Thursday, August 18
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जादुई पतीला :पंचतंत्र की कहानी-Panchatantra Story Magical Pot Story In Hindi

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जादुई पतीला पंचतंत्र की कहानी-Panchatantra Story Magical Pot Story In Hindi

जादुई पतीला :पंचतंत्र की कहानी : वर्षों पहले मानिकपुर राज्य के शीतल नाम के गाँव में किशन नाम का एक किसान रहता था। वह शीतल गाँव के एक ज़मींदार के खेत पर काम करके किसी प्रकार अपना घर चला लेता था।

किशन प्रतिदिन सोचता कि कैसे घर की स्थिति को बेहतर किया जाए। आज भी इसी सोच के साथ किशन भोर में ज़मींदार के खेत पर काम करने के लिए निकल पड़ा था ।

(जादुई पतीला :पंचतंत्र की कहानी-Magical Pot Story Panchatantra Story )

एक समय किशन के पास भी खेत हुआ करते थे, लेकिन उसके पिता के अस्वस्थ होने के कारण पिता के उपचार के लिए उसे अपने सारे खेत बेचने पड़े। मज़दूरी में बहुत ही कम मिलने वाले पैसों से पिता का उपचार कैसे करा सकता था और साथ में घर का खर्च भी तो चलाना था , यही चिंता उसे दिन रात दुखी कर रही थी ।

एक दिन खेत में काम करते समयवो कुदाल चला रहा था और उसकी कुदाल किसी धातु से टकरा गयी । किशन ने सोचा कि आखिर ऐसा क्या है इस मिट्टी के नीचे ?

उसने उसी समय मिट्टी के उस हिस्से को खोदन शुरू कर दिया और थोड़ी देर में वहाँ से एक बड़ा सा पीतल का पतीला निकला। पतीला देखकर किशन फिर से दुखी हो गया। क्योंकि किशन सोच रहा था कि ये आभूषण होते तो मेरे घर की स्थिति थोड़ी सुधर भी जाती।

किशन काम करते हुए थक गया था इसलिए किशन ने सोचा कि चलो पहले खाना खाते हैं । किशन ने खाना खाने के लिए अपने हाथ की कुदाल उस पतीला में फेंक दी और हाथ-मुँह धोकर खाना खाने लगा। खाना समाप्त करने के बाद किशन अपनी कुदाल उठाने के लिए उस पतीला के पास पहुँचा।

(जादुई पतीला :पंचतंत्र की कहानी-Magical Pot Story Panchatantra Story )

वहाँ पहुँचते ही किशन हैरान रह गया क्योंकि उस पतीला के अंदर एक नहीं, बल्कि बहुत सारे कुदाल थे। उसे कुछ समझ नहीं आया कि इतनी सारी कुदाल इसके अन्दर क्यों है लेकिन उसने ये सोचकर कि चलो ये कुदाल आगे उसके काम आएँगी इसलिए इसे छुपा देता हूँ

ऐसा सोच पास रखी एक एक टोकरी को भी किशन ने उस पतीला पर फेंक दिया। टोकरी छोटी थी और वो उस पतीला के भीतर चली गयी लेकिन ये क्या – टोकरी भी पतीला के अंदर जाते ही बहुत सारी हो गईं।

ये सब देखकर किशन प्रसन्न हो गया और उस चमत्कारी पतीला को अपने साथ घर लेकर चला आया।

वो प्रतिदिन उस पतीला में अपने कुछ औज़ार डालता और जब वो अधिक हो जाते, तब उन्हें बाज़ार जाकर बेच आता। ऐसा करते-करते किशन के घर की स्थिति सुधरने लगी।

उसने इस प्रकार से बहुत पैसा कमाया और अपने पिता का उपचार भी करवा लिया। एक दिन किशन ने कुछ आभूषण खरीदें और उन्हें भी पतीला में डाल दिया।

वो आभूषण भी बहुत सारे बन गए। इस प्रकार धीरे-धीरे किशन धनवान होने लगा और उसने ज़मींदार के यहाँ मज़दूरी का काम करना छोड़ दिया।

किशन को धनवान होते देख ज़मींदार मोहन को किशन पर संदेह हुआ। एक दिन वो किशन के पीछे पीछे उसके के घर के पीछे पहुँच कर देखने लगा कि किशन करता क्या है और उसने वहाँ ये देख लिया कि किशन क्या करता है

यानि वहाँ जाकर उसे चमत्कारी पतीला के बारे में पता चला। उसने किशन से पूछा, “तुमने यह पतीला कब और किसके घर से चुराया?

डरी हुई आवाज़ में किशन बोला, “बाबू जी ! ये पतीला मुझे खेत में खुदाई के समय मिला था। मैंने कभी किसी के घर चोरी नहीं की है।”

ज़मींदार ने खेत में खुदाई की बात सुनते ही कहा, “यह पतीला जब तुम्हे मेरे खेत से मिला, तो यह मेरा हुआ।” किशन ने ज़मींदार से जादुई पतीला ना लेकर जाने की बहुत मिन्नते कीं, लेकिन ज़मींदार मोहन ने उसकी बात नहीं सुनी और ज़बरदस्ती वो जादुई पतीला लेकर चला गया।

अब ज़मींदार भी किशन जैसे ही उसमें अलग अलग सामान डालकर उन्हें बढ़ा लेता था । एक दिन ज़मींदार ने अपने घर के सारे आभूषण एक-एक करके उस पतीला में डाल दिए और रातों रात बहुत धनवान हो गया।

एकदम से ज़मींदार के धनवान होने की खबर मानिकपुर के राजा डमरूमल तक पहुँच गई। पता लगाने पर राजा को भी चमत्कारी पतीला की जानकारी मिली। फिर क्या था, राजा डमरूमल ने तुरंत अपने लोगों को भेजकर ज़मींदार के यहाँ से वो पतीला राजमहल मंगवा लिया।

जादुई पतीला पंचतंत्र की कहानी-Panchatantra Story Magical Pot Story In Hindi

image courtesy : you tube video   

राजमहल में उस चमत्कारी पतीला के पहुँचते ही राजा ने अपने आसपास के कीमती सामान को उसमें डालना शुरू दिया। सामान को बढ़ता देखकर राजा दंग रह गया।

राजा डमरूमल ने सोचा कि यदि मै इस पतीला में चला जाऊ तो क्या होगा ये सोच अंत में राजा डमरूमल खुद उस पतीला के अंदर चला गया। देखते-ही-देखते उस पतीला से बहुत सारे राजा डमरूमल निकल आए।

पतीला से निकला हर राजा बोलता, “मैं मानिकपुर के राजा डमरूमल हूँ, तुम्हें तो इस जादुई पतीला ने बनाया है।” ऐसा होते-होते सारे राजा डमरूमल आपस में लड़ने लगे और एक दूसरे को मारने लगे और लड़ाई करते समय वो जादुई पतीला भी टूट गया।

जादुई पतीला के कारण राजमहल में हुई इस भयानक लड़ाई के बारे में नगर में सबको पता चल गया। इस बात की जानकारी मिलते ही मज़दूर किशन और ज़मींदार मोहन ने सोचा अच्छा हुआ कि हमने उस जादुई पतीला का प्रयोग सही से किया। उस राजा डमरूमल ने मूर्खता के कारण मर गया ।

जादुई पतीला :पंचतंत्र की कहानी से सीख

मूर्ख के पास कीमती वस्तु कभी नही टिकती है और लालच बुरी बला होती है।

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