पितृ दोष (pitra dosha)- Solution of A 2 Z Problems of life

पितृ दोष pitra dosha
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पितृ दोष (pitra dosha)- Solution of A 2 Z Problems of life

(pitra dosh in detail)

पितृ दोष है जीवन की सबसे बड़ी बाधा |

जब जीवन में सब ओर अँधेरा दिखे , अपने भी पराये लगे ,कोई भी काम न बने, भरपूर और अनेक प्रयासों के बाद भी असफलपितृ दोष pitra doshaता मिले|

भरपूर योग्यता होते हुए भी ना तो उचित पद और ना ही सम्मान मिले तो समझ लीजिये आप पितृ दोष से पीड़ित है|

 

साथियों कहीं आपका जीवन भी तो इस प्रकार का नही है :-

  1. आपके घर परिवार में एक दूसरे के प्रति सभी में बहुत प्रेम है किन्तु निरंतर छोटी छोटी बातों पर कलेश होता है और कलेश दूर करने का कोई उपाय नही मिलता है| आपको या आपके परिवार के अन्य सदस्यों को छोटी सी बात पर ही अत्यधिक क्रोध आ जाता है जोकि शीघ्रता से शांत भी हो जाता है|
  2. किसी भी कारण से आप समाज से और समाज आपसे दूरी बनाने लगता है,यहाँ तक कि आप किसी के यहाँ से निमंत्रण आने पर भी नही जाना चाहते है | घर में मेहमान भी नही आते है , रिश्तेदारों से भी दूरियां बनती जा रही है |
  3. आपकी या आपके घर परिवार के अन्य सदस्यों की आयु बहुत अधिक हो गयी है किन्तु विवाह नही हो पा रहा है,कहीं बात भी चलती है,तो विवाह की बात बनते बनते बिगड़ जाती है|
  4. यहाँ तक की परिवार में लड़कियों की भी आयु बहुत अधिक हो गयी है किन्तु उनका विवाह नही हो पा रहा है |
  5. परिवार में पुत्रियों संख्या अधिक या मात्र पुत्रियाँ ही होती है ,पुत्र या तो होंगे नही या अयोग्य होंगे |
  6. आपकी शिक्षा ,योग्यता बहुत अच्छी होते हुए भी, न तो आपके पास कोई अच्छी नौकरी है, न ही कोई अच्छा व्यापार और ना ही कोई अन्य आय का साधन है | बड़ी कठिनाईयों से कोई नौकरी मिलती है /कोई छोटा मोटा व्यवसाय चलता है तो उसके भी छूट जाने / बंद हो जाने का डर लगा रहता है |
  7. परिवार में एक या एक से अधिक सदस्य गंभीर रोगों से पीड़ित होते है जिसपर निरतर धन व्यय होता रहता है |
  8. आपके परिवार की स्त्रियों का अनेकों बार गर्भपात हुआ है या किसी सदस्य की अकाल मृत्यु हुई है और मृत्यु के बाद उचित प्रकार से अंतिम संस्कार नही हुआ है या अंतिम संस्कार हुआ ही नही है |
  9. घर में लगे पानी के नल की टोंटियों से पानी टपकता रहता है , टोंटी बदलते है तो बदलने के बाद दूसरी टोंटी से भी पानी टपकने लगता है |
  10. भोजन से अधिकतर बालों का निकलना |
  11. घर में मकड़ी के जाले बहुत लगते है ,साफ़ कर देने के बाद भी दुबारा लग जाते है |
  12. नए बने घर की दीवारों में भी दरार आ जाती है, घर में सीलन बनी रहती है |
  13. कोई भी शुभ कार्य होने से पहले कलेश अवश्य होता है |
  14. आपको लगता है कि आपके घर में कोई प्रेत बाधा है, कोई स्वप्न में आकर परेशान करता है |
  15. आप जहाँ रहते है या काम करते है वहाँ किसी न किसी बात पर दूसरे लोगों से बहस होती ही रहती है|
  16. आप स्वयं निर्णय नही ले पाते है ,दूसरों से सलाह लेना चाहते हैं या लेनी पड़ती है|

मित्रों ये सभी पितृ दोष के लक्षण  हैं यदि इस प्रकार के लक्षण आपके भी जीवन में परिलक्षित होते है तो आप / आपका परिवार पितृदोष से पीड़ित है |

 पितृ दोष कैसे बनता है || How Pitra Dosha Forms ?

(जन्म कुंडली में पितृ दोष कैसे देखें)

  1. जब जन्म कुण्डली के पहले, दूसरे, चौथे, पांचवें, सातवें, नौवें या दसवें भाव में सूर्य-राहु या सूर्य-शनि का योग हो तो ये पितृ दोष होता है| जिस भाव में ये योग होंगे उसके फल न्यून या नष्ट हो जाते हैं |
  2. जब राहु लग्न में हो और लग्नेश छठे, आठवें या बारहवें भाव में स्थित है तो ये पितृ दोष होता है |
  3. जिस भाव में पितृ दोष बन रहा हो उस भाव पर छठे, आठवें या बारहवें भाव के स्वामी की दृष्टि तो ये प्रबल पितृ दोष होता है | 
  4. सूर्य, चंद्र और लग्नेश का राहु से संबंध होना भी पितृदोष होता है |
  5. कुण्डली के लग्न ,पंचम भाव ,नवम भाव या लग्नेश ,पंचमेश,नवमेश का सम्बन्ध राहु से हो तो ये भी पितृ दोष का लक्षण होता है |
  6. जन्म कुंडली में चंद्र-राहु, चंद्र-केतु, चंद्र-बुध, चंद्र-शनि  आदि का योग मातृ दोष होता है. यह दोष मानसिक अस्थिरता और उतावलापन देता है और पितृ दोष की ही भाँति होता है |
  7.   जन्म कुण्डली में दशम भाव का स्वामी छठे, आठवें अथवा बारहवें भाव में हो और इसका राहु के साथ दृष्टि संबंध या युति हो रही हो तब भी पितृ दोष का योग बनता है|
  8. बारहवें भाव का स्वामी लग्न में स्थित हो, अष्टम भाव का स्वामी पंचम भाव में हो और दशम भाव का स्वामी अष्टम भाव में हो तब यह भी पितृ दोष की कुंडली बनती है और इस दोष के कारण धन हानि,शिक्षा हानि या संतान को या संतान के कारण कष्ट होता है |

पितृ दोष कारण और निवारण Pitra dosha causes and remedies

(पितृदोष के क्या कारण होते हैं)

  1. जब परिवार के किसी पूर्वज की मृत्यु के पश्चात उसका उचित प्रकार से अंतिम संस्कार न हुआ हो |
  2. परिवार के किसी सदस्य की जीवित अवस्था में कोई प्रबल इच्छा अधूरी रह गई हो और मृत्यु हो गयी हो
  3. परिवार के पूर्वजों ने किसी निर्बल व्यक्ति या परिवार पर अत्याचार कियें हों और उसने हृदय से श्राप दिया हो |( जैसे अपने पूर्वजों की धन सम्पति का हम भोग करते है ठीक उसी प्रकार उनके पाप कर्मो / दुष्कर्मों का भोग भी तो हमे करना होगा – ये बहुत बड़ा पितृदोष होता है और इसका प्रभाव अनेक पीढ़ियों तक रहता है | )
  4. किसी महात्मा / साधु संत का हमारे पूर्वजों ने अपमान किया हो |
  5. किसी मंदिर की सम्पति हड़पी हो , चुरायी हो या मंदिर ( देवस्थान ) तोडा हो |
  6. परिवार में किसी ने कभी पीपल , वटवृक्ष ( बरगद ) फलदार वृक्ष इत्यादि कटवाया हो |
  7. परिवार में किसी ने कभी अकारण ही नाग / गाय / गौवंश की हत्या की हो |
  8. परिवार में किसी ने कभी नदी,कुएं,सरोवर में मल-मूत्र विसर्जन किया हो ।
  9. परिवार में किसी ने कभी कुल देवता,देवी, इत्यादि का अपमान करना।
  10. पिता या पिता तुल्य व्यक्ति की हत्या की हो |
  11. अपने परिवार के सैकड़ों वर्षो से चले आ रहे महत्वपूर्ण नियमों / रीतियों  / संस्कारो को तोडा हो |

पितृ दोष शान्ति के उपाय ||  Pitra Dosh Remedies in hindi

(पितृ दोष शांत करने के उपाय)

  1. अपने पूर्वजों का यथा शक्ति मृत्यु पश्चात श्राद्ध कर्म / पिंड दान करें |
  2. यदि पूर्वजो की मृत्यु तिथि ज्ञात न हो तो अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि जिसे सर्व पितृ अमावस्‍या कहा जाता है, को श्राद्ध अवश्य करना चाहिए |
  3. बृहस्पतिवार के दिन संध्या समय पीपल के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाने और सात बार उसकी परिक्रमा करने से जातक को पितृदोष से राहत मिलती है |
  4. प्रतिदिन प्रातः काल स्नान इतियादी करके तांबे के पात्र (– लोहे या स्टील का बर्तन नही हो ) में शुद्ध जल में रोली, अक्षत ( चावल ),पुष्प लेकर सूर्यदेव को अर्पित करें | प्रयास करे कि अर्पित जल पर किसी का पैर न पड़े| सूर्यदेव को जल अर्पण रविवार से प्रारंभ करे | “ॐ घृणि सूर्याय नमः ” मंत्र का कम से कम 5 या 11 या 108 बार जाप करे | सूर्योदय के समय स्नानादि के पश्चात् कुश के आसन पर खड़े होकर सूर्य को निहारने और उनसे अपने दुःख बताने और  गायत्री मंत्र का जाप करने से भी सूर्य मजबूत होता है और पितृ दोष दुर्बल होता है | ( आपके पिता जीवित हैं तो उनका सम्मान करने पर ही ये उपाय काम करेगा | )
  5. शुक्ल पक्ष के प्रथम शनिवार को संध्या काल में पानी वाला नारियल( जटा वाला ) अपने ऊपर से सात बार वारकर बहते जल में प्रवाहित कर दें और अपने पूर्वजों से मांफी मांगकर उनसे आशीर्वाद मांगे।
  6. किसी भी गाय को गुड़,पीला अन्न खिलाये – सफ़ेद गाय हो तो अति उत्तम |
  7. घर का भोजन बनाते समय पहली रोटी गाय के नाम से निकाले और अपने काम पर जाते समय गाय कहीं भी मिले उसे खिला दें |
  8. अपने भोजन में से पक्षियों को दाना ( सात प्रकार का अनाज ) और कुत्तो का भी भोजन निकाले (इनसे क्रमश राहु और केतु प्रसन्न होते है) 
  9. प्रत्येक बृहस्पतिवार और शनिवार पीपल की पूजा करें और उसकी जड़ों में मीठा जल डालें और तिल के तेल का दीपक प्रतिदिन लगाएं यदि ये संभव न हो तो कम से कम पितृ पक्ष में पीपल की परिक्रमा अवश्य करें ,संभव हो तो 108 बार परिक्रमा लगायें इससे पितृ दोष अवश्य दूर होता है |
  10. गाय को हरा चारा, पक्षियों को सप्त धान्य, कुत्तों को रोटी, चींटियों को चारा नित्य डालें।
  11. ब्राह्मण कन्याओं को भोजन करवाएं | संभव हो तो किसी निर्धन कन्या का कन्या दान करें |
  12. अपनी जाति / धर्म के नियमों का पालन अवश्य करें |
  13. ब्राह्मणों को गौ-दान करें |
  14. पीपल या बरगद  आदि वृक्ष लगवाएं |
  15. यदि ऐसा अनुभव होता हो कि घर में कोई प्रेत आत्मा का प्रभाव है तो श्रीमद्द्भागवत का पाठ करना चाहिए | निरंतर कृष्ण भक्ति से प्रेतबाधा स्वतः हट जाती है|
  16. संभव हो तो प्रत्येक अमावस्या पर पितरों के निमित्त पवित्रता पूर्वक भोजन बनाया जाये जिसमे चावल, बूरा ,घी एवं एक रोटी हो और उसे गाय को खिला दें ,इससे भी पितृ दोष शांत होता है |           अथवा           अमावस्या पर पूर्वजों के नाम कच्चा दूध ,चीनी( बतासे) ,सफ़ेद कपडा साथ में अपनी सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा ,किसी मंदिर में अथवा किसी योग्य ब्राह्मण को दान दे देना चाहिए |
  17. पितृ दोष में अत्यधिक मानसिक अशांति रहती है और मानसिक शांति के लिए चन्द्र बली करना अत्यधिक आवश्यक है जिसके लिए भगवान शिव के मंदिर में या  मूर्ती / चित्र के समक्ष प्रातः काल या संध्या काल में “ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय च धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात।“ मंत्र को प्रतिदिन 108 बार जपने से भी जटिल पितृ दोष भी शांत हो जाता है | ये उपाय कम से कम सोमवार / शनिवार को अवश्य करें |( यदि माता जीवित है तो उनका सम्मान करने पर ही ये उपाय काम करेगा |)
  18. वर्ष में एक बार माँ दुर्गा के किसी सिद्ध मंदिर जैसे वैष्णो देवी, ज्वाला माता ,विन्ध्याचली (विन्द्यवास्नी) माता जाकर अपने पितृ दोष की शांति के लिए अनुरोध करना |( यदि पितृ दोष पीड़ित वृष / तुला – लग्न या राशी का हो तो ये उपाय बहुत काम करता है |)
  19. सोमवती अमावस्या को दूध की खीर बना, पितरों को अर्पित करने से भी इस पितृ दोष में कमी होती है         अथवा         प्रत्येक अमावस्या को एक ब्राह्मण को भरपेट स्वादिष्ट भोजन कराने व दक्षिणा देने से भी पितृ दोष कम होता है|        (ब्राह्मण देवगुरु बृहस्पति का प्रतिनिधि होता है और हिन्दू धर्म ग्रंथो के अनुसार बृहस्पति की कृपा से लाख दोष दूर होते है |)
  20.  पितृदोष को खत्म करने के लिए हर अमावस्या पर अपने पूर्वजों और पितरों के नाम से जितना हो सके लोगों को दवा वस्त्र भोजन का दान करें |
  21. घर में गंगा जल और तुलसी अवश्य और सम्मान के साथ रखें |
  22. सूर्यग्रहण / चन्द्र ग्रहण कभी न देखे | 

Remark :- यदि पितृ दोष से जुड़ी आपके मन में भी कोई जिज्ञासा है तो नीचे दिए comment box में comment करें | 

ये भी पढे : ग्रहों की शांति के उपाय || ग्रहों के दान के नियम

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