Vrindavan a 2 z info ||वृंदावन धाम-प्रभु श्री कृष्ण की नगरी

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Vrindavan a 2 z info||वृंदावन धाम-प्रभु श्री कृष्ण की नगरी 

(Vrindavan Dham Tour In Hindi)

वृंदावन एक ऐसा नाम, एक ऐसा स्थान ,एक ऐसा तीर्थ है जिसे पूरा संसार जानता है,

भगवान् कृष्ण के भक्त वो चाहे संसार के किसी भी कोने में रहते हों अपने जीवन में एक बार वृन्दावन अवश्य आना चाहते है ।

प्रभु कृष्ण के भक्तों को वृन्दावन की पवित्र भूमि के कण कण में प्रभु कृष्ण की ही अनुभूति होती है और इसीलिए हिन्दू धर्म के अति पवित्र धार्मिक स्थलों में वृन्दावन का नाम भी आता है।

वृन्दावन और वृन्दावन के आस पास का पूरा क्षेत्र ब्रज कहलाता है और वृन्दावन इस  ब्रज क्षेत्र का हृदय स्थल है , यहीं वो स्थान है जहाँ श्री राधाकृष्ण ने गोपियों संग अपनी दिव्य लीलाएँ की थी । धार्मिक ग्रन्थ पद्म पुराण के अनुसार वृन्दावन भगवन प्रभु श्री हरी विष्णु से मिलने का स्थायी संपर्क स्थल है और भगवन के शरीर का ही अंग है । 

वृन्दावन , भारत के उत्तरी राज्य उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद में स्थित मथुरा नगर ( city) से लगभग 15 किमी,आगरा से लगभग 70 किमी दूर और भारत की राजधानी दिल्ली से 150 किमी की दूरी पर स्थित है ।

आप वृन्दावन धाम जाने की सोच रहे है तो मथुरा नगर यानि मथुरा सिटी से आधा घंटा और आगरा से लगभग 1 से 1 घंटा 30 मिनट और दिल्ली से 2 से 2 घंटे 30 मिनट के समय में यहाँ पहुंच सकते हैं । 

वृन्दावन धाम और इसके आसपास के क्षेत्र को ब्रज या ब्रजधाम भी कहते है और इस पवन क्षेत्र में निवास करने वाले लोग ब्रजवासी कहलाते है ।

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vrindavan

वृन्दावन धाम वो क्षेत्र है जहाँ आज से लगभग 5000 वर्ष पूर्व भगवान कृष्ण का बाल्यकाल बीता था और इसीलिए भगवान कृष्ण के भक्त अपने आराध्य के जीवन से जुड़े उन स्थानों के दर्शन करने आते है जहाँ प्रभु कृष्ण ने कभी अपनी लीलाये दिखायीं थी , अपने भक्तों के साथ रास किया था |

वृन्दावन के निकट ही मथुरा नगर में भगवान् कृष्ण ने जन्म लिया था जो आज कृष्ण जन्म स्थान के रूप में प्रसिद्द है और यहाँ भी पूरे वर्ष लाखों तीर्थयात्री इस स्थान के दर्शन करने आते है | वृन्दावन और मथुरा दोनों ही स्थान राष्ट्रीय राजमार्ग 2 ( National Highway 2 ) से जुड़े हुए है |

वृन्दावन में प्रभु श्री कृष्ण और राधा रानी के मन्दिरों बहुत बड़ी संख्या में सभी स्थानों पर स्थापित है । वृन्दावन बहुत ही मनभावन तीर्थ है और यहाँ आने वाले तीर्थयात्री / पर्यटक यहाँ बार बार आना चाहते है क्योंकि वृन्दावन यमुना नदी से घिरा हुआ है और तीर्थयात्रियों को घूमने के लिए प्राकृतिक वातावरण मिलता है ।

यहाँ अनेक प्राकृतिक वाटिकाएं ( gardens ) है जहाँ भाँति-भाँति के पुष्पों वाले पौधें और छोटे बड़े हरे भरे वृक्ष बहुत ही मनोहारी दृश्य उत्पन्न करते है और ऐसा लगता ही की आज भी प्रभु यहाँ अपना रास रचा रहे हैं ।

वृन्दावन में अनेको छोटे बड़े मंदिर है जिनका अपना पौराणिक महत्व है और यहाँ सैंकड़ों आश्रम और अनेक गौशालाएं भी है साथ ही यहाँ वृद्ध आश्रम हैं जहाँ बहुत से वृद्ध लोग रहते है और विधवा आश्रम भी है जिनमे अनेको माता बहने प्रभु कृष्ण का नाम जपते हुए अपना जीवन यापन करती है।

यदि आपका मन भी वृन्दावन घूमने का हो रहा है तो समय निकल कर एक बार वृन्दावन अवश्य आयें , हमे विश्वास है कि 1 बार यहाँ आने के बाद आप बार बार आयेंगे ।

आइये हम आपको बताते है कि

वृंदावन धाम और वृन्दावन के आसपास कहाँ कहाँ जाना चाहिए :-

Places to visit in Vrindavan :-

1. बांके बिहारी मंदिर वृंदावन ( Banke Bihari Temple Vrindavan )

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वृन्दावन के प्रमुख मंदिरों में से एक है बांके बिहारी मंदिर , यहाँ वर्ष भर प्रभु श्री कृष्ण ( बांके बिहारी ) के दर्शन के लिए उनके भक्त भारी संख्या में आते है। बांके बिहारी मंदिर वृन्दावन का प्रमुख तीर्थ है जिसे श्रीहरिदास स्वामी के वंशजो ने मिलकर बनाया था ।

यदि आप वृन्दावन धाम आ रहे है तो ये समझ लीजिये की आपको बांके बिहारी मंदिर आना ही है और बांके बिहारी (प्रभु श्री कृष्ण) के दर्शन के बिना आपकी तीर्थयात्रा सम्पूर्ण नही है । 

बांके बिहारी मंदिर में दर्शन और आरती का समय -होली पर्व के बाद ( ग्रीष्मकालीन  ) 

banke bihari temple darshan & aarti timing in Summer ( after Holi)

दर्शन का समय ( प्रातःकाल ) : 07:45 am to 12:00 pm

Darshan Time in Morning (07:45 am to 12:00 pm),

श्रृंगार आरती /  Shringar Aarti – 08:00 am,

राजभोग आरती /  RajBhog Aarti 12:00 pm,

दर्शन का समय ( संध्या काल  ) :05:30 pm to 09:30 pm

Darshan time in Evening 05:30 pm to 09:30 pm,

संध्या आरती / Shayan Aarti – 09:30 pm.

आरती का समय -दीपावली पर्व के बाद ( शीतकालीन ) 

banke bihari aarti Timing after Deepawali ( Winter )

दर्शन का समय ( प्रातःकाल ) : 08:45 am to 01:00 pm,

Darshan Time in Morning (08:45 am to 01:00 pm,),

श्रृंगार आरती /  Shringar Aarti – 09:00 am,

राजभोग आरती /  RajBhog Aarti 01:00 pm,

दर्शन का समय ( संध्या काल  ) :04:30 pm to 08:30 pm,

Darshan time in Evening 05:30 pm to 09:30 pm,

संध्या आरती / Shayan Aarti – 8:30 pm.

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2. रंग जी मंदिर (Rangji Temple Vrindavan)

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रंगजी मन्दिर जिसे रंगनाथ जी मन्दिर भी कहते है, वृन्दावन धाम में स्थित प्रमुख मंदिरों में से एक है। इस मंदिर का निर्माण द्रविड वास्तुशिल्प शैली में वर्ष 1851 में मथुरा के जाने माने सेठ लखमीचन्द के भाई सेठ गोविन्ददास और राधाकृष्ण दास द्वारा करवाया गया था।

रंगनाथ जी मन्दिर का निर्माण आचार्य स्वामी रंगाचार्य जी के द्वारा उपलब्ध कराये गये मानचित्र के आधार पर किया गया है और इस मंदिर को बनाने में 45 लाख की लागत आई थी।

रंगजी मंदिर में दर्शन और आरती का समय ( ग्रीष्मकालीन  ) 

rangji temple darshan & aarti timing in Summer

दर्शन का समय ( प्रातःकाल ) : 5:30 am to 10:30 am

Darshan Time in Morning (5:30 am to 10:30 am),

आरती / Aarti ( प्रातःकाल )- 5:30 am to 6:00 am,

दर्शन का समय ( संध्या काल  ) :4:00 pm to 9:00 pm,

Darshan time in Evening : 4:00 pm to 9:00 pm,

आरती / Aarti ( संध्याकाल  ) – 6:30 pm to 7:00 pm,

रंगजी मंदिर में दर्शन और आरती का समय ( शीतकालीन ) 

rangji temple darshan & aarti timing in Winter 

दर्शन का समय ( प्रातःकाल ) : 6:00 am to 11:00 am

Darshan Time in Morning (6:00 am to 11:00 am),

आरती / Aarti ( प्रातःकाल )- 6:00 am to 6:30 am,

दर्शन का समय ( संध्या काल  ) :3:30 pm to 8:30 pm

Darshan time in Evening : 3:30 pm to 8:30 pm,

आरती / Aarti ( संध्याकाल  ) 6:00 pm to 6:30 pm,

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3. सेवा कुंज seva kunj Vrindavan

sevakunj and nidhivan

जब वृन्दावन धाम में प्रभु श्रीकृष्ण ने रास लीला संपन्न की थी तो रास के पश्चात राधा जी को थकान हो गयी थी तब प्रभु ने राधा जी की थकान दूर करने के लिए इस स्राथान पर राधा जी के पाँव दबाये थे इसीलिए इस स्थान को सेवा कुंज के नाम से भी जाना जाता है 

सेवाकुंज वृंदावन के प्राचीन अति पवित्र स्थानों में से एक है और गोस्वामी श्री हित हरिवंश जी ने वर्ष  1590 में प्रभु श्रीकृष्णा के अन्य अनेक लीला स्थलों के साथ इस स्थान को भी खोजा और ये स्थान समस्त लोक में सेवा कुंज के नाम से प्रकट हुआ , सेवा कुंज राधादामोदर जी मन्दिर के निकट ही पूर्व-दक्षिण कोण में स्थित है 

श्री सेवा कुंज मंदिर में दर्शन और आरती का समय  ( ग्रीष्मकालीन ) 

seva kunj vrindavan darshan & aarti timing ( summer )

मंगला आरती 5:15

शृंगार आरती 6:45

राजभोग आरती 12:30

धूप आरती 5:30

शयन आरती 8:00 बजे

श्री सेवा कुंज मंदिर में दर्शन और आरती का समय  ( शीतकालीन  ) 

seva kunj vrindavan darshan & aarti timing ( Winter  )

मंगल आरती 6:15

शृंगार आरती 7:45

राजभोग आरती 1:00 बजे

धूप आरती 5:00.

शयन आरती 7:30

4. श्री राधा रमण मंदिर वृंदावन ( Sri Radharaman Temple Vrindavan)

sri radha raman mandir vrindavan

श्री राधा रमण मंदिर वृंदावन के श्रीविगृह में मदनमोहन, गोपीनाथ एवं गोविन्ददेव के एक साथ दर्शन होते हैं जोकि वृन्दावन और आसपास के क्षेत्रों में स्थित किसी अन्य मंदिर में नही मिलता है ।

वृन्दावन के इस प्रसिद्ध मन्दिर में श्री गोपाल भक्त गोस्वामी जी के उपास्य ठाकुर हैं। यहाँ श्री राधारमण जी, ललित त्रिभंगी मूर्ति के दर्शन हैं। हिन्दू धार्मिक मान्यता के अनुसार यह माना जाता है कि 1599 विक्रम संवत वैशाख शुक्ला पूर्णिमा की बेला में शालिगराम से श्री गोपालभट्ट प्रेम वशीभूत हो ब्रज निधि श्री राधारमण विग्रह के रूप में अवतरित हुए।

यह श्रीमन महाप्रभु के कृपापात्र श्री गोपालभट्ट जी के द्वारा सेवित विग्रह है। श्रीभट्टगोस्वामी पहले एक शालग्राम शिला की सेवा करते थे। एक समय उनकी यह प्रबल अभिलाषा हुई कि यदि शालग्राम ठाकुर जी के हस्त-पद होते तो मैं उनकी विविध प्रकार से अलंकृत कर सेवा करता, उन्हीं झूले पर झुलाता। भक्तवत्सल प्रभु अपने भक्त की मनोकामना पूर्ण करने के लिए उसी रात में ही ललितत्रिभंग श्री राधारमण रूप में परिवर्तित हो गये। भक्त की इच्छा पूर्ण हुई। भट्ट गोस्वामी ने नानाविध अलंकारों से भूषितकर उन्हें झूले में झुलाया तथा बड़े लाड़-प्यार से उन्हें भोगराग अर्पित किया।

श्रीराधारमण विग्रह की पीठ शालग्राम शिला जैसी दीखती है। अर्थात पीछे से दर्शन करने में शालग्राम शिला जैसे ही लगते हैं।

द्वादश अंगुल का श्रीविग्रह होने पर भी बड़ा ही मनोहर दर्शन है।

श्रीराधारमण विग्रह का श्री मुखारविन्द गोविन्द जी के समान, वक्षस्थल श्री गोपीनाथ के समान तथा चरणकमल मदनमोहन जी के समान हैं। इनके दर्शनों से तीनों विग्रहों के दर्शन का फल प्राप्त होता है।

सेवाप्राकट्य ग्रन्थ के अनुसार सम्वत 1599 में शालग्राम शिला से राधारमण जी प्रकट हुए।

उसी वर्ष वैशाख की पूर्णिमा तिथि में उनका अभिषेक हुआ था।

राधारमणजी के साथ श्रीराधाजी का विग्रह नहीं है। परन्तु उनके वाम भाग में सिंहासन पर गोमती चक्र की पूजा होती है।

श्रीहरिभक्तिविलास में गोमतीचक्र के साथ ही शालग्राम शिला के पूजन की विधि दी गई है।

श्रीराधारमण मन्दिर के पास ही दक्षिण में श्रीगोपालभट्टगोस्वामी की समाधि तथा राधारमण के प्रकट होने का स्थान दर्शनीय है।

अन्य विग्रहों की भाँति श्री राधारमण जी वृन्दावन से कहीं बाहर नहीं गये।

श्री राधा रमण मंदिर वृंदावन में दर्शन और आरती का समय  ( ग्रीष्मकालीन ) 

Sri Radharaman Temple Vrindavan darshan & aarti timing ( summer )

मंगला आरती प्रातः काल : 05:00 प्रातः

प्रातः काल : 05:00 से 12:15 दोपहर

संध्याकाल : 06:00 दोपहर से 09:00 रात्रि

श्री राधा रमण मंदिर वृंदावन में दर्शन और आरती का समय  ( शीतकालीन  ) 

Sri Radharaman Temple Vrindavan darshan & aarti timing ( Winter )

मंगला आरती प्रातः काल : 05:30 प्रातः

प्रातः काल : 05:30 से 12:15 दोपहर

संध्याकाल आरती : 06:00 दोपहर से 09:00 रात्रि

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5. गोपेश्वर महादेव मंदिर वृन्दावन उत्तर प्रदेश ( Gopeshwar Mahadev Temple Vrindavan)

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श्री कृष्ण भगवान् की गोपियों संग वृन्दावन में की गयी रासलीला समस्त संसार में प्रसिद्द है, प्रभु कृष्ण के रासलीला का आनद लेने के लिए देवी देवता भी तरसते थे,

वृन्दावन की इस रास लीला का आनंद भोले बाबा भी लेना चाहते थे किन्तु भगवान कृष्ण और गोपियों की रासलीला में कृष्ण और गोपियों के अतिरिक्त कोई भी भाग नही ले सकता था,

इसीलिए भगवान् शिव ने गोपी बनने का निर्णय लिया और भगवान् शिव को कोई पहचान न सके इसके लिए भगवान् शिव ने गोपियों के वस्त्र पहन लिये और गोपी रूप धारण कर लिया था, वृंदावन स्थित गोपेश्वर महादेव मंदिर प्रभु कृष्ण और भगवान् शिव के अदभुत प्रेम को स्मरण दिलाने वाला मंदिर है जो वृन्दावन के महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है।

यही एक ऐसा मंदिर है जहाँ भगवान् शिव को महिलाओं के वस्त्रों से सजाया जाता है।

गोपेश्वर महादेव मंदिर वृंदावन में दर्शन और आरती का समय  ( ग्रीष्मकालीन ) 

Gopeshwar Mahadev Temple Vrindavan darshan & aarti timing ( Summer )

प्रातःकाल 5:00 AM – 12:00 PM,

संध्या काल 4:30 PM – 9:30 PM |

गोपेश्वर महादेव मंदिर वृंदावन में दर्शन और आरती का समय  ( शीतकालीन  ) 

Gopeshwar Mahadev Temple Vrindavan darshan & aarti timing ( Winter )

प्रातःकाल: 5:30 AM – 12:00 PM,

संध्या काल: 4:30 PM – 9:00 PM

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6. शाहजी मंदिर वृंदावन धाम ( Shah Ji Temple Vrindavan)

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शाह जी मन्दिर, वृन्दावन का एक ऐसा मंदिर है जिसे उसकी विशिष्ट मूर्तिकला और उत्कृष्ट वास्तुकला के लिए प्रसिद्द और राधा व भगवान कृष्ण को समर्पित है।

शाह जी मन्दिर को बनाने में श्वेत संगमरमर को प्रयोग किया गया है , इस मंदिर में जो खम्बे लगे है वो संगमरमर के एक ही पत्थर से बने है और अत्यन्त आकर्षक सर्पाकार आकृति में बनायें गये है

शाह जी मन्दिर, वृन्दावन का निर्माण लखनऊ निवासी सेठ कुन्दनलाल शाह ने 19वीं शताब्दी में करवाया था ।ये मंदिर वर्ष 1835 में बनना प्रारम्भ हुआ था। सेठ कुन्दनलाल शाह  महाप्रभु श्री चैतन्य के अनन्य भक्त थे।

7. इस्कॉन मंदिर वृंदावन ( Iskon Temple Vrindavan )

इस्कॉन मंदिर,वृंदावन के प्रसिद्द मंदिरों में से एक है जोकि भगवान श्रीकृष्ण और उनके बड़े भाई बलराम को समर्पित है इसीलिए इस मंदिर को कृष्ण बलराम मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

ऐसा कहा जाता है कि यह मंदिर ठीक उसी स्थान पर बना हुआ है, जहां भगवान कृष्ण आज से 5000 वर्ष पूर्व गोपालों के साथ खेला करते थे और गाय चराने आते थे।

इस्कॉन मंदिर इस्कॉन सोसाइटी (ISKCON)  के द्वारा संचालित है जिसका पूरा नाम इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस(ISKCON) है। इस्कॉन सोसाइटी (ISKCON) की स्थापना 1966 में स्वामी प्रभुपाद ने न्यूयॉर्क में की थी। वृन्दावन के इस्कॉन मंदिर को 1975 में बनवाया गया था जो धीरे धीरे देश विदेश में प्रसिद्ध हो गया।

इस्कॉन मंदिर और इस्कॉन सोसाइटी (ISKCON)  के संस्थापक स्वामी प्रभुपाद की वर्ष 1977  में मृत्यु हो गई, आज उनका स्मारक मंदिर परिसर में ही बना हुआ है।

8. प्रेम मंदिर वृंदावन धाम ( Prem Temple Vrindavan)

prem mandir vrindavan

प्रेम मन्दिर वृंदावन  का एक प्रमुख आधुनिक मन्दिर है , 14 जनवरी 2001 को कृपालु जी महाराज ने प्रेम मंदिर का शिलान्यास किया था और लगभग एक हज़ार शिल्पकार और हज़ारों श्रमिकों के द्वारा प्रेम मंदिर 11 वर्ष में अपने वर्तमान स्वरुप में आया और 17 फ़रवरी, 2012 को प्रेम मन्दिर  को प्रभु कृष्ण के भक्तों को समर्पित कर दिया गया अर्थात प्रेम मन्दिर  का लोकार्पण हुआ।

प्रेम मन्दिर  को बनाने का उद्देश्य समाज से जाति, वर्ण के भेद मिटाकर और देश विदेश के भेद को मिटाना है और इसके साथ ही पूरे संसार में समस्त मानव जाति को प्रेम को सर्वोच्च स्थान और महत्व देने का सन्देश देना है ।

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9. गोविन्द देवजी मंदिर वृंदावन ( Govind Dev Ji Temple Vrindavan)

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गोविंद देव मंदिर वृन्दावन के प्राचीन और मुख्य मंदिरों में से एक है जिसका निर्माण वर्ष 1590 में आमेर के राजा भगवान दास के पुत्र राजा मानसिंह ने करवाया था जोकि जयपुर के राजा थे। ऐसा कहा जाता है कि कभी इस मंदिर का इतना वैभव था कि प्रतिदिन 50 किलो देसी घी मात्र दीपक जलाने में खर्च हो जाता था

मंदिर के वैभव से चिढ़कर औरंगजेब ने गोविंद देव मंदिर को तोड़ने का आदेश दे दिया था तब भगवान श्री कृष्णा रात्रि में मंदिर के पुजारी के स्वप्न में आये और कहा कि कल औरंगजेब यह मंदिर तोड़ने आएगा। इसके पहले ही तुम मेरी मूर्ति कहीं और स्थापित करा दो।

स्वप्न देखने के पश्चात् भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति राजस्थान के जयपुर में एक मंदिर में स्थापित करा दी गई जिसे आज सभी गोविंद वल्लभ मंदिर के नाम जानते हैं ।

इसके बाद गोविंद देव मंदिर को जितना तोड़ा जा सकता था उतना तोड़ा गया और शेष पर मस्जिद की दीवार और गुम्बद आदि बनवा दिए गये और यहाँ औरंगज़ेब ने नमाज़ पढ़ी। इसके बाद लंबे समय तक यहां कोई भी मूर्ति की स्थापित नहीं हो पायी । 

स्थानीय लोगों और संत समाज की अनुसार अपने प्रारंभिक दिनों में गोविंद देव मंदिर में 7 मंजिल थी जिसमे से 4 मंजिल को औरंगजेब के कहने पर गिरा दिया गया। मथुरा में भगवान श्री कृष्ण जन्म भूमि के पास बनी मस्जिद गोविंद देव के मंदिर के चारों फ्लोर को तोड़कर जो पत्थर निकाला गया था, उन्ही पत्थरों से ही बनी है क्योंकि उस मस्जिद के पत्थर और गोविंद देव मंदिर के पत्थर बिलकुल एक जैसे हैं।

गोविन्द देव जी की आरती का समय :-

मंगला आरती : 4:30AM to 5:45AM
धुप आरती  :-  8:15AM to 9:30AM
संध्याकाल आरती : 6:30PM to 7:45PM
शयन आरती  : 8:15pm to 9:15PM

10. निधि वन  (हरिदास का निवास कुंज)(Nidhivan Vrindavan )

nidhivan vrindavan

श्रीकृष्ण भगवान् की रासलीला का स्थान – निधिवन , सेवाकुंज और निधिवन एक ही स्थान हैं , ऐसी मान्यता है कि निधिवन में आज भी हर रात्रि प्रभु कृष्ण गोपियों के संग रास रचाते आते हैं और इसीलिए संध्या आरती के बाद निधिवन को बंद कर दिया जाता है। । स्थानीय पुजारी, संतों और स्थानीय लोगों का कहना है कि इस वन में दिन में रहने वाले पशु-पक्षी भी संध्या होते ही निधिवन को छोड़कर जाने कहाँ चले जाते हैं। 

जब कभी भी निधिवन में किसी ने रात्रि में रूक कर प्रभु श्रीकृष्ण की रासलीला को देखने का प्रयास किया तो उसका या मानसिक संतुलन बिगड़ गया या वो अंधा हो गया है इसीलिए कृष्ण भक्तों से भरा रहने वाला निधिवन में संध्या 7 बजे के बाद खाली करवा दिया जाता है । 

ऐसा भी कहा जाता है कि प्रति रात्रि प्रभु श्रीकृष्ण और राधारानी बांके बिहारी मंदिर से निकलकर यहां आते हैं और श्रृंगार करने के बाद गोपियां संग रास रचाते है। निधिवन में जो पेड़ लगे है वो प्राचीन काल में प्रभु श्रीकृष्ण की भक्ति में डूबे साधु संत हैं जिन्होंने श्रीकृष्ण प्रभु के धरती पर आने पर गोपियों के रूप में जन्म लिया और ये ही प्रति रात्रि प्रभु श्रीकृष्ण के साथ रास करते हैं

निधिवन में विशाल तुलसी के वृक्ष है जो एक दूसरे से ऐसे जुड़े है जैसे एक दूसरे का हाथ पकड़ नृत्य कर रहे हो , ऐसा भी कहा जाता है कि प्रभु श्रीकृ्ष्ण की सखियां ये ही तुलसी बृक्ष है । यही निधिवन स्‍वामी हरिदास जी की साधना स्‍थली रही है। स्‍वामी हरिदास ने जीवन भर इस वन में निवास किया।

इसी प्रकार अन्य प्रमुख मंदिर इस प्रकार हैं 

11. राधा वल्लभ मंदिर ( Radha Vallabh Mandir mathura )

12.श्री रघुनाथ मंदिर ( Sri Raghunath Ji Temple Vrindavan)

13. गोपीनाथ जी मंदिर ( Gopinath Ji Temple Vrindavan )

14. कात्यायनी शक्तिपीठ वृन्दावन ( Katyayni Shaktipeeth Temple Vrindavan)

वृंदावन घूमने का सबसे अच्छा समय

Best Time To Visit Vrindavan In Hindi

वृंदावन चूँकि उत्तरी भारत में स्थित है जहाँ से राजस्थान बहुत ही निकट है । वृंदावन के सबसे निकट का महानगर आगरा और भारत की राजधानी दिल्ली है, इस क्षेत्र में गर्मी के दिनों में बहुत अधिक गर्मी और सर्दियों के दिनों में बहुत सर्दी पड़ती है इसीलिए यदि आप वृंदावन धाम आना चाहते है तो अक्टूबर से दिसंबर माह या फरवरी से अप्रैल माह तक का समय सबसे अच्छा रहेगा।

इन महीनों में वृंदावन घूमने में आपको पता ही नही चलेगा कि आपने कब कितने मंदिर , कितने आश्रम घूम लिए , वृंदावन घूमते समय आपको छोटे बड़े अनेक मंदिर मिलेंगे और मार्ग में देश के कोने कोने से आये हुए तीर्थयात्री साथ चलते हुए मिलेंगे, हमारे देश भारत के निवासियों के साथ साथ संसास के कोने कोने से आये तीर्थयात्री “राधे राधे ” ” जय श्री कृष्णा ” जपते हुए दिखाई दे जायेंगे।

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वृंदावन कैसे पहुंचें 

How To Reach Vrindavan Dham In Hindi

वृंदावन जाने के लिए आप flight ,train और road तीनो ही माध्यम को प्रयोग कर सकते है किन्तु  flight से जाने के लिए पहले आपको निकटतम महानगर आगरा अथवा देश की राजधानी  दिल्ली जाना होगा इसके बाद आप train अथवा road से वृंदावन जा सकते है | 

आईये जानते है :-

वायुमार्ग से वृंदावन कैसे पहुंचे  / हवाई जहाज से वृंदावन धाम कैसे पहुंचें

How To Reach Vrindavan Dham By Air In Hindi

वृंदावन का निकटतम हवाई अड्डा आगरा महानगर में खेरिया एयरपोर्ट (Kheria Airport) (AGR), है जोकि वृंदावन से 53 किमी की दूरी पर स्थित है। यह खेरिया एयरपोर्ट (Kheria Airport) (AGR), देश के प्रमुख नगरों जैसे दिल्ली, कोलकाता, वाराणसी और मुंबई से हवाई मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। यहां पहुंचने के बाद आप बस या टैक्सी के माध्यम से वृंदावन पहुंच सकते हैं।

वृंदावन के निकट दूसरा हवाई अड्डा दिल्ली में है जोकि देश की राजधानी है ।

वृंदावन के निकट “नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट” जिसे जेवर एअरपोर्ट भी कहा जाता है ,अभी निर्माणाधीन है और इसे स्विस कंपनी ज़्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल ने डिजाइन किया है ,   उत्तर प्रदेश में बनने वाला ये संसार का 5वां सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा । वर्तमान में चीन का शंघाई एयरपोर्ट एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट है  जोकि 3988 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है । 5000 हेक्टेयर में बनने वाला “नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट” बनने के बाद एशिया का सबसे बड़ा हवाई अड्डा बन जायेगा । 

ट्रेन से वृंदावन धाम कैसे पहुंचें 

How To Reach Vrindavan Dham By Train In Hindi 

वृंदावन में कोई बड़ा रेलवे स्टेशन नहीं है, यहाँ वृंदावन रोड रेलवे स्टेशन (VRBD ) और वृंदावन रेलवे स्टेशन ( BDB ) के नाम से छोटे रेलवे स्टेशन हैं जहाँ लोकल पैसेंजर आदि रूकती है । यहां का बड़ा  निकटतम रेलवे स्टेशन मथुरा में है जिसे मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन ( Mathura Junction Railway Station (Station Code -MTJ) ) के नाम से जाना जाता है और दूसरा मथुरा कैंट ( Mathura Cantt –

Station Code – MRT ) है , आप चाहे तो आगरा के रेलवे स्टेशनों पर भी उतर सकते क्योंकि अनेक ट्रेने आगरा तो आती है लेकिन मथुरा नही जाती हैं और आगरा से बस या टैक्सी से आप बहुत ही सुगमता से वृंदावन आ सकते हैं ।

सड़क मार्ग से वृंदावन धाम कैसे पहुंचें

How To Reach Vrindavan Dham By Road In Hindi

वृन्दावन और मथुरा दोनों ही स्थान राष्ट्रीय राजमार्ग 2 ( National Highway 2 ) से जुड़े हुए है  इसलिए हम कह सकते है कि आप देश के किसी भी कोने से बहुत ही सुगमता से वृन्दावन आ सकते है । यहां का निकटतम बस स्टैंड मथुरा नगर में है जोकि  वृंदावन से लगभग 15 किमी दूर है। वृन्दावन आने के लिए आप दिल्ली , आगरा ,जयपुर  इतियादी सरलता से आ सकते हैं । यहाँ आने के लिए आप  उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम (UPSRTC) की बस का उपयोग भी कर सकते हैं 

वृंदावन में कहां रुकें

Where To Stay In Vrindavan Dham In Hindi

वृंदावन में  रूकने के लिए आपको सभी प्रकार की व्यवस्था मिल जाएगी , यहाँ budget hotel से लेकर luxurious hotel, गेस्ट हाउस मिल जायेंगे और यदि आप कम खर्च में रहना चाहते है तो अनेक धर्मशाला और आश्रम भी मिल जायेंगे है,  चूँकि वृन्दावन विस्तृत क्षेत्र में फैला हुआ है इसलिए आप अपनी वृदावन यात्रा की पूरी प्लानिंग बना कर ही जाएँ जैसे आप अपनी यात्रा कहाँ प्रारंभ करेंगे और आपकी यात्रा का कहाँ समापन होगा , आप अपनी  यात्रा ऐसे स्थान पर समाप्त करें जहाँ से आपको लौटने में सुगमता हो जैसे आप बस या ट्रेन से लौटना चाहते है तो बस स्टैंड या रेलवे स्टेशन के सबसे निकट का मंदिर/ आश्रम/तीर्थस्थल आपकी यात्रा का अंतिम बिंदु होना चाहिए ।

इसी प्रकार भोजन के लिए भी आपको वृन्दावन में अनेक छोटे बड़े होटल , रेस्टोरेंट , ढाबे इतियादी मिल जायेंगे जहाँ आपको शुद्ध शाकाहारी भोजन मिल जायेगा ।

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Remark : यदि आप ग्रह नक्षत्रों से परेशान है और कुंडली दिखवाना चाहते हैं या  कुंडली में किसी दोष जैसे :- पितृ दोष , कालसर्प योग, मंगली दोष , विवाह में विलंब , गुरु राहू चांडाल योग इतियादी के विषय में जानना चाहते है या इनका पूजन करना चाहते है तो हमसे 8533087800 पर संपर्क कर सकते हैं  , हमारी team में अनेक विद्वान ज्योतिष , कर्मकांडी ब्राह्मण है जो बहुत ही उचित मूल्य पर अपनी सेवा आपको दे सकते हैं ।

 

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