत का भी नाम लिया जाता है |

सन 1950 से सन 1980 तक का वो समय था जिस समय में बनी हिन्दी फिल्मो का संगीत पूरे विश्व में पसंद किया जाता था और उस समय की अधिकतर सुपरहिट फिल्मो में लता जी के गाये गीत अवश्य होते थे |

लता जी ने उस समय के सभी प्रसिद्ध संगीतकारों के साथ काम किया जिनमे अनिल बिस्वास,सचिनदेव बर्मन(एस. डी. बर्मन), राहुल देव बर्मन (आर. डी. बर्मन), नौशाद, मदनमोहन, सी. रामचंद्र, सलिल चौधरी,हुस्नलाल भगतराम,सज्जाद-हुसैन,वसंत देसाई, खय्याम,कल्याणजी आनंदजी,लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, शंकर जयकिशन जैसे दिग्गजों का नाम आता है । उस समय की अनेक फिल्मे तो मात्र लता जी के गए गानों के कारण ही हिट हो गयीं |

लता जी ने फिल्मों के साथ साथ गज़ल, भजन,भक्ति संगीत में भी गाया और साथ ही शास्त्रीय संगीत,पाश्चात्य संगीत पर आधारित गीत भी गाये जिन्हें सभी आयु के लोग सुनना पसंद करते है |

लता जी ने अपने समय के लगभग सभी गायकों के साथ गाया है जिनमे मुहम्मद रफ़ी,मुकेश,किशोर कुमार, महेंद्र कपूर,मन्ना डे के नाम आते है|

लता जी ने विवाह नही किया और अपना पूरा जीवन संगीत को समर्पित कर दिया और इसीलिए आज उनकी पहचान मात्र भारत में ही नही बल्कि पूरे संसार में है। लता जी ने हिन्दी,मराठी,बंगाली,आसामी जैसी भारतीय और विदेशी भाषाओँ सभी को मिलकर 36 से अधिक भाषाओँ में हज़ारों गीत गाये है और इसीलिए लता जी का नाम, संसार मे सबसे अधिक गीत गाने के लिए  गिनीज़ बुक ऑफ़ द रिकॉर्ड- 1974 में लिखा हुआ है |

लता जी की बहन आशा भोंसले भी एक प्रसिद्द गायिका है, जिन्होंने अनेक सुपरहिट गाने गाये है |

लता जी के साथ जिसने भी काम किया वो चाहे गायक,संगीतकार, निर्माता, निर्देशक,  हीरो, हीरोइनों या कोई अन्य हो ,वो लता जी के सौम्य व्यवहार से प्रभावित हुए बिना नही रह सका और सदा के लिए उनका प्रशंसक बन गया | लता जी के फिल्म इंडस्ट्री के सभी दिग्गजों से घनिष्ठ संबंध है |

लता मंगेशकर को मिले हुए पुरस्कार :-

लता मंगेशकर को आज तक अनगिनत पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए है , जिसमे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सभी प्रकार के पुरस्कार है । अनेको बार तो लता जी ने उनको मिलने वाला पुरस्कार दूसरे कलाकारों को देने के लिए कह दिया |

लता मंगेशकर को मिले प्रमुख पुरस्कार इस प्रकार हैं:- 

लता जी को मिला भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान “भारत रत्न”-2001

लता जी को भारत सरकार से मिले पुरस्कार  Government of India Awards

1969 – पद्म भूषण
1989 – दादा साहेब फाल्के पुरस्कार
1999 – पद्म विभूषण
2001 – भारत रत्न

लता जी को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार  National Film Awards

1972 – फिल्म परी के गीतों के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
1974 – फ़िल्म कोरा कागज़ के गीतों के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका का राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार
1990 – फिल्म लेकिन के गीतों के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार

लता जी को फिल्म फ़ेयर पुरस्कार Filmfare Awards

1959 – “आजा रे परदेसी” (मधुमती)
1963 – “काहे दीप जले कही दिल” (बीस साल बाद)
1966 – “तुम मेरे मंदिर तुम मेरी पूजा” (खानदान)
1970 – “आप मुझसे अच्छे लगने लगे” (जीने की राह से)

1993 – फ़िल्मफ़ेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड
2004 – फ़िल्मफ़ेयर स्पेशल अवार्ड 50 साल पूरे करने वाले फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड्स के अवसर पर एक गोल्डन ट्रॉफी प्रदान की गई

लता जी को महाराष्ट्र राज्य फिल्म पुरस्कार Maharashtra State Film Awards

1966 – सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायिका
1966 – सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक (‘आनंदघन’ नाम से)
1977 – जैत रे जैत के लिए सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका
1997 – महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार
2001 – महाराष्ट्र रत्न

लता मंगेशकर को Best Female Playback Singer (बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर) का पुरस्कार इन फिल्मो के लिए मिला :-

1964 – वो कौन थी
1967 – ‍मिलन
1968 – राजा और रंक
1969 – सरस्वतीचंद्र
1970 – दो रास्ते
1971 – तेरे मेरे सपने
1972 – पाकीज़ा
1973 – बॉन पलाशिर पदबाली (बंगाली फिल्म)
1973 – अभिमान
1975 – कोरा कागज़
1981 – एक दूजे के लिए
1983 – A Portrait of Lataji
1985 – राम तेरी गंगा मैली
1987 – अमरसंगी (बंगाली फिल्म)
1991 – लेकिन

इनके अतिरिक्त भी लता मंगेशकर को अनेक पुरस्कार मिले जैसे :-

1989 – दादा साहब फाल्के पुरस्कार

1994 – “दीदी तेरा देवर दीवाना” (हम आपके हैं कौन) के लिए विशेष पुरस्कार

1996 – स्क्रीन का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार

1997 – राजीव गान्धी पुरस्कार

1999 – एन.टी.आर. पुरस्कार

1999 – ज़ी सिने का का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार 

2000 – आई. आई. ए. एफ. का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार

2001 – स्टारडस्ट का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार

आज लता जी को किसी पुरस्कार की आवश्यकता नही है बल्कि लता मंगेशकर जी का नाम ही एक पुरस्कार बन चुका है इसीलिए आज संगीत के क्षेत्र में कार्यरत कलाकारों को सम्मानित करने के लिए लता मंगेशकर पुरस्कार  दिया जाता है , जिसमे सरकार प्रमाण पत्र और नकद पुरस्कार देती  है , ये पुरस्कार किसी भी कलाकार को उसके पूरे जीवनकाल में संगीत के क्षेत्र में दिए गये योगदान को सम्मानित करने के उद्देश्य के रूप में दिया जाता है। 

Remark :-  मित्रों कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते है जिनके बारे में जितना भी बताया जाये वो कम ही होगा , लता जी उन्ही व्यक्तित्वों में से एक है , इसलिए यदि इस लेख में कुछ बातें जो यहाँ बताने से रह गयी है तो आप हमे निसंकोच comment box में comment करके बता सकते है , हम इस post में उन्हें जोड़ने का प्रयास करेंगे |

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