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baglamukhi mata-माँ पीतांबरा यानि माँ बगलामुखी दतिया-1 चमत्कारिक मंदिर

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baglamukhi mata-माँ पीतांबरा यानि माँ बगलामुखी दतिया-1 चमत्कारिक मंदिर

baglamukhi mata-माँ पीतांबरा जिन्हें बगलामुखी माता के नाम से भी जाना जाता है, अपने भक्तों के बड़े से बड़े कष्ट दूर कर देती है और इसीलिए माँ पीतांबरा मंदिर दतिया में माँ बगलामुखी के दर्शन के लिए माँ के भक्तो की भींड लगी रहती है , बगलामुखी माता (baglamukhi mata) की कृपा चाहे कोई राजा हो या रंक सभी को समान रूप से प्राप्त होती है

माँ पीतांबरा अर्थात बगलामुखी माता (baglamukhi mata) के इस सिद्धपीठ की स्थापना वर्ष 1935 में की गई थी, यहाँ बगलामुखी माता चर्तुभुज रूप में विराजमान है ,एक हाथ में गदा, दूसरे में पाश, तीसरे में वज्र और चौथे हाथ में माँ पीतांबरा ने राक्षस की जिह्वा थाम रखी है.

संसार भर में अनेक देवियों व देवताओं के मंदिर हैं किन्तु उनमे से कुछ ऐसे हैं जिनके चमत्कार आज तक वैज्ञानिक भी सुलझा नही सके और ऐसा ही मंदिर है माँ पीतांबरा अर्थात बगलामुखी माता (baglamukhi mata) का ये चमत्कारिक मंदिर जो मध्यप्रदेश के दतिया में भी स्थापित है।

शत्रुओं या किसी अन्य भय से पीड़ित लोग बगलामुखी माता (baglamukhi mata) के मंदिर में अपने कष्टों का नाश करने के लिए गुप्त रूप से पूजा अर्चना और यज्ञ करवाते हैं और ऐसा करने से भक्त की प्रार्थना स्वीकार भी होती है ।

माँ बगलामुखी को माँ पीतांबरा इसलिए कहा जाता है क्योंकि वो पीले वस्त्र धारण किए हुई हैं और उन्हे पीली वस्तुए प्रिय हैं इसलिए उन्हें पीली वस्तुएं चढ़ाई जाती हैं। इसके साथ ही माँ के अनुष्ठानों में भी भक्तों को पीले कपड़े पहनने होते हैं।

लोगों के अनुसार आचार्य द्रोण के पुत्र अश्वत्थामा जोकि अमर है आज भी यहां पूजा-अर्चना करने आते हैं । माना जाता है कि माँ बगलामुखी ही पीतांबरा देवी हैं,

राजसत्ता की देवी माँ पीतांबरा अर्थात बगलामुखी माता (baglamukhi mata)

मध्यप्रदेश राज्य के दतिया जनपद में स्थित माँ पीतांबरा शत्रु नाश की अधिष्ठात्री देवी होने के साथ ही राजसत्ता की देवी भी कहलाती हैं। सैकड़ों नेताओ को यहाँ आने पर सफलता प्राप्त हुई है इसीलिए बगलामुखी माता (baglamukhi mata) को राजसत्ता की देवी भी कहा जाता है।

वर्तमान गृहमंत्री अमित शाह से लेकर पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुख़र्जी, पूर्व गृह मंत्री राजनाथ सिंह, कांग्रेस के नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह जैसे अनेक प्रसिद्द नेताओं और अभिनेताओं ने माँ पीतांबरा अर्थात बगलामुखी माता (baglamukhi mata) देवी का दर्शन कर माता से आशीर्वाद माँगा और उनकी मनकोमनयें पूर्ण हुई हैं।

बगलामुखी माता (baglamukhi mata) को राजनीति से जुड़े लोगों की राजसत्ता की कामना पूरी करने वाली माता माना जाता है क्योंकि माँ के द्वार पर आने वाले कभी खाली हाथ नहीं जाते हैं ,इसी कारण राजसत्ता प्राप्ति में माँ की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।

यदि कोई व्यक्ति सही होते हुए भी शत्रुओं से बहुत अधिक पीड़ित हो और वो माँ पीतांबरा अर्थात बगलामुखी माता (baglamukhi mata) के इस सिद्धपीठ आकर माता से अपने दुखों को कहे तो उसके कष्ट निश्चित ही दूर होते हैं क्योंकि सच्चे व्यक्ति के शत्रुओं का नाश करने वाली देवी हैं माँ पीतांबरा अर्थात बगलामुखी माता (baglamukhi mata)।

संत स्वामी जी ने माँ पीताम्बरा देवी के इस सिद्धपीठ की स्थापना वर्ष 1935 में की थी। माता के भक्तों का ऐसा कहना है कि यदि आप सही होते हुए कोर्ट कचहरी के मुकदमें से पीड़ित है तो आपको माता पीताम्बरा की शरण में जाना चाहिए और उनकी अराधना करनी चाहिए , माँ पीताम्बरा का अनुष्ठान से निश्चित ही आको विशेष सफलता प्राप्त होगी है 

baglamukhi mata-माँ पीतांबरा यानि माँ बगलामुखी दतिया-1 चमत्कारिक मंदिर

माता के मंदिर में खंडेश्वर महादेव और माँ धूमावती भी विराजित हैं और माँ पीताम्बरा के दर्शनों के साथ साथ हमें इनके दर्शन भी हो जाते हैं इनमे मंदिर के दायीं ओर खंडेश्वर महादेव हैं और महादेव के दर्शनों के बाद आगे बढ़ने पर माँ धूमावती के दर्शन होते हैं जोकि दस महाविद्याओं में से एक विद्या दात्री हैं । माँ धूमावती के दर्शन का सौभाग्य भक्तों को मात्र आरती के समय ही प्राप्त होता है क्योंकि उसी समय मंदिर के कपाट खुलते हैं।

माँ बगलामुखी अर्थात माँ पीतांबरा को चूंकि पीली वस्तुएं प्रिय है इसलिए माँ बगलामुखी देवी को पीली वस्तुएं चढ़ाई जाती हैं किन्तु माँ बगलामुखी शीघ्र प्रसन्न नही होती हैं , माँ बगलामुखी की प्रसन्नता उसी भक्त को प्राप्त होती है जो सत्य मार्ग पर होता है, सही होते हुए भी पीड़ित होता है और अपने कष्टों को दूर करने के लिए माता से निरंतर प्राथना करता है । 

अनेक बार माँ बगलामुखी को प्रसन्न  करने के लिए विशेष अनुष्ठान भी करने पड़ते हैं , जिसमें भक्त को माँ बगलामुखी की प्रिय पीली वस्तुए अर्पित करनी पड़ती हैं जिससे की माँ बगलामुखी अर्थात माँ पीताम्बरा प्रसन्न हों और भक्त के कष्ट दूर हों 

माँ पीतांबरा पीठ दतिया की स्थापना 

Establishment of Maa Pitambara Peeth Datia

माँ पीतांबरा पीठ, दतिया , माँ बगलामुखी के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है जिसे  वर्ष 1920 के दशक में श्रीस्वामी जी द्वारा स्थापित किया गया था। स्वामी जी महाराज ने बचपन से ही सन्यास ग्रहण कर लिया था और यहाँ स्वामी जी महाराज जी ने कठोर तप किया था इसीलिए ये एक सिद्ध और चमत्कारी पीठ कहलाता है।

यहाँ माँ धूमावती देवी के मंदिर की भी स्थापना श्रीस्वामी जी ने ही की थी, जोकि देश भर में एकमात्र है। माँ धूमावती और माँ बगलामुखी दस महाविद्याओं में से दो हैं। इसके अतिरिक्त यहाँ बड़े क्षेत्र में परशुराम, हनुमान, कालभैरव और अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी हैं।

यहाँ एक संस्कृत पुस्तकालय भी है जिसे श्रीस्वामी जी ने स्थापित किया था और आज आश्रम द्वारा संचालित किया जाता है। इस संस्कृत पुस्तकालय मे आप को आश्रम के इतिहास और अनेक प्रकार की साधनाओं और तंत्र मंत्र से संबधित पुस्तकें पढ़ने को मिल जाएंगी । 

माँ बगलामुखी माता (baglamukhi mata) मात्र भक्तों के ही कष्ट दूर नही करती हैं बल्कि जब भी हमारे देश पर कोई संकट की परिस्थिति बनी है तब माँ पीताम्बरा देवी ने देश की भी रक्षा की है। 

दर्शन के लिए पुरुष और महिलाओं की व्यवस्था 

माँ बगलामुखी अर्थात माँ पीतांबरा के दर्शन के लिए मंदिर में जाने पर आपको दो लाइन मिलेंगी , एक महिलाओं और एक पुरुषों के लिए और भक्तों को माँ बगलामुखी के दर्शन एक छोटी सी खिड़की से ही होते हैं क्योंकि भक्तों को माँ की प्रतिमा का स्पर्श करना मना है.

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भारत चीन युद्ध के समय मंदिर में हुआ 51 कुंडीय महायज्ञ

माँ पीतांबरा पीठ, दतिया , माँ बगलामुखी में भारत चीन युद्ध के समय सेना के अधिकारियों व तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के अनुरोध पर देश की रक्षा के लिए माँ बगलामुखी की कृपा प्राप्ति हेतु 51 कुंडीय महायज्ञ कराया गया था और इस यज्ञ के 11वें दिन बाद  अंतिम आहुति होते ही आश्चर्य जनक रूप से चीन ने अपनी सेनाएं वापस बुला ली थीं।

उस समय किए गए 51 कुंडीय महायज्ञ के लिए बनाई गई यज्ञशाला आज भी यहां स्थित है और यहां एक पट्टिका लगी जिसपर इस घटना का वर्णन लिखा हुआ है । ऐसा कहा जाता है कि इसी प्रकार वर्ष 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भी माँ बगलामुखी ने देश की शत्रुओं से रक्षा की थी ।

कुछ लोगों के अनुसार वर्ष 2000 में कारगिल में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कहने पर यहां माँ बगलामुखी की गुप्त साधनाएं और यज्ञ करवाये गए थे जिससे पाकिस्तान को हार का मुह देखना पड़ा था 

एक दिन में 3 बार अपना रूप बदलती है माँ पीताम्बरा देवी

माँ पीतांबरा देवी अर्थात माँ बगलामुखी प्रतिदिन 3 बार अपना रुप बदलती हैं और माँ बगलामुखी के बदलते हुए रूप के दर्शन के लिए अनेक भक्त यहाँ लंबे समय तक प्रतीक्षा करते रहते है

पूरे संसार मे माँ बगलामुखी के अति महत्वपूर्ण 3 मंदिर है 

संसार में इनके माँ बगलामुखी के मात्र तीन ही महत्वपूर्ण प्राचीन मंदिर हैं, जिन्हें सिद्धपीठ कहा जाता है। जोकि क्रमश: दतिया (मध्यप्रदेश), कांगड़ा (हिमाचल) तथा नलखेड़ा जनपद शाजापुर (मध्यप्रदेश) में हैं। 

माँ बगलामुखी मंत्र 

Maa Baglamukhi mantra 

‘ह्मीं बगलामुखी सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलम बुद्धिं विनाशय ह्मीं ॐ स्वाहा।’

माँ बगलामुखी मंदिर मे प्रसाद वितरण 

Prasad distribution in Maa Baglamukhi temple

मंदिर मे भक्तों को प्रसाद वितरण दोपहर 12 बजे के बाद किया जाता है। कुछ लोग माता को पीले फल और कुछ नारियल चढ़ाते हैं वहीं कुछ लोग इस मंदिर में देवी को नमकीन प्रसादम चढ़ाते हैं।

माँ बगलामुखी मंदिर मे दर्शन का समय

Maa baglamukhi Temple darshan Timings

माँ बगलामुखी मंदिर प्रातः 7 बजे भक्तो के दर्शनों के लिए खुलता है और रात्रि मे 9 बजे बंद हो जाता है। दोपहर 12 बजे से दोपहर 2 बजे तक माँ बगलामुखी के दर्शन बंद कर दिये जाते हैं  

कैसे पहुंचें माँ बगलामुखी

how to reach maa baglamukhi datia 

माँ बगलामुखी दतिया मंदिर भारत के ग्वालियर , आगरा , भोपाल जैसे प्रमुख नगरों से भली भांति जुड़ा हुआ है और माता का कोई भी भक्त माँ पीतांबरा के दर्शन करने flight , train और roadways जैसे यातायात के साधनो का प्रयोग कर माँ पीतांबरा के दर्शन करने जा सकता है 

वायुमार्ग से कैसे पहुंचें माँ बगलामुखी

how to reach maa baglamukhi datia by flight 

माँ पीतांबरा देवी अर्थात माँ बगलामुखी मंदिर , दतिया मे अपना कोई भी हवाई अड्डा नही है , वायुमार्ग से माँ बगलामुखी अर्थात माँ पीतांबरा देवी के दर्शन के लिए जाने के लिए आपको ग्वालियर हवाई अड्डे Gwalior Airport (IATA: GWL, ICAO: VIGR) जाना होगा , इस ग्वालियर एयरपोर्ट को Rajmata Vijaya Raje Scindia Terminal, Gwalior Airport के नाम से भी जाना जाता है जो मुख्य नगर से 8 किमी की दूरी पर स्थित है वहीं ये airport दतिया से 75 किमी की दूरी पर स्थित है।

रेलमार्ग से कैसे पहुंचें माँ बगलामुखी

how to reach maa baglamukhi datia by train 

माँ पीतांबरा देवी अर्थात माँ बगलामुखी मंदिर , दतिया रेल मार्ग से जाना बहुत ही सरल है क्योंकि माँ पीताम्बरा पीठ दतिया से दतिया रेलवे स्टेशन (Datia railway station station code : DAA ) मात्र 3 किमी की दूरी पर स्थित है , इस दतिया रेलवे स्टेशन पर उतर कर आप किसी भी वाहन से मंदिर तक सरलता से पहुंच जाएँगे

विभिन्न ट्रेनों में रिजर्वेशन की स्थिति जानने के लिए यहाँ click करें 

click करे : – IRCTC 

सड़कमार्ग से कैसे पहुंचें माँ बगलामुखी

how to reach maa baglamukhi datia by road 

माँ पीतांबरा देवी अर्थात माँ बगलामुखी मंदिर , दतिया सड़क मार्ग से भारत के सभी प्रमुख नगरों से सड़क मार्ग से भलीभाँति जुड़ा हुआ है । यहाँ जाने के लिए आपको निजी या सरकारी सभी प्रकार के वाहन मिल जाएंगे और दतिया पहुँचने के लिए आपको ग्वालियर , आगरा , भोपाल , इंदौर , उज्जैन आदि सभी प्रमुख नगरों से नियमित रूप से वाहन मिल जाएँगे , यहाँ आप एसी और नॉन एसी पर्यटक बसों से भी जा सकते हैं ।

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