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हरसिद्धि माता मंदिर उज्जैन-51 शक्तिपीठों में से एक,प्रवेश शुल्क,दर्शन समय,इतिहास Complete Tour Guide of Harsiddhi Mata Temple

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हरसिद्धि माता मंदिर उज्जैन-51 शक्तिपीठों में से एक,प्रवेश शुल्क,दर्शन समय,इतिहास Complete Tour Guide of Harsiddhi Mata Temple

Harsiddhi Mata Temple: हिंदू धर्म में माँ जगदम्बा के 51 शक्तिपीठों की मान्यता है और इन्हीें शक्तिपीठों में से एक है हरसिद्धि माता मंदिर उज्जैन का पावन मंदिर ,जोकि ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर के पीछे पश्चिम दिशा में स्थित है, जहाँ पर माता सती के शरीर का 13 वा टुकड़ा माँ सती की कोहनी गिरी थी।

मित्रों देशभर में हरसिद्धि माता के अनेक प्रसिद्ध मंदिर है लेकिन उज्जैन स्थित हरसिद्धि मंदिर , माता का सबसे प्राचीन मंदिर है , इस देवी मंदिर का पुराणों में भी वर्णन मिलता है।।

उज्जैन के इस प्रसिद्ध शक्तिपीठ हरसिद्धि माता का मंदिर (Harsiddhi Mata Temple) और ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर के बीच पौराणिक रुद्रसागर है। स्कंद पुराण में देवी हरसिद्धि का उल्लेख मिलता है। मुख्य गर्भगृह में माता हरसिद्धि के निकट माता महालक्ष्मी और माता महासरस्वती भी विराजित हैं। हरसिद्धि माता के मंदिर परिसर में आदिशक्ति महामाया का भी मंदिर है

हरसिद्धि माता के मंदिर परिसर में मुख्य मंदिर के चारों ओर परकोटा है जिसमें चारों दिशाओं में द्वार बने हुए हैं।जिनमे मुख्य द्वार पूर्व दिशा की ओर है। मंदिर की सीढ़ियाँ चढ़ते ही वाहन सिंह की प्रतिमा है। परकोटे के भीतर ही चिंताहरण विनायक मंदिर ( गणेश जी का मंदिर ) , हनुमान जी का मंदिर और श्री कर्कोटेश्वर महादेव मंदिर हैं।

मंदिर सबसे बड़ा आकर्षण मंदिर परिसर में बने हुए दो विशाल दीप स्तंभ हैं जिनमे दाहिनी ओर का स्तंभ बड़ा और बांई ओर का छोटा स्तंभ है। जो नर-नारी के प्रतीक माने जाते हैं . कुछ लोगों के अनुसार ये दोनों स्तंभ शिव और शक्ति का प्रतीक हैं। इन दोनों स्तंभ पर 1100 दीप एक साथ प्रज्वलित हो सकते हैं। जब इन दीपों को प्रज्वलित किया जाता है तो लगभग 60 किलो तेल लग जाता है।

हरसिद्धि माता के मंदिर का इतिहास

History of Harsiddhi Mata Temple

राजा विक्रमादित्य की कुल देवी हरसिद्धि माता का मंदिर स्थल सम्राट विक्रमादित्य की तपोभूमि थी , ऐसा कहा जाता है कि गुजरात स्थित पोरबंदर से लगभग 48 किमी दूर मूल द्वारका के निकट समुद्र की खाड़ी के किनारे मियां गांव है जहाँ खाड़ी के पार पर्वत की सीढिय़ों के नीचे हरसिद्धि माता का मंदिर (Harsiddhi Mata Temple) है। ऐसी मान्यता है कि सम्राट विक्रमादित्य हरसिद्धि माता को उज्जैन लाए थे।

जब सम्राट विक्रमादित्य ने हरसिद्धि माता से उज्जैन चलने के लिए कहा तब देवी हरसिद्धि माता ने विक्रमादित्य से कहा था कि मैं रात्रि में तुम्हारे नगर में किन्तु दिन में इसी स्थान पर रहा करूंगी।

इसलिए ये माना गया है कि माता दिन में गुजरात और रात्रि में मप्र के उज्जैन नगरी में वास करती हैं। हरसिद्धि माता परमारवंशीय राजाओं की भी कुलदेवी है।

सम्राट विक्रमादित्य की बलि और उनके सिर

ऐसा माना जाता है कि सम्राट विक्रमादित्य ने 135 वर्ष राज किया था। सम्राट विक्रमादित्य देवी को प्रसन्न करने के लिए प्रत्येक 12वें वर्ष में एक बार अपने हाथों से अपना सिर काट स्वंम की बलि देते थे । लेकिन माता की कृपा से उन्हें पुन: नया सिर मिल जाता था।

ऐसा प्रति 12 वर्ष में एक बार वो अवश्य करते थे और वो ऐसा 11 बार कर चुके थे और जब उन्होंने 12वीं बार ऐसा किया तब उनका सिर वापस नही आया और इस प्रकार उनका जीवन समाप्त हो गया और लोगों ने समझ लिया कि उनका शासन समाप्त हो गया। आज भी मंदिर के एक कोने में 11 सिंदूर लगे मुण्ड रखें हैं। कहा जाता है कि ये ‘विक्रमादित्य के सिर’ हैं।

हरसिद्धि माता की कहानी

कहा जाता है कि चण्ड और मुण्ड नामक दो दैत्यों ने घोर आतंक मचा रखा था और एक बार दोनों ने कैलाश पर अधिकार करने की योजना बनाई और वे दोनों कैलाश पहुंच गए। उस समय माता पार्वती और भगवान शंकर द्यूत-क्रीड़ा में मग्न थे और उनके निकट कोई नही जा सकता था किन्तु चण्ड और मुण्ड दोनों बलपूर्वक अंदर प्रवेश करने लगे तो द्वार पर खड़े नंदीगण ने उन्हें भीतर जाने से रोक दिया।

तब दोनों दैत्यों ने नंदीगण को शस्त्रों से चोटिल कर दिया। जब शिवजी को ये बात पता चली तब उन्होंने माता चंडीदेवी का ध्यान किया और देवी ने शिव जी से आज्ञा पाकर तत्काल दोनों दैत्यों का वध कर दिया।

स बात से प्रसन्न हो शिवजी ने प्रसन्नता से कहा- हे चण्डी, आपने दुष्टों का वध किया है इसलिए मै ये वरदान देता हूँ कि आपका नाम तीनो लोकों में हरसिद्धि नाम से प्रसिद्ध होगा और तब से हरसिद्धि माता यहाँ विराजित हैं।

सप्तसागर रुद्रसागर सरोवर ( तालाब )

Saptsagar Rudrasagar Sarovar

हरसिद्धि माता का मंदिर (Harsiddhi Mata Temple) के पूर्व द्वार के सामने सप्तसागर रुद्रसागर सरोवर (तालाब ) है ,  उज्जैनी नगरी में 7 विशाल सरोवर हैं जिन्हें सप्त सागरों की संज्ञा दी गई है, रुद्रासागर भी उन्ही में से एक है । मान्यता है कि रुद्रसागर का दर्शन करने मात्र से 7 जन्मों की चिंताएं दूर हो जाती हैं .  ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर के दर्शन से पहले रुद्रसागर में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है किन्तु वर्तमान समय में रुद्रसागर का विकास कार्य चल रहा है ,

हरसिद्धि माता के मंदिर का दर्शन समय

Harsiddhi Mata Temple Darshan Timings

हरसिद्धि माता दर्शन का समय प्रातः 5.00 बजे से संध्या के 7.00 बजे तक है आप इस समय में कभी भी हरसिद्धि माता दर्शन के लिए जा सकते है।

हरसिद्धि माता की आरती का समय

Aarti Timing of Harsiddhi Mata Temple in Hindi

–> प्रातः आरती समय  : 7.00 बजे से 8.00 बजे तक

–> संध्या की आरती समय : 6.00 बजे से संध्या 7.00 बजे तक

हरसिद्धि माता मंदिर का प्रवेश शुल्क कितना है  – Entrance fee of Harsiddhi Mata Temple in Hindi

माता हरसिद्धि मंदिर उज्जैन में श्रद्धालुयों को हरसिद्धि माता के दर्शन और प्रवेश के लिए कोई भी प्रवेश शुल्क नही देना होता है । यहाँ आप निसंकोच्च बिना कोई शुल्क दिए माता के दर्शन सरलता से कर सकते है।

Harsiddhi Mata Temple हरसिद्धि माता मंदिर उज्जैन

हरसिद्धि माता मंदिर कैसे जाएँ 

How to reach Harsiddhi Mata Temple Ujjain 

हरसिद्धि माता मंदिर,उज्जैन  मध्यप्रदेश राज्य के प्रमुख नगर उज्जैन में स्थित है जोकि देश के अन्य प्रमुख नगरों से  रेलमार्ग  और सड़कमार्ग से भलीभांति जुड़ा हुआ है इसलिए हरसिद्धि माता मंदिर, उज्जैन बहुत ही सुगमता से पहुंचा जा सकता है |

How to reach Ujjain by flight in Hindi  

वायुमार्ग से कैसे पहुचे हरसिद्धि माता मंदिर

उज्जैन का अपना कोई हवाई अड्डा नहीं है। यदि आप हरसिद्धि माता मंदिर उज्जैन वायुयान से जाना चाहते हैं, तो सबसे अच्छा विकल्प इंदौर में स्थित अहिल्याबाई होल्कर हवाई अड्डा, इंदौर Devi Ahilya Bai Holkar Airport (IATA: IDR, ICAO: VAID) है जोकि निकटतम हवाई अड्डा है , ये उज्जैन से लगभग 57.3 km की दूरी पर स्थित है जहाँ भारत की लगभग सभी प्रमुख एयरलाइनों, जैसे एयर इंडिया, एयर एशिया, जेट एयरवेज, गोएयर, इंडिगो अपनी सेवा दी जाती है।

यदि आप एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटक हैं, तो आप सबसे पहले दिल्ली या  मुंबई आयें और उसके बाद घरेलु flight से अहिल्याबाई होल्कर हवाई अड्डा, इंदौर आयें हैं। दिल्ली और मुंबई में संसार के लगभग सभी देशों से flights आती है| उज्जैन  भारत के सभी प्रमुख नगरों जैसे दिल्ली, मुंबई, और लखनऊ इतियादी से भलीभांति जुड़ा हुआ है |

How to reach Ujjain by train in Hindi  

रेलमार्ग से कैसे पहुचे हरसिद्धि माता मंदिर

माता हरसिद्धि मंदिर,उज्जैन का निकटतम रेलवे स्टेशन ऊज्जैन जंक्शन रेलवे स्टेशन है जोकि हरसिद्धि माता मंदिर से मात्र 1 km की दूरी पर स्थित है |

ऊज्जैन जंक्शन रेलवे स्टेशन (ujjain junction railway station code – UJN ) ब्रॉड गेज लाइन यानि बड़ी लाइन पर स्थित है और भारतीय रेलवे के पश्चिमी रेलवे जोन के प्रशासनिक नियंत्रण में आता है। इस रेलवे स्टेशन पर 8 रेलवे प्लेटफॉर्म हैं। ऊज्जैन जंक्शन रेलवे स्टेशन नियमित ट्रेनों के माध्यम से देश के अन्य प्रमुख नगरों से अच्छी से जुड़ा हुआ है।

विभिन्न ट्रेनों का शुल्क और सीट उपलब्द्धता जाने के लिए यहाँ click करे  IRCTC 

bus

How to reach Ujjain by road in Hindi  

सड़कमार्ग से कैसे पहुचे हरसिद्धि माता मंदिर

माता हरसिद्धि मंदिर,उज्जैन का निकटतम bus stand 2 km दूर स्थित है जहाँ  देश के सभी प्रमुख नगरों से बड़ी सुगमता से नियमित सरकारी और प्राइवेट बसें और टैक्सी आती हैं। उज्जैन इंदौर लगभग 60 km,भोपाल 188 km, मुंबई 648 km और दिल्ली 776 km की दूरी पर स्थित हैं।

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