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स्त्री की कुंडली में गुरु 12 houses of Jupiter in females horoscope

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स्त्री की कुंडली में गुरु 12 houses of Jupiter in females horoscope

कुंडली में गुरु सबसे अधिक शुभ ग्रह होते हैं। स्त्री की कुंडली में गुरु का बहुत ही महत्व होता है क्योंकि स्त्री की कुंडली में गुरु उनके ज्ञान के साथ-साथ उनके पति और बच्चों के कारक भी होते हैं।

गुरु हम सबको ज्ञान ,सौम्यता , बल, देश और संस्कृति से प्रेम देता और एक शुभ ग्रह है। गुरु धनु और मीन राशि का स्वामी होता है और  कर्क  राशि में उच्च का और मकर राशि में नीच का होता है ,

स्त्री की कुंडली में गुरु सौभाग्यवर्द्धक तथा संतानकारक ग्रह होते हैं । गुरु शनि की दृष्टि में हो तो विवाह में विलंब कराता है। राहु से संबंध बना रहा हो तो प्रेम विवाह की संभावना बनती है। स्त्री की कुंडली में गुरु 8th भाव में विवाहोपरांत भाग्योदय के साथ सुखी वैवाहिक जीवन देता,  

1/5/9/11 भावों में बलवान गुरु शीघ्र विवाह के योग बनाता है लेकिन ये गुरु वक्री, नीच, अस्त, पाप ग्रह पीड़ित या निर्बल नही होना चाहिए. मकर और कुंभ लग्न में 7th भाव का गुरु वैवाहिक जीवन के लिए अच्छा नही माना जाता है ,मिथुन या कन्या राशि का गुरु लग्न या 7th भाव में हो तो अति शुभ माना गया है। गुरु चंद्र मंगल की युति वैवाहिक जीवन के लिए अच्छी मानी गयी है।

मेष लग्न में 7th भाव का गुरु विवाह में विलंब कराता है। वृश्चिक धनु मीन लग्न का गुरु वैवाहिक जीवन अच्छा करता है वहीँ मीन राशि का गुरु 7th भाव में अकेला होने पर वैवाहिक जीवन कष्टप्रद करता है।

पुराणों में भी कुंडली में उच्च गुरु के अशुभ फल वर्णन मिलता है-

जन्म लग्ने गुरुश्चैव रामचंद्रो वनेगतः
तृतीय बलि पाताले, चतुर्थे हरिश्चंद्र,
षष्टे द्रोपदी चीरहरण च हंति रावणष्ट मे,
दशमे दुर्योधन हंति द्वादशे पांडु वनागतम्‌।

कुंडली में कारक ग्रह का बहुत प्रभावशाली होता है।, यदि गुरु आपकी कुंडली में कारक हैं तब तो यह आपके लिए शुभ फल देते ही हैं लेकिन यदि गुरु मारक भी हो तब भी उतना अशुभ फल नहीं दे पाते जितना अन्य ग्रह  देते हैं।

कुंडली में गुरु जिस भाव में बैठता है उसके फलों में कमी करता है और  जिस भाव को देखता है उसके फलों में वृद्धि करता है । गुरु ज्ञानकारक तथा सुख प्रदायक , समृद्धि, संतान देने वाला और धर्म अध्यात्म में रुचि बढ़ाने वाला ग्रह है। शुभ भाव में बलवान गुरु राजयोग बनाता है।

यदि किसी की कुंडली में गुरु पीड़ित हो जाते हैं तो फिर विवाह होने में कठिनाइयाँ आएंगी। आइये जानते हैं स्त्री की कुंडली में गुरु के फल सभी 12 भावों में 

 

स्त्री की कुंडली में गुरु Jupiter in females horoscope

स्त्री की कुंडली में 1st भाव में गुरु

1st भाव का गुरु स्त्री को रूपवान बना देता है। ऐसी स्त्रियां न्याय प्रिय और सत्य बोलने वाली होती हैं । यह भाग्यवान और धनवान भी होती हैं। गुरु संतान कारक ग्रह होते हैं इसलिए यदि वह लग्न में बैठे तो स्त्री को संतान प्राप्ति विशेषकर पुत्र संतान अवश्य होती है।

यह गुरु स्त्री को एक सुंदर तथा धनवान पति प्राप्त कराता है। वह इनका ध्यान रखने वाला होता है। ऐसी स्त्रियां शिक्षण के कार्य में, परामर्श देने में, पत्रकारिता या गुरु से संबंधित अन्य कार्य करने में सफल होती हैं।

यदि लग्न का गुरु शत्रु या नीच राशि में हो या इस पर पापी ग्रहों की अशुभ दृष्टि पड़ रही हो तो गुरु की शुभता कम होती है

स्त्री की कुंडली में 2nd भाव में गुरु

जिस स्त्री के 2nd भाव में गुरु हो उसका जन्म एक सभ्य कुलीन और प्रसिद्ध कुल में हो सकता है। इन्हें अपने परिवार से अनेक प्रकार के लाभ होते हैं। दूसरा भाव वाणी का भाव होता है। यदि वाणी में गुरु का प्रभाव आ जाए तो वाणी में शुभता आ जाति है और वह स्त्री एक गुरु के समान परामर्श देने वाली बन जाती है।

यदि इस भाव में गुरु पीड़ित और अकेले नहीं हैं तो ऐसी स्त्रियों का बचपन बहुत ही सुख में रहता है। यह सभी प्रकार के सुखों को प्राप्त करने वाली होती हैं तथा धनवान होती है।

यह गुरु इन्हें ऋण से मुक्ति दिलाता है तथा इनके शत्रु नहीं बनने देता। यदि शत्रु बन भी जाते हैं तो ऐसी स्त्रियां अपनी वाणी के बल पर शत्रुओं को हरा देती हैं। 2nd भाव का गुरु स्त्री को पुत्रवती और धनवान भी बनाता है। यदि गुरु पीड़ित हो या शत्रु राशि में हो तो प्रभाव में कमी आती है।

स्त्री की कुंडली में 3rd भाव में गुरु

3rd भाव में गुरु बलवान स्थिति में बैठा हुआ है तो स्त्री को धार्मिक बनाता है और उनको को सभी प्रकार के सुख दिलाएगा लेकिन यदि पीड़ित हो गया तो उसके कारक तत्वों के साथ-साथ जिन भावों का स्वामी है उसमें कमी दे देगा।

3rd भाव में बैठे गुरु की सातवीं दृष्टि 9th भाव पर पड़़ती है जो भाग्य का स्थान है। यह दृष्टि उनको भाग्यवान बनाती है। ऐसी स्त्रियां बातचीत करने में बेहतरीन होती हैं।

ये गुरु अपनी 5th दृष्टि से आपके 7th भाव स्थान को देखता है जिस कारण ये आपके पति को शिक्षित और बुद्धिमान बना देती है तथा आपके दांपत्य जीवन को बेहतर बनाने में मदद करती है। 9th दृष्टि गुरु की धन भाव में पड़़ने के कारण आपको धन लाभ भी करता है।

स्त्री की कुंडली में 4th भाव में गुरु

4th भाव का गुरु स्त्री को सभी प्रकार के सुखों को प्रदान करता है। ये स्त्रियां अपने माँ की सहायक और सभी को अति प्रिय होती हैं। इनके भीतर परिवार में शांति बनाए रखने का गुण होता है और ये जीवन का आनंद लेना जानती हैं।

ये धन धान्य से संपन्न होती हैं। यहां पर बैठे गुरु की 7th भाव दृष्टि कर्म भाव पर पड़़ती है जिसके कारण इनका कर्म बेहतरीन हो जाता है।
यदि चाहें तो गुरु से संबंधित कार्य करके अपने जीवन को बेहतरीन बना सकती हैं जैसे शिक्षण, परामर्श का कार्य या पत्रकारिता। ये कभी किसी के साथ गलत करने का प्रयत्न नहीं करती हैं।

स्त्री की कुंडली में 5th भाव में गुरु

5th भाव का गुरु स्त्री को सच की राह पर चलने वाला तथा सत्यवादी बनाता है। इनके पास सभी प्रकार के गुण होते हैं। ऐसी स्त्रियां पढ़ाई लिखाई में बहुत अच्छी होती हैं।

5th का गुरु यदि अकेला नहीं है तो संतान देता है और दांपत्य जीवन को भी अच्छा करता है। यह इन्हें धार्मिक और भाग्यवती बनाता है। इन्हें शिक्षण और परामर्श के कार्यों से धन लाभ हो सकता है।

कई बार यह गुरु स्त्रियों को अपने मन के अनुसार चलने वाला बना देता है। उन्हें किसी 2nd का सुनना पसंद नहीं रहता। यदि कोई अशुभ दृष्टि गुरु पर हो तब तो ऐसे स्त्रियां अपने ज्ञान को लेकर घमंडी हो जाती हैं।

यदि गुरु पाप ग्रहों से पीड़ित हैं या अशुभ दृष्टि पड़़ रही हैं तो फिर शुभ प्रभावों में कमी आ सकती है।

स्त्री की कुंडली में 6th भाव में गुरु

छठे भाव का गुरु स्त्री को भावुक बना देता है। ऐसी स्त्रियां अपने कर्म और नौकरी को लेकर बहुत ही अधिक सजग हो जाती हैं। कई बार इनके जीवन का उद्देश्य दृढ़ता से नौकरी करना होता है।

यदि यह नौकरी में नहीं भी है तो भी इन्हें जो भी काम दिया जाता है उसे बड़ी ही शिद्दत से पूर्ण करती हैं। इनका मानना होता है कि इन्हें हर व्यक्ति का सच्चे मन से आदर करना चाहिए। कई बार यह बड़ी सरलता से दूसरों की बातों में भी आ जाती हैं।

छठे भाव का गुरु स्त्री को आलसी बना देता है। इनके शत्रु कम होते हैं। यदि यहां पर बृहस्पति किसी शुभ ग्रह के साथ है तो रोग में कमी होती है लेकिन यदि शनि की राशि में है और राहु केतु संयुक्त है तो रोग होने की संभावनएं अधिक बढ़ जाती हैं।

स्त्री की कुंडली में 7th भाव भाव में गुरु

7th भाव भाव का गुरु स्त्री को ज्ञानी और रूपवान बनाता है। ऐसी स्त्रियों को सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है तथा भाग्य भी पूरी तरह से इनका साथ देता है। यदि यह व्यापार करती हैं तो उसमें भी इन्हें प्रसिद्धि प्राप्त होती है।

ऐसी स्त्रियों के पति पूजा-पाठ और धर्म में रुचि रखने वाले होते हैं। इन्हें यात्राएं करना अच्छा लगता है। इनको प्रचुर मात्रा में धन लाभ होता है तथा यह परिश्रमी भी होती है।

इसके प्रभाव से इनके पास पर्याप्त मात्रा में ज्ञान उपलब्ध होता है और यह परामर्श के कार्य या शिक्षक बंद कर अपना जीवन यापन कर सकती हैं।

यदि 7th भाव का गुरु पीड़ित हो तो प्रभाव में कमी आ सकती है तथा दांपत्य जीवन में भी समस्याओं का सामना करना पड़़ सकता है या विवाह और संतान प्राप्ति में भी देरी हो सकती है क्योंकि स्त्री की कुंडली में गुरु उनके पति और संतान का कारक होता है और यदि गुरु पीड़ित हो जाए तो पति और संतान प्राप्ति में बाधाएं आ सकती हैं।

स्त्री की कुंडली में 8th भाव में गुरु

स्त्री की कुंडली में 8th का गुरु अच्छा संकेत नहीं देता क्योंकि उनके पति और संतान का कारक का 8th भाव में चले जाना यह दर्शाता है कि उनके जीवन में संतान और उनके पति को लेकर कष्ट बने रह सकते हैं।

यह स्थिति स्त्री को शारीरिक रूप से निर्बल कर सकती है या फिर उनके शरीर में मांस की मात्रा अधिक हो सकती है। गुरु ज्ञान का कारक होते हैं यदि यह 8th भाव में चले जाएं तो ऐसी स्त्रियां कई बार विवेक हीन निर्णय लेती हैं। यदि इस ग्रुप पर कोई अशुभ दृष्टि हो तो ऐसा होने की संभावनाएं और बढ़ जाती हैं।

स्त्री की कुंडली में 9th भाव में गुरु

9th भाव का गुरु स्त्री को घूमने-फिरने का शौकीन बना देता है। ऐसी स्त्रियां धार्मिक स्थलों पर जाने की इच्छुक रहती हैं। यह भाग्यवती और रूपवान भी होती हैं।

इनके भीतर बातचीत करने का कला कौशल होता है तथा इनकी बुद्धि भी तीव्र होती है। इनके संबंध इनके पिता जी से बहुत अच्छे होते हैं तथा इन्हें पिता से लाभ भी होता है। ये नई नई चीजों को सीखने की इच्छुक होती हैं।

9th भाव का गुरु यदि नीच या पीड़ित हो तो स्त्री के संबंध पिता से अच्छे नहीं रहते और उनके निर्णय कई बार गलत साबित हो जाते हैं लेकिन यदि गुरु सही फल दे रहे हैं तो ऐसी स्त्रियों को निर्णय लेने में महारत प्राप्त होती है। यह गुरु स्त्री को ईश्वर मैं श्रद्धा रखने वाला बना देता है।

स्त्री की कुंडली में 10th भाव में गुरु

10th भाव का गुरु स्त्री को सही कार्य करने वाला बनाता है अर्थात वह सदैव सही कर्म करने की इच्छुक होती हैं। इन्हें सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। यह स्त्रियां अपने परिवार से प्रेम रखने वाली तथा सत्यवादी होती हैं।

ये कार्य क्षेत्र में सफलता प्राप्त करती हैं तथा राज्य के अधिकारियों से भी ने सम्मान और लाभ प्राप्त होता है। इन के शत्रु बहुत कम होते हैं लेकिन यदि बन भी गए तो वो पराजित होते हैं।

10th भाव का गुरु स्त्री को कई बार अत्यधिक भावुक बना देता है जो इनके कर्म क्षेत्र के लिए एक बड़ी समस्या हो सकती है। यदि कोई झूठी भावनाओं के साथ भी इनके पास आए और अपनी दुख भरी कहानी सुना दे तो यह अपना सब कुछ दान करने के लिए तैयार हो जाते हैं। इन्हें इस बात का सदैव ध्यान रखना चाहिए।

स्त्री की कुंडली में 11th भाव में गुरु

11th भाव का गुरु स्त्री को धनवान और संतानवान बनाता है। ये अत्यंत पराक्रमी होती हैं तथा अपनी कड़ी परिश्रम से धन और ऐश्वर्य प्राप्त करती हैं। इनका स्वभाव क्षमाशील होता है तथा इन्हें किसी भी प्रकार के रोगों से शीघ्र छुटकारा प्राप्त होता है।

ऐसी स्त्रियां भाग्यशाली होती हैं तथा इन्हें एक शिक्षित और रूपवान जीवनसाथी प्राप्त होता है। इनकी पढ़ाई लिखाई अच्छे से होती है तथा इनकी बुद्धि भी तीव्र होती है। इनकी रुचि धर्म-कर्म में भी रहती है।

यदि यहां पर गुरु पीड़ित या नीच हो जाए तो प्रभाव में कमी आती है तथा धन लाभ और विवाह में विलंब हो सकता है।

स्त्री की कुंडली में 12वें भाव में गुरु

12वें भाव का गुरु स्त्री को आलसी और क्रोधी बना देता है लेकिन इनकी अपनी माँ से संबंध अच्छे रहते हैं तथा इन्हें सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है।

यदि गुरु यहां पर पीड़ित हो जाए तो संतान प्राप्ति में समस्या और विवाह में भी बाधा उत्पन्न हो सकती है। ऐसी स्त्रियां शुभ कार्यों में अपने धन को खर्च करती हैं। 12वें भाव का गुरु कई बार इनको गलत कामों में भी फंसा सकता है इसलिए सतर्क रहना आवश्यक है।

यदि 12वें भाव में गुरु नीच या पीड़ित हो जाए तो आपको जेल या अस्पताल के चक्कर काटने पड़़ सकते हैं इसलिए इन्हें गलत कर्मों की तरफ नहीं जाना चाहिए।

स्त्री की कुंडली में गुरु 12 houses of Jupiter in females horoscope

 

गुरु के मित्र ग्रह

–>  सूर्य-चंद्र-मंगल का मित्र,

गुरु के शत्रु ग्रह

–> बुध-शुक्र

गुरु से सम ग्रह

–> शनि-राहु-केतु

गुरु किन भावों का कारक होता है

–> 2nd , 5th ,9 th और 11th

निष्कर्ष :

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श्री गणेश ज्योतिष समाधान 

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