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Diwali 2022 date 24 or 25 :दीपावली-धनतेरस,नरक चतुर्दशी,गोवर्धन पूजा,भाई दूज का शुभ मुहर्त,महत्व,तिथि की सम्पूर्ण जानकारी

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Diwali 2022 date 24 or 25:दीपावली-धनतेरस,नरक चतुर्दशी,गोवर्धन पूजा,भाई दूज का शुभ मुहर्त,महत्व,तिथि की सम्पूर्ण जानकारी

Diwali 2022 date 24 or 25 :प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह में अमावस्या तिथि को दीपावली पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष कार्तिक माह की अमावस्या तिथि 24 और 25 अक्टूबर दोनों ही दिन है। अब चूँकि 25 अक्टूबर को अमावस्या तिथि प्रदोष काल से पहले ही समाप्त हो जाएगी जबकि 24 अक्टूबर को अमावस्या प्रदोष काल में रहेगी इसीलिए इस वर्ष दीपावली पर्व  ( Diwali 2022 ) 24 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा।

दीपावली 5 दिवसीय पर्व होता है इसलिए इस वर्ष दीपावली पर्व 22 अक्टूबर को धनतेरस से आरंभ होकर 27 अक्टूबर भाई दूज के दिन तक मनाई जाएगी जिसमे धनतेरस 22 अक्टूबर , छोटी दीपावली यानि रूप चौदस 23 अक्टूबर,मुख्य दीपावली पर्व 24 अक्टूबर, 25 अक्टूबर को भी कार्तिक कृष्ण अमावस्या है और इस दिन सूर्यग्रहण भी है इसलिए अन्नकूट एवं गोवर्धन पूजन 26 अक्टूबर और भैया दूज पर्व 27 को मनाया जाएगा।

Diwali 2022 दीपावली पर ग्रहों की स्थिति Diwali 2022

दीपावली (Diwali 2022) पर शुक्र ग्रह तुला राशि में रहेंगे,  गुरु ग्रह अपनी स्वंम की राशि मीन और शनि अपनी स्वंम की राशि मकर में रहेंगे।

दीपावली का अर्थ है दीपों की पंक्ति जो हमारे घर और हमारे जीवन को प्रकाशित कर दे , ऐसा माना जाता है कि दीपावली के दिन मां लक्ष्मी रात्रि में स्वंय पृथ्वी पर आती हैं और घर-घर जाकर इस पर्व के प्रति अपने भक्तों में उत्साह और धर्म के प्रति समर्पण देखती हैं और

इसीलिए दीपावली पर्व के दिन सभी लोग अपने घरों में चारों ओर दीपक प्रज्वलित कर प्रकाश करते है क्योंकि देवी माँ लक्ष्मी को अन्धकार पसंद नही है और माँ वहीं प्रसन्न होती हैं जहां भक्तों में उत्साह और धर्म के प्रति समर्पण होता है।

सूर्यास्त के बाद एक घड़ी अधिक तक अमावस्या तिथि रहे, उस दिन दीपावली मनाई जाती है। अमावस्या की रात्रि में ही माता धरती पर विचरण करती हैं। इसी वजह से यह पर्व

दीपावली पर्व के दिन माँ लक्ष्मी  विष्णु पत्नी मां लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है . उन्हें धन-धान्य का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।

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धनतरेस 2022 कब है (Dhanteras 2022 Kab hai)

धनतेरस प्रति वर्ष कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष के त्रयोदशी को मनाया जाता है और वर्ष 2022 में 22 अक्तूबर की संध्या 06 बजकर 02 मिनट पर प्रारंभ हो रही हैं और दूसरे दिन 23 अक्तूबर की संध्या 06 बजकर 03 मिनट पर समाप्त हो जाएगी । 22 अक्टूबर 22 को प्रदोष व्रत भी रहेगा और धनतेरस प्रदोष के दिन ही मनाई जाती है इसलिए धनतेरस 22 अक्टूबर को ही मनाई जाएगी।

कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन मनाये जाने वाले धनतेरस पर्व के साथ ही दीपावली महापर्व की शुरुआत हो जाती है । धनतेरस के दिन भगवान् धन्वंतरि की पूजा की जाती है।

धनतेरस के दिन व्यापारियों के लिए बहुत ही लाभदायक होता है क्योंकि इस दिन गहने , वाहन , इलेक्ट्रॉनिक सामान ,भूमि ,मकान और अपनी सामर्थ्य से घर की आवश्यकताओं का समान पूरा देश खरीदता है यहाँ तक कि कुछ व्यापारी तो पूरे वर्ष में जितनी बिक्री करते है उतनी बिक्री धनतेरस के दिन ही हो जाती है |

ऐसा माना गया है कि धनतेरस के दिन जो कुछ ख़रीदा जाता है उसमे उसमें 13 गुने की वृद्धि हो जाती है इसीलिए धनतेरस पर्व के दिन लोग अपनी आवश्यकता का सामान अवश्य ही खरीदते है ।

छोटी दिवाली नरक चतुर्दशी 2022 कब है?  (Narak Chaturdashi 2022)(Choti Diwali 2022 kab hai )

छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी 2022 कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को होती है , इसे ही रूप चौदस भी कहते हैं, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 23 अक्टूबर को संध्या 06 बजकर 04 मिनट से आरंभ होकर 24 अक्टूबर की संध्या 05 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। यदि आप उदयातिथि के नियम को मानेंगे तो छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी 24 अक्टूबर को भी मनाई जा सकती है।

रूप चौदस पर क्या करते हैं 

धनतेरस के ठीक दूसरे दिन कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर नरक चतुर्दशी पर्व को मनाया जाता है जिसेको रूप चौदस, काली चौदस और छोटी दीपावली भी कहते हैं  , इस दिन अपने शरीर पर उबटन लगाये जाने की भी परम्परा है जिससे रूप में निखार आता है

नरक चतुर्दशी के दिन यमराज पूजा

नरक चतुर्दशी के दिन यम पूजा भी की जाती है जिसमे रात में भगवान् यमराज के नाम से दीपक निकाला जाता है |

भगवान् यमराज के नाम से निकलने वाले इस दीपक का बहुत ही महत्व है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि यमदेव के नाम से निकाला गया दीपक परिवार के सभी लोगों की रक्षा करता है और किसी भी व्यक्ति की आकाल मृत्यु नही होती है | ये दीपक घर के द्वार से बहार निकालना चाहिए|

इसके साथ ही नरक चतुर्दशी के दिन माँ काली की भी पूजा की जाती है, जिसमे प्रातः सरसों का तेल से जल में डालकर स्नान करना चाहिए और उसके बाद माँ काली की पूजा करनी चाहिए , इस पूजा से माँ काली प्रसन्न होती है और हमारे जीवन में आने वाले दुखो का नाश करती है |

Diwali 2022 date 24 or 25

Diwali 2022 date 24 or 25

दीपावली 2022 का मुहर्त ( deepawali 2022 muhrat )

इस बार अमावस्या तिथि 24 अक्टूबर संध्या 05 बजकर 28 मिनट से आरंभ होगी और दूसरे दिन 25 अक्टूबर को संध्या 04 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। इस प्रकार अमावस्या 2 दिन है लेकिन 25 अक्टूबर को सांय प्रदोष काल लगने से पहले ही अमावस्या समाप्त हो जायेगी इसलिए 25 अक्टूबर के दिन दिवाली का पर्व नहीं मनाया जाएगा बल्कि 24 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा। Diwali 2022

दीपावली में माँ लक्ष्मी पूजन 24 अक्टूबर (Diwali 2022 date) सोमवार के दिन होगा।

लक्ष्मी-गणेश पूजन का शुभ मुहूर्त

संध्या 06 बजकर 54 मिनट से 08 बजकर 16 मिनट तक यानि 1 घंटा 21 मिनट तक रहेगा ,
प्रदोष काल – संध्या 05 बजकर 42 मिनट से रात्रि 08 बजकर 16 मिनट तक रहेगा ,

गोधूली मुहूर्त – संध्या 05:12 बजे से 05:36 तक
वृषभ काल – संध्या 06 बजकर 54 मिनट से रात्रि  08 बजकर 50 मिनट तक रहेगा ,

लक्ष्मी-गणेश पूजन का महानिशीथ काल मुहूर्त

रात्रि 11 बजकर 40 मिनट से लेकर 12 बजकर 31 मिनट तक यानि कुल अवधि – 50 मिनट तक रहेगी ,

दीपावली (Diwali 2022) के दिन मुख्य रूप से विघ्न नाशक गणपति और माता महालक्ष्मी की पूजा के जाती है , प्रयास करे की इस दिन घर में कही भी अन्धकार न रहे क्योंकि दीपावली महापर्व हमारे जीवन में से अन्धकार दूरकर प्रकाश लाने का ही पर्व है |

ये पूजा देश के सभी व्यापारी ,नौकरी करने वाले ,किसान आदि बड़े ही मन से करते है और भगवान् गणपति से जीवन के विघ्न दूर करने की प्रार्थना और माता महालक्ष्मी से परिवार की दरिद्रता दूर कर धन देने की प्रार्थना करते है |

ये पूजा स्थिर लग्न में करनी चाहिए जिससे घर में माता महालक्ष्मी का सदा वास बना रहे |

मां लक्ष्मी को बहुत चंचल माना गया है दिवाली पर इनकी उपासना में कुछ नियमों का पालन करना अति आवश्यक है तभी देवी की कृपा का पात्र बन सकते हैं.

ऐसे करें लक्ष्मी-गणेश पूजन Diwali 2022

दिवाली पूजन के लिए उत्तर पूर्व दिशा यानि ईशान कोण को अच्छे से साफ करें और गंगा जल छिडकाव कर उस स्थान को शुद्ध करें और वहां लकड़ी की चौकी रखें ।

अब उस लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और वहां श्री गणेश और गणेश जी के दाहिनी ओर श्रीलक्ष्मी, श्री कुबेर की स्थापना करें। संभव हो तो माता लक्ष्मी के समक्ष लाल कमल का पुष्प भी अर्पित करें और अन्य देवी देवताओं को भी पुष्प माला आदि अर्पित करें

अब माता का समक्ष एक तांबे का या मिट्टी का कलश (लोटा) रखे जिसपर जटा वाला नारियल रखें , संभव न हो तो तांबे, चांदी या मिट्टी की कटोरी में चावल भर कर भी रख सकते हैं ,

इसके बाद श्री गणेश,श्रीलक्ष्मी, श्री कुबेर के साथ साथ फल – मिष्ठान,सुपारी,इलायची, कमल के गट्टे आदि को अर्पित करें ,  आप चाहे तो श्री गणेश , श्री लक्ष्मी सहस्रनाम या स्तुति  का पाठ भी कर सकते हैं , तत्पश्चात हवन आदि करने के बाद श्री गणेश , श्री लक्ष्मी आदि देवी देवताओं की आरती भी करें ।

गोवर्धन पूजा 2022 ( Govardhan Pooja 2022 )

गोवर्धन पूजा में विशेष रूप से गोवर्धन महाराज और गाय माता की  पूजा की जाती है।

इस दिन ही द्वापर काल में भगवान श्री कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर बृज क्षेत्र की रक्षा की थी और भगवान इंद्र को हरा कर बृज को इन्द्रदेव के कोप से बचाया था इसीलिए आजतक हिंदू धर्म में गोवर्धन पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है।

प्रति  वर्ष कार्तिक अमावस्या तिथि को दीपावली और उसके दूसरे दिन गोवर्धन पूजा की जाती है लेकिन इस वर्ष गोवर्धन पूजा 25 अक्टूबर को नहीं होगी क्योंकि 25 अक्टूबर को सूर्य ग्रहण लगेगा इसलिए गोवर्धन पूजा 25 अक्टूबर को न होकर 26 अक्टूबर दिन बुधवार को मनाई जाएगी  ।

गोवर्धन पूजा के दिन भगवान कृष्ण ने देवराज इंद्र के प्रकोप से ब्रज वासियों की रक्षा की थी और तभी से गोवर्धन पूजा की पूरे संसार में मनाया  जाने वाला पर्व है।

गोवर्धन पूजा शुभ मुहूर्त 2022 

पूजा का शुभ मुहूर्त प्रातः 6 बजकर 29 मिनट से लेकर अगले दिन प्रातः 8 बजकर 43 मिनट तक है

गोवर्धन पूजा तिथि 2022 

26 अक्टूबर 2022,दिन  बुधवार

गोवर्धन पूजा के दिन गाय के गोबर से गोवर्धन भगवान् की मूर्ति बनाई जाती है. गोवर्धन की मूर्ति स्थापित करने के बाद इन्हें पुष्पों से सजाया जाता है और इसके बाद दीपक प्रज्वलित करके और फूल, फल, दीप और प्रसाद आदि अर्पित करते हुए पूजन किया जाता है , पूजन के बाद 7 बार परिक्रमा करते समय चारों ओर लोटे से जल गिराते हैं  और जौ बोते हुए परिक्रमा करें.

कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा की जाती है , इस वर्ष ये 26 अक्टूबर 2022,दिन  बुधवार को पड़ रही है। इस दिन अन्नकूट आदि उत्सव भी मनाया जाता है ।

bhai-dooj

भाई दूज 2022 मुहूर्त  ( Bhai Dooj 2022 Muharat )

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को पूरा देश भाई दूज पर्व को मनाता है जिसे भैया दूज भाई टीका या यम द्वितीया या भ्रातृ द्वितीया भी कहा जाता है। भैया दूज के दिन यमराज, यमदूज और चित्रगुप्त की पूजा की जाती है । इनके नाम से अर्घ्य और दीपदान करना चाहिए।

26 अक्टूबर को मनाएं भाईदूज का त्योहार-

वर्ष 2022  में कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि 26 व 27 अक्टूबर दोनों दिन लग रही है। 26 अक्टूबर को दोपहर 02 बजकर 43 मिनट से भाईदूज या भैया दूज का पर्व आरंभ होगा, जो कि 27 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। यदि आप भी भैया दूज 27 अक्टूबर को मनाएंगे तो

भाईदूज का यह है शुभ मुहूर्त

प्रातः 11 बजकर 07 मिनट से दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक।

यम द्वितीया पर भाई बहन का पवित्र स्नान 

इस दिन मथुरा में यमुना जी में स्नान करने देश के कोने कोने से भाई बहन आते है | ऐसी मान्यता है की इस जो भाई बहन यमुना जी में स्नान करते है ,उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है | इस दिन बहनें रोली और अक्षत से अपने भाई का तिलक कर भगवान् से अपने भाई के उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं। भाई दूज पर भाई भी अपनी बहन को कुछ न कुछ उपहार देते है।

भाई दूज या भैया दूज को भाई टीका, यम द्वितीया, भ्रातृ द्वितीया आदि भी कहा जाता है। इसे कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है।

भाई दूज जिसे यम द्वितीय भी कहते है के बारे में ऐसी मान्यता है कि एक बार भगवान् यमराज ने अपनी बहन यमुना के प्रेम से प्रसन्न होकर यमुना जी से कोई वरदान मांगने को कहा। तब यमुना जी ने भगवान् यमराज से कहा ” दीपावली के बाद यम द्वितीय के दिन जो भाई बहन एक दूसरे का हाथ पकड़ कर यमुना जी  में स्नान करेंगे उन्हें यमलोक नही जाना पड़ेगा” ।

यमुना जी को दिए वरदान को स्वीकार करते हुए भगवान् यमराज ने कहा “तथास्तु”

उसी समय से मथुरा नगर में यमुना के विश्राम घाट पर प्रतिवर्ष यम द्वितीय के दिन भाई बहन एक दूसरे का हाथ पकड़ स्नान करते आ रहे जिससे उन्हें यमलोक न जाना पड़े । भाई दूज के दिन मथुरा में देश विदेश से असंख्य भाई बहन एक दूसरे का हाथ पकड़ कर यमुना जी में स्नान करते हैं और अपने मोक्ष की कामना करते है ।

मथुरा में देश का एकमात्र यमराज मंदिर भी है।

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Diwali 2022

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निष्कर्ष : साथियों ये पोस्ट ” Diwali 2022 date 24 or 25 :दीपावली-धनतेरस,नरक चतुर्दशी,गोवर्धन पूजा,भाई दूज का शुभ मुहर्त,महत्व,तिथि की सम्पूर्ण जानकारी” यदि अच्छी लगी हो तो इस पोस्ट को शेयर अवश्य करें .

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श्री गणेश ज्योतिष समाधान 

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