9 planets & their astrological remedies ग्रहों का प्रभाव

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9 planets & their astrological remedies ग्रहों का प्रभाव

9 planets & their astrological remedies:  ग्रहों का जीवन पर प्रभाव सभी व्यक्तियों के लिए भिन्न भिन्न होता है ,ग्रह पिंड मात्र न होकर भगवान के ही विभिन्न रूप हैं और समस्त संसार मे होने वाली घटनायें और समस्त जीवों का जीवन ग्रहों से ही संचालित होता है, ग्रह हमारे जीवन मे होने वाले लाभ और   जब किसी जीव का जीवन प्रारम्भ होता है  और ज्योतिष विज्ञान में नौ ग्रह बतायें गये हैं, जिनकी चाल का सीधा प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर पड़ता है। किसी व्यक्ति की कुंडली को देखकर ग्रहों की स्थिति का विचार किया जाता है।

जन्मपत्री (कुंडली) में जब ग्रह निर्बल होते हैं तो व्यक्ति को उससे संबंधित बुरे परिणाम प्राप्त होते हैं। वहीं जब ग्रह बलवान होते हैं तो जातकों को उसका प्रत्यक्ष लाभ भी मिलता है। हालांकि ग्रहों को बलवान बनाने के लिए उपाय भी बताए गये हैं और इनमें सबसे अधिक फलदायी उपाय हैं ग्रहों से जुड़े मंत्रों का जाप।

9 planets & their astrological remedies

ग्रहों का जीवन पर प्रभाव -ग्रहों के मंत्र ग्रहों का दान

1.सूर्य ग्रह

सूर्य ग्रह से हमारे जीवन का यश ,मान सम्मान,पद प्रतिष्ठा स्वाभिमान, पिता – कुल का बल , समाज मे हमारी स्थिति आदि को निर्धारित करते हैं , सूर्य देव को ग्रहों का राजा भी माना जाता है। कुंडली मे सूर्य देव की निर्बलता से जीवन कष्टों से भर जाता है और यदि आपकी कुंडली मे सूर्य निर्बल हो तो सूर्य को बलवान करना अति आवश्यक है और इसके लिए आप सूर्य देव की नित्य आराधना करें और नीचे दिये गए मंत्रों का जाप करें।

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 सूर्य ग्रह का बीज मंत्र : ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः।

सूर्य ग्रह का एकाक्षरी बीज मंत्र : ॐ घृणि: सूर्याय नम:

सूर्य ग्रह के मंत्रो की जाप संख्या :  7000

सूर्य ग्रह की पूजन विधि : रविवार के प्रात: काल के समय स्नान आदि के बाद मंत्रो का 108 बार जाप करें ।

सूर्य ग्रह की दान :  स्वर्ण, ताम्र(तांबा), गेहूं, गुड़, लाल कमल, गौ, केसर, लाल कपड़े का दान करें।  (ग्रहों का जीवन पर प्रभाव)

2. चंद्र ग्रह

चन्द्र ग्रह से हमारे जीवन की शांति, सुख ,पर्यटन ,मानसिक स्वास्थ्य , मन की स्थिति , मनोविकार ,माँ का स्वास्थ्य और स्वभाव, कल्पनाशक्ति , एकाग्रता आदि निर्धारित होती है, चंद्र की निर्बलता से अनिद्रा ,मिर्गी,फेफड़ों, किडनी -गुर्दों के रोग होते हैं और जीवन नीरस लगने लगता है तो ऐसे मे चंद्र को बलवान करना अति आवश्यक है और इसके लिए आप चंद्र देव की नित्य आराधना करें और नीचे दिये गए मंत्रों का जाप करें।

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 चंद्र ग्रह के बीज मंत्र : ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः / ऊं श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः मंत्र

चंद्र ग्रह का एकाक्षरी मंत्र : ॐ सों सोमाय नम:।

चंद्र ग्रह के मंत्रो की जाप संख्या : 11,000

चंद्र ग्रह की पूजन  विधि : सोमवार को सूर्यास्त के बाद / सोने से पूर्व चंद्र देव के मंत्रो का 108 बार जाप करें ।

चंद्र ग्रह की दान :  दान- कपूर, घी, शंख,चांदी, मोती, शंख, चावल, मिश्री, सफेद फूल या जल का दान करें। (ग्रहों का जीवन पर प्रभाव)

3.मंगल ग्रह

मंगल ग्रह से  हमारे जीवन का पराक्रम , साहस , ऊर्जा , भाई बंधुओं की स्थिति और उनका साथ , भूमि , स्वास्थ्य , शरीर मे रक्त की स्थिति , शारीरिक बल आदि का पता चलता है । मंगल को ग्रहों मे सेनापति का स्थान प्राप्त है, कुंडली मे मंगल की निर्बलता से जीवन मे ऊर्जा और साहस की कमी का अनुभव होता है और यदि आपकी कुंडली मे मंगल निर्बल हो तो मंगल को बलवान करना अति आवश्यक है और इसके लिए आप मंगल देव की नित्य आराधना करें और नीचे दिये गए मंत्रों का जाप करें। (ग्रहों

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मंगल ग्रह के बीज मंत्र :  ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः

मंगल ग्रह का एकाक्षरी मंत्र : ॐ ॐ अंगारकाय नम:।

मंगल ग्रह के मंत्रो की जाप संख्या : 10000 

मंगल ग्रह की पूजन विधि : मंगलवार को प्रात: काल के समय स्नान आदि के बाद मंत्रो का 108 बार जाप करें ।

मंगल ग्रह  की दान : लाल वस्त्र,तंदूर की रोटी,बतासे,गुड़, सुवर्ण ताम्र ( तांबा),शक्कर, मसूर की दाल, लाल चंदन, किसी  व्यक्ति को समय पर रक्त का दान करें। (ग्रहों का जीवन पर प्रभाव)

4. बुध ग्रह

बुध ग्रह से हमारे जीवन में प्रबंधन ,योजना , किसी कार्य को पूरा करने की युक्ति, हमारी अभिव्यक्ति , बोली , व्यापार और व्यापारिक कार्ययोजना , प्रसिद्धि , तत्काल निर्णय लेने की क्षमता आदि का पता चलता है, कुंडली मे बुध की निर्बलता से जीवन मे त्वरित निर्णय , योजना , जीवन में मिलने वाले अवसरो , अभिव्यक्ति आदि की कमी का अनुभव होता है और यदि आपकी कुंडली मे बुध निर्बल हो तो बुध को बलवान करना अति आवश्यक है और इसके लिए आप बुध देव की नित्य आराधना करें और नीचे दिये गए मंत्रों का जाप करें।

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बुध ग्रह के बीज मंत्र : ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः

बुध ग्रह का एकाक्षरी मंत्र : ‘ॐ बु बुधाय नम:’

बुध ग्रह की पूजन विधि : दिए गए मंत्र का 108 बार जाप करें।

बुध ग्रह के मंत्रो की जाप संख्या :  9,000

बुध ग्रह की दान : साबुत मूंग, हरा वस्त्र, सुवर्ण, कांस्य,पन्ना,कपूर,बकरी आदि (ग्रहों का जीवन पर प्रभाव)

ग्रहों का जीवन पर प्रभाव

(ग्रहों का जीवन पर प्रभाव)

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5. बृहस्पति ग्रह

बृहस्पति ग्रह से हमारे जीवन में उन्नति होती है , हमारे वंश , आय , कार्य , यश , मान सम्मान , धन , धर्म , संस्कार , ज्ञान आदि में विस्तार होता है, बृहस्पति को देवताओं का गुरु माना गया है और प्रत्येक शुभ कार्य का आरम्भ बृहस्पति के आशीर्वाद से ही संभव हो पाता है, बृहस्पति कुपित हो जाएँ तो उन्हें प्रसन्न करना अत्यधिक कठिन होता है, जब बृहस्पति निर्बल हो जाते है तो जीवन में सम्मान की कमी अनुभव होने लगती है और घर परिवार में नए संबंध जैसे विवाह आदि रुक जाते है अथवा अत्यधिक विलंब से होते है

और यदि आपकी कुंडली मे बृहस्पति निर्बल हो तो बृहस्पति को बलवान करना अति आवश्यक है और इसके लिए आप बृहस्पति देव की नित्य आराधना करें और नीचे दिये गए मंत्रों का जाप करें।

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बृहस्पति ग्रह के बीज मंत्र : ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः

बृहस्पति ग्रह का एकाक्षरी मंत्र : ‘ॐ ब्रं बृहस्पतये नम:’

बृहस्पति ग्रह के मंत्रो की जाप संख्या :19,000

बृहस्पति ग्रह की पूजन विधि : नित्य संध्याकाल में 108 बार जपें।

बृहस्पति ग्रह का दान : अश्व, शर्करा, हल्दी, पीला वस्त्र, पीतधान्य, पुष्पराग, लवण  (ग्रहों का जीवन पर प्रभाव)

6. शुक्र ग्रह

शुक्र ग्रह से हमारे जीवन का वैभव , सुख , भोग , खान पान , कपड़े , ऐश्वर्य , सौन्दर्य,स्वास्थ्य, यौवन आदि का फल निर्धारित होता है, जब भी शुक्र निर्बल होते हैं तो व्यक्ति के जीवन का सुख न्यून हो जाता है अतः यदि आपकी कुंडली मे शुक्र निर्बल हो तो शुक्र को बलवान करना अति आवश्यक है और इसके लिए आप शुक्र देव की नित्य आराधना करें और नीचे दिये गए मंत्रों का जाप करें।

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शुक्र ग्रह के बीज मंत्र : ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः

शुक्र ग्रह का एकाक्षरी मंत्र : ‘ॐ शुं शुक्राय नम:’

शुक्र ग्रह की पूजन विधि : शुक्रवार के दिन प्रातः काल के समय स्नान ध्यान करने के बाद मंत्र को 108 बार जपें।

शुक्र ग्रह के मंत्रो की जाप संख्या : जप संख्या- 16,000

शुक्र ग्रह का दान:  गाय, हीरा,रेशमी कपड़े,सुगंध, घी,मक्खन,सौन्दर्य प्रसाधन, स्त्रियों से जुडी वस्तुये (ग्रहों का जीवन पर प्रभाव)

7. शनि ग्रह

शनि ग्रह से हमारे जीवन के संघर्ष ,दुःख  रोग , लड़ाई झगडे ,चोरी , मिथ्यारोप , पीठ और पैरों से जुड़े कष्ट , अनैतिक संबंध , भ्रष्टाचार , न्याय, आवास, नौकर चाकर , नौकरी में उन्नति , लम्बी यात्राएँ आदि जुड़े होते है, शनि देव प्रसन्न हों तो जीवन में दुःख न के बराबर होते हैं और शनि देव कुपित हों तो ऐसा कोई दुःख नही होता है जो जीवन में न हो अतः यदि आपकी कुंडली मे शनि निर्बल हो या कुपित हो तो शनि को संतुलित और प्रसन्न करना अति आवश्यक है और इसके लिए आप शनि देव की नित्य आराधना करें और नीचे दिये गए मंत्रों का जाप करें।

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शनि ग्रह के बीज मंत्र – ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।

शनि ग्रह का एकाक्षरी मंत्र :  ‘ॐ शं शनैश्चराय नम:’

शनि देव के मन्त्रों की जाप संख्या : 23000

शनि देव की पूजन विधि : शनिवार के दिन रात्रिकाल में मंत्र को 108 बार जपें।

शनि ग्रह का दान : तिल, तेल, लोहा, काजल,काले वस्त्र,साबुत उड़द की दाल, जूते चप्पल आदि    (ग्रहों का जीवन पर प्रभाव)

8. राहु ग्रह

राहु ग्रह से हमारे जीवन में अकस्मात् घटने वाली घटनाये , नशा , डकैती , बलात्कार , चोरी , बनते हुए काम का न बनना ,  राजनीति , फिल्म , अभिनय , लौटरी – जुए – शेयर मार्केट से लाभ , online social network, internet , computer आदि जुड़े होते है , राहु निर्बल या कुपित होने पर अकस्मात् हानि , दुर्घटना , चोरी , अपयश , ससुराल से संबंध ख़राब होते है अतः यदि आपकी कुंडली मे राहु निर्बल हो या कुपित हो तो राहु को संतुलित करना अति आवश्यक है और इसके लिए आप राहु देव की नित्य आराधना करें और नीचे दिये गए मंत्रों का जाप करें। (ग्रहों का जीवन पर प्रभाव)

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राहु ग्रह के बीज मंत्र : ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः

राहु ग्रह का एकाक्षरी मंत्र : ‘ॐ रां राहुवे नम:’

राहु ग्रह के मंत्रो की जाप संख्या : 18,000

राहु ग्रह की पूजन विधि : इस मंत्र का नित्य रात्रि के समय 108 बार जाप करें।

राहु ग्रह का दान :  गोमेद, अश्व, काले वस्त्र, कम्बल, तिल, तेल,मूली,लोहा, अभ्रक, इलेक्ट्रॉनिक सामान,कांच की बनी वस्तुएं आदि  

9. केतु ग्रह

केतु ग्रह से हमारे जीवन के गुप्त रहस्यों , अध्यात्म , पूजा पाठ , पुत्र संतान , अकस्मात् उन्नति , मोक्ष आदि निर्धारित होते हैं , केतु ग्रह भी राहु ग्रह जैसे ही एक छाया ग्रह हैं , केतु ग्रह कुपित हों तो जीवन में उत्साह समाप्त होने लगता है और व्यक्ति सभी पर संदेह करने लगता है अतः यदि आपकी कुंडली मे केतु निर्बल हो या कुपित हो तो केतु को संतुलित करना अति आवश्यक है और इसके लिए आप केतु देव की नित्य आराधना करें और नीचे दिये गए मंत्रों का जाप करें।

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केतु ग्रह के बीज मंत्र : ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः

केतु ग्रह का एकाक्षरी मंत्र :  ‘ॐ के केतवे नम:’

केतु ग्रह के मन्त्रों की जाप संख्या : 17,000

केतु ग्रह की पूजन विधि :  मंत्र का रात्रि के समय 108 बार जाप करें।

केतु ग्रह का दान :  नींबू , तिल, काला सफ़ेद कंबल, कस्तूरी, शस्त्र, लकड़ी से बने सामान आदि

Remark : साथियों सभी ग्रहों के अनेक मंत्र  ,अनेक पूजन विधि और अनेक उपाय होते हैं – यहाँ बताये गए उपाय सभी अपना सकते हैं किन्तु कोई भी उपाय कुंडली दिखवाकर ही करना चाहिए क्योंकि संसार में सभी कुंडली भिन्न होती है , यदि आप अपनी कुंडली दिखवा उपाय करना चाहते हैं तो 8533087800 पर संपर्क का सकते है , हम न्यूनतम शुल्क में सम्पूर्ण कुंडली विश्लेषण करते हैं। (ग्रहों का जीवन पर प्रभाव)

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