शनिदेव के मंत्र shanidev ke mantra 9 remedies

shanidev ke mantra
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श्री शनिदेव के मंत्र

sri shanidev ke mantra 

shanidev ke mantra 9 great remedies

मित्रों मन्त्रों में बहुत शक्ति होती है, सनातन धर्म ( हिन्दू धर्म ) में अनेक साधू सन्यासी और ऋषि मुनि हुए जिन्होंने अपना पूरा जीवन तपस्या में ही लगा दिया और उन्हें तपस्या करने से जो  ज्ञान और शक्ति प्राप्त हुई उससे उन्होंने देवी देवताओं को प्रसन्न करने के लिए अनेक मन्त्रों और उपायों का सृजन किया जिससे मानव जाती का कल्याण हो और मनुष्य पृथ्वी पर रहते हुए भी मन्त्रों ( और उपायों ) के द्वारा देवी देवताओं से जुड़ा रह सके और प्रसन्न रह सके ।

साथियों मंत्र ( mantra ) असंख्य हैं और भिन्न भिन्न देवी देवताओं को प्रसन्न करने के लिए अलग अलग मंत्र (mantra) हैं  ।वर्तमान युग जिसे कलयुग कहते हैं , में शनिदेव की प्रधानता है क्योंकि शनिदेव (shanidev) कर्म के देवता है और हमारे कर्मों का लेखा जोखा शनिदेव (shanidev) के पास ही रहता है । हम सभी को ये भी पता होना चाहिये की हम सब का जीवन 9 ग्रहों और 27 नक्षत्रों के अधीन है और वेदों के अनुसार देवी देवता मन्त्रों के अधीन है ।

शनिदेव (shanidev) चूँकि कर्म प्रधान देवता है इसलिए शनिदेव न्यायधीश बनकर हमारे द्वारा भूतकाल में किये गये कर्मो का फल हमें अवश्य देते हैं , शनिदेव (shanidev) के द्वारा दिए हमे मिला फल अच्छा होगा या बुरा,ये हमारे द्वारा पूर्व में किये गये कर्म के द्वारा ही  निर्धारित होता है।

शनिदेव के द्वारा मिल रहे कष्ट दूर करने के लिए हमे शनिदेव की पूजा अर्चना,आराधना तो करनी ही चाहिए किन्तु साथ ही हमे अपने द्वारा किये गये दुष्कर्म –कुकर्म के लिए पश्चाताप भी करना चाहिए अन्यथा शनिदेव के द्वारा मिल रही पीड़ा शीघ्र दूर नही होती है।

शनिदेव की पूजा अर्चना,आराधना में ही शनिदेव के मन्त्र ( shanidev ke mantra ) भी आते हैं और निरंतर लम्बे समय यदि हम शनिदेव के मन्त्र ( shanidev ke mantra )का जाप करें तो हमे शनिदेव के कष्टों से मुक्ति मिलती है ।

कुछ लोग तो ऐसा भी सोचते है की जब हम शनिदेव की पूजा कर ही रहे है शनिदेव के मन्त्र ( shanidev ke mantra ) का जाप कर ही रहे हैं तो हम कुछ भी करने के लिए स्वतंत्र है , ऐसा नही है साथियों हमे ,हमारे द्वारा किये गये पुण्य का फल अलग और पाप का फल अलग भोगना होता है ।

लोग अधिकतर पाप और पुण्य की बातों को घड़े से जोड़कर देखते है कि अमुक व्यक्ति का पाप का घड़ा भर गया है ( या पुण्य का भर गया है ) तो आप इस बात को इस प्रकार समझ लीजिये की पाप और पुण्य के दो अलग अलग घड़े हैं ।

यदि आप कितने भी पुण्य कर ले किन्तु पाप के घड़े के पाप कम नही होगा और उसका फल तो आपको भोगना ही होगा क्योंकि पुण्य के घड़े के पुण्य अलग हैं और उनका फल भी आपको अवश्य ही मिलेगा।

जो लोग ये सोचते है कि हमने तो शनिदेव के मन्त्र ( shanidev ke mantra ) का जाप या माता रानी का या शिवजी का  पूजन कर ही लिया है,उनके नाम से भंडारा कर दिया है तो हमे दूसरों को हानि पहुचाने का या अपमान करने का लाइसेंस मिल गया है वो मात्र भ्रम पाल रहे है ।

कर्म हमारा जन्म जन्मान्तर पीछा करते है और उनसे बचने का कोई उपाय नही बना है ।संसार की कोई भी लाल,पीली,हरी पुस्तक आपको आपके कर्म भोग से नही बचा सकती है और इसी कर्म का फल देने का कार्य शनिदेव करते हैं ।

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हिन्दू धर्म के ग्रंथों के अनुसार शनिदेव मनुष्यों के बुरे कर्मों के अनुसार मनुष्यों को अनेक प्रकार से दण्डित करते हैं और ये दंड देने का समय मुख्यतः शनिदेव की महादशा, अन्तर्दशा , प्रत्यंतर दशा का समय होता है और शनिदेव के द्वारा दिए गये दंड असहनीय होते है ।

इन असहनीय कष्टों को मनुष्यों को कम भोगना पड़े इसीलिए सनातन धर्म में साधु संतो और ज्ञानियों ने अनेक मंत्रो का सृजन किया और इन्ही मंत्रो में शनिदेव के मन्त्र ( shanidev ke mantra ) भी आते है जिनके निरंतर जाप से  शनिदेव के द्वारा दिए गये कष्टों से मुक्ति मिलती है।

 

शनिदेव के मन्त्र ( shanidev ke mantra ) का जाप करने से पूर्व  शनि मंदिर में शनिदेव का पूजन करें,जिसमे शनिवार को स्नान कराएँ , संभव हो तो काले वस्त्र पहनाएं , तिल या सरसों का तेल,अक्षत, फूल, नैवेद्य अर्पित करें  और नीचे दिए गये शनिदेव के मन्त्रों में से अपने समय और शारीरिक सामर्थ्य के अनुसार जाप करें :-

  1. शनिदेव के मन्त्र ( shanidev ke mantra ) -(अर्घ्य समर्पण हेतु )- ॐ शनिदेव नमस्तेस्तु गृहाण करूणा कर |अर्घ्यं च फ़लं सन्युक्तं गन्धमाल्याक्षतै युतम् ||
  2. शनिदेव के मन्त्र ( shanidev ke mantra ) –(तांत्रिक ) – ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:

  3. शनिदेव के मन्त्र ( shanidev ke mantra ) –(पौराणिक) – नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छाया मार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।

  4. शनिदेव के मन्त्र ( shanidev ke mantra ) – (वैदिक 1 ) -ॐ शन्नो देवी रभिष्टय आपो भवन्तु पीपतये शनयो रविस्र वन्तुनः

  5. शनिदेव के मन्त्र ( shanidev ke mantra ) –(वैदिक 2 ) –ॐ ऐँ  ह्रीं श्रीं  शनैश्चराय नम: 

  6. शनिदेव के मन्त्र ( shanidev ke mantra ) –(बीज ) – ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:  

  7. शनिदेव के मन्त्र ( shanidev ke mantra ) – (गायत्री )ऊँ भगभवाय विद्महैं मृत्युरुपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोद्यात्   ।

  8. शनिदेव के मन्त्र ( shanidev ke mantra ) – (सरलतम) :- ‘ॐ शं शनिश्चराय नम:’  
  9. शनिदेव के मन्त्र ( shanidev ke mantra ) – (अपने सभी दुष्कर्मों की क्षमा मांगने हेतु) :-

अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया।
दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर।।
गतं पापं गतं दु:खं गतं दारिद्रय मेव च।
आगता: सुख-संपत्ति पुण्योऽहं तव दर्शनात्।।

इन उपायों से भी यदि आपके कष्ट दूर नहीं होते है तो सूर्यदेव अथवा हनुमान जी की शरण में जाएँ 

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