Monday, September 26
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trimbakeshwar jyotirling mandir ब्रह्मा, विष्‍णु, महेश 3 देवताओं का सयुंक्त रूप है त्रम्बकेश्वर A 2 Z Complete & Easy Guide

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trimbakeshwar jyotirling mandir ब्रह्मा, विष्‍णु, महेश 3 देवताओं का सयुंक्त रूप है त्रम्बकेश्वर A 2 Z Complete & Easy Guide

trimbakeshwar jyotirling mandirभारत के महाराष्ट्र राज्य के नासिक जिले में नासिक नगर (city) से लगभग 35 किमी दूर गोदावरी नदी (जिसे गौतमी नदी भी कहा जाता है)  के किनारे विराजित है प्रभु त्रम्बकेश्वर ( trimbakeshwar mandir ),

त्रम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग के निकट ही ब्रह्म गिरि पर्वत से गोदावरी नदी का उद्गम है।

ये वो ही ब्रह्मगिरी पर्वत है जहाँ ऋषि गौतम तपस्या करते थे और जब भगवान् शिव प्रसन्न हो उनके समक्ष प्रकट हुए और वरदान मांगने को कहा तो ऋषि गौतम ने शिव जी से वरदान में गंगा को पृथ्वी पर भेजने का आग्रह किया था तब गंगा जी ने कहा कि यदि प्रभु शिव भी वहां विराजें तो मैं आ सकती हूँ तब प्रभु शिव यहाँ त्रयम्बकेश्वर के रूप में आये और माँ गंगा यहाँ गोदावरी नदी के रूप में बहने लगी |

इस मन्दिर (trimbakeshwar jyotirling mandir ) के भीतर एक छोटे से गड्डे में  प्रभु ब्रह्मा, विष्णु , महेश तीनों एक साथ विराजित है |

भगवान् शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से त्रयम्बकेश्वर ही एक मात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है जहाँ प्रभु ब्रह्मा, विष्णु , महेश तीनों एक साथ विराजित है |

त्रम्बकेश्वर मंदिर (trimbakeshwar jyotirling ) में पूजा करने से पहले हिन्दू तीर्थयात्री मंदिर के निकट ही कुशावर्त कुंड में नहाने जाते है और दर्शन के बाद मंदिर से बाहर निकलकर गाय को हरा चारा भी खिलाते है, कहते है ऐसा करने से तीर्थयात्री के दोष दूर होते हैं |

ऐसा कहा जाता है कि ब्रम्हगिरी पर्वत से गोदावरी नदी बार-बार लुप्त हो जाया करती थी। गोदावरी लुप्त न हो इसके लिए गौतम ऋषि ने एक कुशा की सहायता से गोदावरी को बांध दिया था। तभी से कुशावर्त तीर्थ – कुंड में जल सर्वदा रहता है। इस कुंड को कुशावर्त तीर्थ के नाम से जाना जाता है। नासिक में लगने वाले कुंभ स्नान के समय शैव-अखाड़े इसी कुशावर्त तीर्थ – कुंड में शाही स्नान करते हैं।

त्रम्बकेश्वर कुंभ मेला

trimbakeshwar jyotirling mandir kumbh mela 

जब भी बृहस्पति ग्रह 12 राशियों का भ्रमण करते हुए सिंह राशि में आते है तो यहां बड़ा कुंभ मेला लगता है जिसमे देश विदेश से तीर्थयात्री पुण्यलाभ कमाने आते है , यहाँ बड़ी संख्या में तीर्थयात्री और साधू संत गोदावरी नदी में स्नान करके भगवान त्र्यंबकेश्वर का दर्शन करते हैं। 

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के चारों ओर एक बहुमूल्य रत्नों से जड़ा हुआ एक मुकुट भी रखा जाता है,इस मुकुट में हीरा, पन्ना और अन्य बहुमूल्य रत्न लगे हुए हैं। किन्तु आम तीर्थयात्री मात्र सोमवार के दिन सायं 4 से 5 बजे तक इसको देख सकते है |

त्रम्बकेश्वर मंदिर का निर्माण 

trimbakeshwar jyotirling mandir architecture  

त्र्यंबकेश्वर मंदिर का निर्माण काले पत्थरों से नागर शैली में किया गया है जिसमे मंदिर की बाहरी दीवारों पर अनेक प्रतिमायों जैसे देवों, मनुष्यों, पशु-पक्षियों व यक्षों की आकृतियां बनाई गयी हैं।

मूल मंदिर का निर्माण कब हुआ था ये कोई नही जानता है किन्तु वर्तमान मंदिर का पुनर्निर्माण श्रीमंत बालाजी बाजीराव पेशवा ( जिनको  नाना साहब पेशवा के रूप में भी जाना जाता है ) ने वर्ष 1755 में प्रारंभ करवाया था जोकि निरंतर चला और वर्ष 1786 में संपन्न हुआ। इस पुनर्निर्माण में सोलह लाख रुपये खर्च आया था |

मंदिर के सामने ही अनेक खानपान की दुकाने है और यात्रियों के सामन रखने की व्यवस्था है , ये दूकान वाले आपका सामान मात्र 10 – 20 रूपए में अपने पास सुरक्षित रख लेते है और आपको एक टोकन दे देतें है जब आप दर्शन करके लौट के आते है तो अपना सामान सुरक्षित ले लेतें है |

त्रयम्बकेश्वर में तीर्थयात्री कालसर्प योग और पित्रदोष की शांति की भी पूजा करवाते है और इसके लिए अनेक पंडित यहाँ उपस्थित रहते है |

ये भी पढ़े : पितृ दोष pitra dosh – Signs and easy remedies

त्रम्बकेश्वर मंदिर का इतिहास 

History of trimbakeshwar jyotirling mandir

हिन्दू धर्मग्रंथो के अनुसार एक बार महर्षि गौतम के तपोवन में रहने वाले ब्राह्मण की पत्नियां किसी बात पर गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या से रुष्ट चल रही थी और इसी ईर्ष्या वश उन सभी स्त्रियों ने अपने अपने पतियों को गौतम ऋषि का अपमान करने के लिए उकसाया  ।

उन तपस्वी ब्राह्मणों ने इसके लिए भगवान गणेश की आराधना की जिससे प्रसन्न होकर गणेश जी ने उन तपस्वी ब्राह्मणों से वर मांगने को कहा। उन ब्राह्मणों ने वर में ऋषि गौतम को आश्रम से बाहर निकालने का आग्रह किया , अब चुकी गणेश जी वरदान दे चुके थे इसलिए उन्हें विवश होकर उन तपस्वी ब्राह्मणों की बात माननी पड़ी।

तब गणेश जी ने एक दुर्बल गाय का रूप धारण किया और ऋषि गौतम के खेत में जाकर उगी फसल खाने लगे। ये देख ऋषि गौतम खेत की फसल बचाने के लिए हाथ में डंडा लेकर उस गाय को वहां से भगाने लगे। जैसे ही ऋषि गौतम के डंडे का स्पर्श उस गाय को हुआ वो गाय वहीं गिर कर मर गई। उसी समय सभी ब्राह्मण एकत्रित होकर ऋषि गौतम को गौ हत्यारा कह कर उनका अपमान करने लगे।

ऋषि गौतम को भी अपनी गलती का बोध हुआ और वो उन सभी ब्राह्मणों से गौ हत्या के पाप से मुक्ति और उसके प्रायश्चित का उपाय पूछने लगे । तब ब्राह्मणों ने ऋषि गौतम से कहा कि तुम अपने पाप को सभी को बताते हुए तीन बार पृथ्वी की परिक्रमा करो और लौटकर यहां 1 महीने तक व्रत करो।

इसके बाद ब्रम्हगिरी का 101 बार परिक्रमा करो तभी तुम्हारी शुद्धि होगी।

यदि ये नही कर सकते हो तो दूसरा उपाय ये है कि 

यहां गंगा जी को लाकर उनके जल से स्नान करके एक करोड़ पार्थिव शिवलिंग से भगवान शिवजी की आराधना करो। इसके बाद पुनः गंगा जी में स्नान करो और इस ब्रह्मगिरी के 11 बार परिक्रमा करो। उसके बाद 100 घरों के पवित्र जल से पार्थिव शिवलिंग को स्नान कराओ तभी तुम्हारा उद्धार होगा।

उसके बाद भी गौतम ऋषि ने सभी कार्य संपन्न करते हुए अपनी पत्नी अहिल्या के साथ पूर्णता ध्यानमग्न होते हुए भगवान शिव का तप करने लगे। ऋषि गौतम की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनसे वर मांगने को कहा। महर्षि गौतम ने कहा भगवान आप मुझे गौ हत्या के पाप से मुक्त कर दीजिए।

भगवान शिव ने कहा गौतम तुम सर्वदा निष्पाप हो। गौ हत्या का अपराध तुमने किया ही नही है बल्कि वो तो तुम पर छल पूर्वक लगाया गया था। तुम्हारे साथ छल करने वाले तुम्हारे आश्रम के उन सभी ब्राह्मणों को मैं दंड देना चाहता हूं और तुम्हारी तपस्या से प्रसन्न हो तुम्हे वर देना चाहता हूँ तो वरदान मांगो ।

तब महर्षि गौतम ने कहा उन्हीं ब्राह्मणों के उस छल पूर्वक कार्य से मुझे आपके दुर्लभ दर्शन प्राप्त हुए हैं अतः आप उन पर क्रोधित न हों और वरदान में माँ गंगा को पृथ्वी पर भेज दे तब गंगा जी ने कहा कि यदि प्रभु शिव भी यहाँ विराजित हों तो मैं आ सकती हूँ तब प्रभु शिव यहाँ त्रयम्बकेश्वर के रूप में आये और माँ गंगा यहाँ गोदावरी नदी के रूप में बहने लगी |

godavari river

गोदावरी नदी

त्रम्बकेश्वर मंदिर के निकट अन्य प्रसिद्ध स्थान 

Other famous places near Trimbakeshwar Temple

जो तीर्थयात्री यहाँ आते है वो शनि शिन्गनापुर और शिर्डी साईं बाबा के दर्शन करना भी पसंद करते है |

trimbkeshwar

त्रम्बकेश्वर कैसे जाएँ ?

How to reach trimbakeshwar jyotirling mandir maharashtra ?

त्रम्बकेश्वर नासिक रेलमार्ग , वायुमार्ग और सड़क मार्ग से भलीभांति जुड़ा हुआ है | नासिक आने के बाद बस,टैक्सी या ऑटो के द्वारा या आपके पास अपना निजी वाहन हो तो उसके द्वारा प्रभु त्रयम्बकेश्वर के दर्शन करने आ सकते है |

वायुमार्ग से त्रयम्बकेश्वर कैसे जाएँ ?

How to reach trimbakeshwar maharashtra by flight ?

त्रम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग का निकटतम airport – नासिक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (Nashik International Airport (IATA: ISK, ICAO: VAOZ) ) जोकि ओज़र नामक स्थान पर स्थित है इसलिए इसे ओज़र हवाई अड्डा ( ozar airport ) भी कहते है |

त्रम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग से ओज़र हवाई अड्डे की दूरी लगभग 49.9 km है  जिसमे  एक से सवा घंटे का समय लगता है  

और दूसरा airport , छत्रपति शिवाजी महाराज अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा ( Chhatrapati Shivaji Maharaj International Airport, Mumbai (IATA: BOM, ICAO: VABB)) मुंबई है जोकि त्रम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग से लगभग 200 km दूर  स्थित है 

रेलमार्ग से त्रयम्बकेश्वर कैसे जाएँ ?

How to reach trimbakeshwar maharashtra by train ?

त्रम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग का निकटतम मुख्य रेलवे स्टेशन नासिक रोड ( nasik road – station code : nk ) है जोकि त्रम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग से लगभग 28 km दूर स्थित है , नासिक रोड रेलवे स्टेशन से त्रम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग जाने के लिए प्राइवेट और सरकारी बसे और टैक्सी इतियादी मिल जाती है जोकि त्रम्बकेश्वर बस स्टैंड उतार देतीं है जहाँ से त्रम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग का  बिलकुल ही निकट है | 

विभिन्न ट्रेनों का शुल्क और सीट उपलब्द्धता जाने के लिए यहाँ click करे  IRCTC 

सड़कमार्ग से त्रयम्बकेश्वर कैसे जाएँ ?

How to reach trimbakeshwar maharashtra by road ?

त्रम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग का निकटतम बस स्टैंड ,त्रम्बकेश्वर बस स्टैंड है  जोकि त्रम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर से मात्र 290 मीटर की दूरी पर स्थित है | त्रम्बकेश्वर बस स्टैंड जाने के लिए महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम की बस का प्रयोग भी किया जा सकता है |

bus

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