Thursday, August 18
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भूखी चिड़िया की कहानी Bhukhi Chidiya Ki Kahani- hungry bird story

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भूखी चिड़िया की कहानी Bhukhi Chidiya Ki Kahani- hungry bird story

भूखी चिड़िया की कहानी Bhukhi Chidiya Ki Kahani- hungry bird story : बहुत समय पहले की बात है चुचु चिड़िया नाम की एक छोटी सी चिड़िया रहती थी। चुचु चिड़िया अपनी माता, पिता और  5 भाइयों के साथ घोंसले में रहती थी।  चुचु चिड़िया के पंख छोटे और रेशमी और मुलायम थे,

चुचु चिड़िया और उसका परिवार एक बड़े चर्च के घंटाघर पर बने घोंसले में रहता था और उसकी माता ने उसे घंटियों की ताल पर चहकना सिखाया था और वो घंटाघर की घंटियों की ताल पर चहकती रहती थी

घंटाघर के पास एक पूराने मकान में एक बूढ़ी औरत रहती थी जो पक्षियों से बहुत प्यार करती थी , वो चुचु  चिड़िया और उसके परिवार के लिए अपनी खिड़की पर ब्रेड डालती थी।

(भूखी चिड़िया की कहानी hungry bird story Bhukhi Chidiya Ki Kahani)

एक दिन बेचारी बुढ़िया गंभीर रूप से अस्वस्थ पड़ गई और उसकी मृत्यु हो गई।

चुचु चिड़िया और उसका पूरा परिवार उस औरत के खाने पर ही निर्भर था। अब उनके पास खाने के लिए कुछ नहीं था, तब चुचु चिड़िया के पिता ने कीड़ों का शिकार करने का निर्णय किया लेकिन दुर्भाग्य से उसे मात्र 3 कीड़े ही मिले और जबकि चुचु चिड़िया के परिवार में 8 चिड़िया थीं ।

भूखी चिड़िया की कहानी panchtantra story of the hungry bird

image courtesy : you tube 

इसलिए  उसने चुचु चिड़िया और उसके 2 भाइयों के साथ मात्र छोटों सदयों को ही खिलाने का निर्णय किया।

इधर  खाने की खोज में भटक रही चुचु चिड़िया  उसके भाई और उसकी मां ने एक घर की खिड़की में चोंच मारी, ताकि कुछ मिल जाए लेकिन कुछ भी नहीं मिला। (भूखी चिड़िया की कहानी panchtantra story of the hungry bird )

और उल्टा घर के मालिक ने देख उन्हें देख लिया  उन पर राख फेंक दी जो उनके पूरे शरीर पर गिर गयी और उनके शरीर का रंग भूरा हो गया ।

उधर बहुत खोज करने के बाद चुचु चिड़िया के पिता को एक ऐसा स्थान मिला जहां बहुत कीड़े थे। इससे उन्हें  उनके अनेक दिनों का खाना मिल गया । खाने के साथ जब वो घर पहुंचे तो वहां कोई नहीं मिला। वह परेशान हो गए ।

उधर बच्चे और उनकी मां राख से गंदे हुए घोंसले में लौटे, तो चुचु चिड़िया के पिता ने उन्हें पहचान नहीं पाये और उन्हें घोसलें से भगा दिया।

तभी चुचु चिड़िया, उसका भाई और मां वापस लौटे तो पिता उन्हें पहचान नहीं पाए और क्रोध में उन्होंने सबको भगा दिया। चुचु चिड़िया ने पिता को समझाने का बहुत प्रयास किया कि किसी ने उनके ऊपर रंग फेंका है, लेकिन चुचु चिड़िया पिता को समझा नही पायी

(भूखी चिड़िया की कहानी hungry bird story Bhukhi Chidiya Ki Kahani)

चुचु चिड़िया और उसके भाई और माता ने हार नहीं मानी और पास के एक तालाब में अपने आप को साफ करने के लिए चले गए और घंटियों की आवाज के साथ अपने पसंदीदा गीत की धुन पर घोंसले के पास चहकना शुरू कर दिया ।

चुचु चिड़िया के पिता ने उन्हें पहचान लिया और उन्हें घोसले ने आने दिया और उसके बाद सभी ने खुशी से एक साथ खाना खाया ।

उस दिन से चुचु चिड़िया और उसके परिवार ने भोजन प्राप्त करना सीख लिया और दूसरों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए ये बात अच्छे से समझ ली क्योंकि यदि वो उस औरत की ब्रेड पर निर्भर नही होते तो उन्हें इतने कष्ट नही उठाने पड़ते

कहानी से सीख : कभी भी किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। सभी को स्वंम के परिश्रम पर विशवास करना चाहिए और अपनी सामर्थ्य से अपनी आवश्यकताओं को पूरा करना चाहिए

(भूखी चिड़िया की कहानी hungry bird story Bhukhi Chidiya Ki Kahani)

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