gandmool nakshatra and its Effect part 2 – गंडमूल नक्षत्र

gandmool nakshatra गंडमूल नक्षत्र
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gandmool nakshatra and its Effect part 2 – गंडमूल नक्षत्र

गंडमूल नक्षत्र (gandmool nakshatra) दोष क्यों लगता है ?

gandmool nakshatra (गंडमूल नक्षत्र ) मेष राशि , कर्क राशि, सिंह राशि, वृश्चिक राशि, धनु राशि व मीन राशि के प्रारंभ व अंत में आती हैं और काल पुरुष चक्र के अनुसार ये राशियाँ किसी भी जातक के शरीर यानि लग्न (प्रथम भाव- मेष राशि ), मन यानि चतुर्थ भाव (कर्क राशि) , बुद्धि यानि पंचम भाव ( सिंह राशि ), आयु यानि अष्टम भाव ( वृश्चिक राशि ),  भाग्य यानि नवम भाव ( धनु राशि ) पर अपना प्रभाव डालती है

इसीलिए gandmool nakshatra (गंडमूल नक्षत्र ) में जन्म लेने वाले जातकों के ऊपर गंडमूल नक्षत्र का दोष लगता है

हिन्दू धर्म में ज्योतिष के अनुसार जब लग्न ,राशि और नक्षत्र एक साथ प्रारंभ या समाप्त होते है तो जो संधि बनती है उस संधि काल को अशुभ माना जाता है और गंडमूल नक्षत्र के समय भी संधि काल होता है इसीलिए इन नक्षत्रों को अशुभ माना जाता है |  

और इस दोष को दूर करने के लिए उपयुक्त पूजा आवश्यक होती है जिससे gandmool nakshatra (गंडमूल नक्षत्र ) का कोई नकरात्मक प्रभाव शिशु पर न पड़े |

gandmool nakshatra ka kya dosh hota hai || गंडमूल नक्षत्र का  दोष का प्रभाव

यदि कोई शिशु गंडमूल नक्षत्र में जन्म लेता है तो उसे तथा उसके परिजनों को विभिन्न प्रकार के कष्टों का सामना करना पडता है जैसे :-

  • जातक को अपना जीवनयापन करना कठिन हो जाता है।
  • जातक को कभी भाग्य से अवसर मिलते है किन्तु उसे छोड़ देने पर आगे भाग्य काम नही करता है। 
  • गंडमूल नक्षत्र के दोष से जातक को स्वास्थ्य संबंधी कष्टों का सामना करना पड़ता है।
  • परिवार में माता-पिता,भाई-बहिनों और सगे संबंधियों के जीवन पर बाधाएं आती हैं।
  • जातक के परिवार में धीरे धीरे दरिद्रता आने लगती है
  • जीवन में नकारात्मक प्रभाव तथा संघर्ष।
  • जातक को दुर्घटना भय ।

gandmool nakshatra गंडमूल नक्षत्र

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gandmool nakshatra dosh ke upay in hindi || gandmool nakshatra dosha remedies in hindi 

गंडमूल नक्षत्र की शांति के उपाय 

यदि किसी शिशु का जन्म गंडमूल नक्षत्र में हुआ है तो उसके पिता को बालक के जन्म के 27वें दिन ठीक उसी नक्षत्र के आने पर शांति करनी चाहिए। 

गंडमूल नक्षत्र की शांति के कुछ उपाय इस प्रकार है :-

  • घर में विद्वान ब्राह्मण द्वारा गंडमूल शांति के लिए यज्ञ करें।
  • शिव लिंग के साथ स्थापित नाग देव ( शेषनाग ) का पूजन करें ।
  • सर्प को दूध पिलाएं।
  • पितृों के निमित्त दान करें।
  • अमावस्या के दिन ब्राह्मण भोजन कराएं। स्वर्ण का अथवा अपने वजन बराबर अन्न का या गाय  आदि का दान करें।
  • माता या पिता 6 माह तक विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।

remark :- यदि गंडमूल शांति के उपाय शिशु के जन्म से ठीक 27 वें दिन न हो पाएं अथवा किसी कारण से गंडमूल दोष के बारे में आपको विलम्ब से पता चले तो भी आप इसकी शांति के उपाय करवा सकते हैं।

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Remark : यदि आप हमसे कुंडली दिखवाना चाहते हैं या कुंडली में किसी दोष जैसे :- पितृ दोष , कालसर्प योग , मंगली दोष , विवाह में विलंब , गुरु राहू चांडाल योग इतियादी के विषय में जानना चाहते है या इनका पूजन करना चाहते है तो  पं  लोकेन्द्र पाठक से 8533087800 पर संपर्क कर सकते हैं  ।

 

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