Nag Panchami 2021:नाग पंचमी पूजन से होगा काल सर्प दोष निवारण

Nag Panchami 2021 काल सर्प दोष निवारण
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Nag Panchami 2021:

नाग पंचमी पूजन से होगा काल सर्प दोष निवारण 

Nag Panchami 2021 : नाग पंचमी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है और देश विदेश मे मनाया जाता है। नाग पंचमी की पूजा से जीवन में काल सर्प दोष निवारण, गुरु राहू चांडाल योग और सूर्य राहु की युति से बनने वाले पित्र दोष से मुक्ति मिलती है।

नाग पंचमी सावन माह का पर्व है और सावन प्रभु शिव को अति प्रिय है इसलिए शिवलिंग के साथ स्थापित नाग देवता वासुकि का पूजन करना बहुत ही शुभ माना जाता है इस दिन लोग भगवान शिव के साथ नाग देवता की पूजा करते हैं, उनका दुग्ध स्नान करवाते हैं, नाग देवता को पाताल लोक का स्वामी माना जाता है और

ऐसा माना गया है कि नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने से हमारा परिवार सुरक्षित रहता और कष्टों से रक्षा मिलती है और काल सर्प दोष निवारण, पित्र दोष निवारण भी होता है 

नाग पंचमी का पूजन सभी को करना चाहिए क्योकि नाग देवता अपने भिन्न भिन्न रूपों मे भगवान शिव के साथ साथ भगवान विष्णु के साथ भी रहते है इसलिए शैव और वैष्णव दोनों मतो को मानने वाले नाग पंचमी को पूरी श्रद्धा के साथ मनाते है

ऐसा कहा जाता है कि समुद्र मंथन के समय नागराज वासुकी ने मेरू पर्वत से लिपटकर रस्सी का कार्य किया था और नाग वासुकि को एक ओर से देवता और एक ओर से दानवों ने पकड़ रखा था और अपनी अपनी ओर खींच रहे थे।

समुद्र मंथन के इस कार्य में नागराज वासुकि का शरीर चोटिल हो गया किन्तु समुद्र मंथन मे वासुकि के इस योगदान से भगवान शिव अति प्रसन्न हुए और वासुकि को अपने गले में धारण कर लिया । इन्हीं वासुकि के भ्राता शेषनाग ही भगवान विष्णु की शैय्या के रूप प्रभु विष्णु को आसन प्रदान कर रहें हैं। 

Nag Panchami 2021 काल सर्प दोष निवारण

(Nag Panchami 2021 muhrat) नागपंचमी 2021 का  मुहर्त

वर्ष 2021 मे नागपंचमी का पर्व 13 अगस्त 2021 दिन शुक्रवार को हस्‍त नक्षत्र व साध्‍य योग में मनाया जाएगा। वर्ष 2021 मे नाग पंचमी तिथि 12 अगस्त 2021 दिन गुरुवार दोपहर 03 बजकर 24 मिनट पर प्रारम्भ हो जाएगी और 13 अगस्त 2021 दिन  शुक्रवार दोपहर 01 बजकर 42 मिनट तक रहेगी , इस दिन हस्त नक्षत्र शाम 7.58 बजे तक और साध्य योग शाम 6.48 बजे तक रहेगा। नाग पंचमी का पूजा मुहूर्त 13 अगस्त 2021 को प्रातः 05 बजकर 49 मिनट से 08 बजकर 28 मिनट तक रहेगा

 Nag Panchami 2021: नाग पंचमी का पूजन कैसे करें ?

नाग पंचमी के पूजन की कोई विशेष विधि नही होती है और जिस प्रकार हम भगवान शिव का पूजन करते है ठीक उसी प्रकार नाग देवता का भी पूजन कर सकते हैं

आप प्रातः उठकर नित्यकर्म से निवृत्त हो साफ-स्वच्छ वस्त्र धारण कर नाग देवता की मूर्ति का स्वच्छ जल से स्नान करवाये ,श्वेत पुष्प, धूप आदि से पूजन करके दूध अर्पित करे और संभव हो तो उनके मंत्रो की एक माला का जाप करें

नाग देवता के मंत्र

1. सर्वे नागाः प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथ्वीतले.
ये च हेलिमरीचिस्था येऽन्तरे दिवि संस्थिताः॥
ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिनः.
ये च वापीतडगेषु तेषु सर्वेषु वै नमः॥

2. अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्.
शङ्ख पालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा॥
एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्.
सायङ्काले पठेन्नित्यं प्रातःकाले विशेषतः.
तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्॥

नाग देवता के विभिन्न नाम

नाग देवता के विभिन्न नाम इस प्रकार हैं:-

  • अनन्त,
  • वासुकि,
  • शेष,
  • पद्म,
  • कम्बल,
  • कर्कोटक,
  • अश्वतर,
  • धृतराष्ट्र,
  • शङ्खपाल,
  • कालिया,
  • तक्षक और
  • पिङ्गल

कुछ स्थानों पर लोग नागपंचमी से एक दिन पहले भोजन बना कर रख लेते हैं और नागपंचमी के दिन बासी खाना खाते हैं । इसके साथ ही घर की दीवारों पर नाग देवता की आकृति बना लेते हैं और दधि, कच्चा दूध, कुशा, गंध, अक्षत, पुष्प, दूर्वा, जल, रोली और चावल आदि से पूजन करते हैं और मिष्ठान का भोग लगाते हैं।

अनेक लोग नागों की बांबी के पास कटोरी मे दूध रख कर छोड़ आते हैं।

नाग पंचमी के दिन किसी सपेरे को पैसे देकर किसी निर्जन स्थान जैसे किसी जंगल मे नाग नागिन के जोड़े को मुक्त करवाने से भी नाग देवता की कृपा प्राप्त होती है

नाग पंचमी के दिन नाग को दूध पिलाने की भी परंपरा है किन्तु वैज्ञानिक दृष्टिकोण से नाग या अन्य कोई साँप दूध नही पीते है और यदि पी ले तो वो दूध उनको पच नही पाता है और ऐसा करने से उनकी मृत्यु तक हो जाती है

नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है ? / नाग पंचमी की शुरुआत कब हुई 

(नाग पंचमी का मेला )

नाग पंचमी पर्व पर वाराणसी में नाग कुआँ नामक स्थान पर एक बड़ा मेला लगता है, ऐसा माना जाता है कि नाग कुआँ नामक स्थान पर गरूड़ जी के भय से तक्षक नाग बालक रूप में संस्कृत की शिक्षा लेने हेतु आये थे किन्तु गरूड़ जी को ये बात पता लग गयी किन्तु गरूड़ जी ने अपने गुरू से प्रभावित हो तक्षक को अभय दान दे दिया और तभी से नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा अर्चना की जाती है इसीलिए जो भी नाग पंचमी के दिन नाग कुआँ आकार पूजा अर्चना करता है,उसे सर्प दोष,कालसर्प दोष आदि कष्टो से मुक्ति मिलती है।

मित्रो maihindu.com की ओर से आप सभी को नाग पंचमी Nag Panchami 2021  पर्व की हार्दिक शुभकामनायें , नाग देवता के पूजन से आप सभी का काल सर्प दोष निवारण हो और आपका जीवन खुशियों से भरा हो । 

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