Thursday, August 18
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घंटीधारी ऊंट : पंचतंत्र की कहानी Ghantidhari unt – A Moral Story of Panchatantra of Greedy Bell camel

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घंटीधारी ऊंट : पंचतंत्र की कहानी Ghantidhari unt – A Moral Story of Panchatantra of Greedy Bell camel

घंटीधारी ऊंट : पंचतंत्र की कहानी Ghantidhari unt – Panchatantra Moral Stories of bell camel : एक बार की बात है कि एक गांव में एक निर्धन जुलाहा रहता था । उसका विवाह बचपन में ही हो गया था। पत्नी आने के बाद घर का खर्चा बढ़ना था। घर का खर्च निकलना कठिन हो गया था और यही चिन्ता उसे खाए जारही थी।

तभी उसके गांव में अकाल भी पड़ गया और लोग कंगाल हो गए। जुलाहे की आय एकदम समाप्त हो गई। उसके पास नगर जाने के अतरिक्त और कोई चारा न रहा।

एक दिन वो पास के नगर में काम ढूँढने निकल गया और नगर में उसने कुछ महीने छोटे-मोटे काम किए। उसके पास थोड़ा-सा पैसा आ गया किन्तु तभी गांव से सूचना आई कि अकाल समाप्त हो गया है और ये जान वो गांव की ओर चल पड़ा।

मार्ग में जुलाहे को एक स्थान पर सड़क किनारे एक ऊंटनी दिखाई दी। ऊंटनी रोगी दिख रही थी और वह गर्भवती थी। उसे ऊंटनी पर दया आ गई। वह उसे अपने साथ अपने घर ले आया।

घर में ऊंटनी को ठीक चारा व घास मिलने लगी तो वह पूरी तरह स्वस्थ हो गई और समय आने पर उसने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। बच्चा उसके लिए बहुत भाग्यशाली सिद्ध हुआ। Ghantidhari unt

घंटीधारी ऊंट : पंचतंत्र की कहानी Ghantidhari unt

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कुछ दिनों बाद ही एक कलाकार गांव में आया और वो गाँव के जीवन पर चित्र बनाना चाहता था , अब चित्र बनाने के लिए बहुत सारे ब्रुश की आवश्यकता पड़ती थी इसलिए ब्रुश बनाने के लिए वह जुलाहे के घर आकर ऊंट के बच्चे की पूँछ के बाल ले जाता था । वो कलाकार लगभग दो सप्ताह गांव में रहने के बाद चित्र बनाकर चला गया।

कलाकार के जाने के बाद ऊंटनी खूब दूध देने लगी तो जुलाहे ने उसे बेचने की सोची लेकिन तभी एक दिन वही कलाकार गांव लौटा और जुलाहे को बहुत सारे पैसे दिए क्योंकि उस कलाकार ने उन चित्रों से बहुत सारे पुरस्कार जीते थे और उसके द्वारा बने चित्रों का बहुत अच्छा मूल्य मिला था।

अब जुलाहा उस घंटीधारी ऊंट  के बच्चे को अपने लिए भाग्यशाली मानने लगा। उस कलाकार से मिली राशि के कुछ पैसों से उसने ऊंट के बच्चे के गले के लिए एक सुंदर घंटी खरीदी और उसे पहना दी। इस प्रकार जुलाहे को कलाकार से पैसे मिलने पर उसके दिन बदल गए और उसकी निर्धनता दूर हो गयी ।

उस घंटीधारी ऊंट के बच्चे के जीवन में आने से जुलाहे के जीवन में बहुत सुख आ गया और फिर वो ये सोचने लगा कि क्यों जुलाहे का काम छोड़कर वो ऊंटों का व्यापारी ही बन जाए। उसकी पत्नी भी यही चाहती थी की वो जुलाहे का काम छोड़ दे। उस समय तक जुलाहे की पत्नी गर्भवती हो गई थी और वो सुखी जीवन जीना चाहती थी और साथ ही अपने सुख के लिए ऊंटनी व घंटीधारी ऊंट के बच्चे की आभारी थी।

अब जुलाहे ने कुछ ऊंट खरीद लिए और ऊँटों का व्यापार आरम्भ कर दिया , जुलाहे के भाग्य ने साथ दिया और उसका ऊंटों का व्यापार चल पड़ा । जुलाहे ने व्यापार से ऊंटों की एक बड़ी टोली बना ली और उन्हें चरने के लिए दिन में छोड़ देता था । घंटीधारी ऊंट का वो बच्चा जो अब जवान हो चुका था और दूसरे ऊँटो के साथ घूमता हुआ घंटी बजाता रहता था ।

एक दिन घंटीधारी ऊंट (Ghantidhari unt) के बच्चे से एक दूसरे युवा ऊंट ने कहा , भैया! तुम हमसे दूर-दूर मत रहा करों ? हमे एक साथ रहना चाहिए , तब घंटीधारी ऊंट के बच्चे ने गर्व से बोला ‘तुम एक साधारण ऊंट हो। मैं घंटीधारी ऊंट हूँ और साथ ही अपने मालिक का दुलारा हूं। मैं अपने से छोटे तुम्हारे जैसे ऊंटों के साथ नही रह सकता हूँ , मेरा मान सम्मान कम हो जाएगा ।’

उस स्थान के पास एक वन था जिसमे एक शेर रहता था। शेर एक ऊंचे पत्थर पर बैठकर दूर से ऊंटों को देखता रहता था। उसे एक ऊंट और ऊंटों से अलग-थलग दिखाई देता था ।

तब उसने सोचा कि चलो इसे खाकर अपनी भूख मिटाए क्योंकि वो ऊंट अन्य ऊँटो से अलग-थलग रहता था इसीलिए शेर ने उसको खाने की सोची । घंटीधारी ऊंट की ध्वनि के कारण उस ऊंट को खाना बहुत सरल था क्योंकि उस ऊंट के आने की सूचना तो उसकी घंटी की ध्वनि ही दे देती थी ।

दूसरे दिन जब ऊंटों की टोली चारा चरकर लौट रही थी तो घंटीधारी ऊंट बाकी ऊंटों से 20-25 कदम पीछे चल रहा था। शेर उसका शिकार करने के लिए घात लगाए बैठा ही था। जैसे ही वो ऊंट उस शेर के निकट आया तो उसकी घंटी की ध्वनि को सुनकर वो शेर ऊंट का शिकार करने के लिए दौड़ा और उसे मारकर वन में खींच ले गया। इस प्रकार घंटीधारी ऊंट (Ghantidhari unt) के अहंकार ने उसके जीवन की घंटी बजा दी।

पंचतंत्र की कहानी :- घंटीधारी ऊंट : Ghantidhari unt से मिलने वाली सीख 

घमंड से दूर रहना चाहिए और एकता में ही शक्ति है , जो स्वंम को सबसे श्रेष्ठ समझता है उसे  उसका अहंकार ले डूबता है।

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बोलती गुफा(bolti gufa)

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