Gangotri

गंगोत्री-जहाँ स्वर्ग से आयीं पाप नाशिनी माँ गंगा

पौराणिक हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान राम के पूर्वज रघुवंश कुल के चक्रवर्ती राजा भगीरथ ने भागीरथी शिलाखंड पर बैठकर अपने पूर्वजो को कपिल मुनि के श्राप से मुक्ति दिलाने के लिए अत्यधिक कठिन तपस्या की जिससे माँ गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुई

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गंगोत्री

गंगोत्री, उत्तरभारत का प्रमुख और अत्यधिक पवित्र संसार भर में लोकप्रिय हिन्दू तीर्थ स्थान है,जोकि उत्तराखंड राज्य के गढ़वाल क्षेत्र के उत्तरकाशी जनपद में समुद्र तल से लगभग 3042 मीटर की ऊँचाई पर, उत्तरकाशी से लगभग 100 किमी दूर स्थित है | गंगोत्री माँ गंगा का उद्गम स्थल ( जी हां भारत के मूल धर्म,हिन्दू धर्म में नदी को भी माँ ही माना गया है और गंगा नदी के पृथ्वी पर आने की कथा अनेक साधू संतो के प्रयास से जुड़ी हुई ) है और भारत की सबसे बड़ी और संसार की दूसरी सबसे बड़ी नदी है |

गंगोत्री गोमुख

Gangotri Gomukh

गंगोत्री से 19 किमी दूर गोमुख नामक पवित्र स्थान माँ गंगा नदी का उद्गम स्थान है। गंगोत्री में बने गंगोत्री मंदिर के कपाट,अक्षय तृतीया तिथि को खुलते है जोकि प्रत्येक वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है और  दीपावली के दिन गंगोत्री मंदिर के कपाट बंद होते है।

गंगोत्री मंदिर

(gangotri temple)

इस मंदिर निर्माण 18 वी शताब्दी के प्रारंभ में गोरखा कमांडर अमर सिंह थापा द्धारा करवाया गया था और बाद में वर्तमान मंदिर का पुननिर्माण जयपुर के राजघराने ने करवाया था। यह मंदिर चमकदार सफेद ग्रेनाइट के 20 फीट ऊंचे पत्थरों से बना हुआ है।

यहाँ पर भागीरथी शिला भी है | पौराणिक हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान राम के पूर्वज रघुवंश कुल के चक्रवर्ती राजा भगीरथ ने इसी पवित्र शिलाखंड पर बैठकर अपने पूर्वजो को कपिल मुनि के श्राप से मुक्ति दिलाने के लिए अत्यधिक कठिन तपस्या की जिससे माँ गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुई किन्तु गंगा जी के तीव्र वेग को सहने की क्षमता पृथ्वी में नही थी इसलिए स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण से पहले गंगा जी शिव जी की जटा में समाहित हुई और उसके बाद पृथ्वी पर अवतरित हुईं|

माँ गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई है और पापियों के पाप नष्ट करने की क्षमता रखती है इसलिए गंगा को पतित पाविनी भी कहा जाता हैं। किन्तु ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु ने कथनानुसार कलियुग के 5000  वर्ष पूरे होने पर माँ गंगा पुनः स्वर्ग लौट जाएँगी ।

गंगोत्री मंदिर के पास ही गौरी कुंड और सूरज कुंड स्थित हैं

गंगोत्री मंदिर में माँ गंगा की आरती सेमवाल परिवार के पुजारियों द्वारा की जाती है।

Best time to visit gangotri

गंगोत्री आने का सबसे अच्छा समय अप्रैल माह से जून माह तक है क्योंकि उसके बाद बरसात प्रारंभ हो जाती है और गर्मियों के बाद सितम्बर माह से नवम्बर माह तक के समय में आप गंगोत्री आ सकते है| सामान्यतः यहाँ ठण्ड का मौसम ही रहता है जैसे गंगोत्री में गर्मियों में 10 to 15°C का तापमान और सर्दियों में 0 to 10°C का ही तापमान रहता है  गंगोत्री में हिंदी और गढ़वाली भाषा बोली जाती है

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गंगोत्री आने के लिए आप अपनी सुविधा के अनुसार वायु मार्ग, रेलगाड़ी या सड़कमार्ग किसी को भी अपना सकते है |

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गंगोत्री हिमालय की पहाड़ियों में स्थित है | इसलिए यहाँ पास में कोई हवाई अड्डा या रेलगाड़ी station नही है |गंगोत्री से निकटतम हवाई अड्डा देहरादून में 260 किलोमीटर की दूरी पर जॉली ग्रांट हवाई अड्डा है। यह एक घरेलू हवाई अड्डा है और यह देश के महत्वपूर्ण नगर जैसे – दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, लखनऊ और तिरुअनंतपुरम आदि नगरों से जुड़ा हुआ है। गंगोत्री के सबसे निकट का अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा नई दिल्ली में स्थित है। तो गंगोत्री आने के लिए आप या तो जॉली ग्रांट हवाई अड्डा,देहरादून पहुंचे या नई दिल्ली पहुंचे और उसके बाद टैक्सी से गंगोत्री जा सकते है |

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गंगोत्री के पास कोई भी रेलवे स्टेशन नही है | गंगोत्री से निकटतम रेलवे स्टेशन 250 किमी की दूरी पर हरिद्वार के पास ऋषिकेश में ऋषिकेश रेलवे स्टेशन (Rishikesh railway station-station code RKSH)है। यहाँ से आप गंगोत्री तक पहुँचने के लिए टैक्सी किराए पर ले सकते हैं। ऋषिकेश देश के प्रमुख नगरों जैसे नई दिल्ली, मुंबई, हावड़ा, आगरा, अमृतसर,वाराणसी, देहरादून इतियादी से भलीभांति जुड़ा हुआ है |

how to reach gangotri by Road

सड़कमार्ग से गंगोत्री आने के लिए आप राज्य परिवहन निगन की बस , निजी बस या अपने स्वंम के वाहन का प्रयोग कर सकते है | प्राइवेट बस या टैक्सी लेने से पहले आप लगने वाला किराया पता करलें क्योंकि अलग अलग बस, टैक्सी का किराया अलग अलग हो सकता है |

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