Siddhivinayak-Lord of miracles:सिद्धिविनायक-बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया a 2 z info

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Siddhivinayak-Lord of miracles:

सिद्धिविनायक-बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया a 2 z info

सिद्धिविनायक मंदिर( siddhivinayak temple ) मुंबई के प्रभा देवी नामक  स्थान पर भगवान गणेश जी का एक सुप्रसिद्ध मंदिर है, किसी भी शुभ कार्य जैसे विवाह, ग्रह प्रवेश,वाहन और भूमि पूजन आदि मे भगवान गणेशजी की पूजा सनातन धर्म मे सबसे पहले करने का विधान है। 

वैसे तो भगवान श्री गणेश जी के प्रमुख मंदिरों में अष्‍टविनायक मंदिर भी आते हैं जोकि पुणे के विभिन्‍न आठ स्थानों में  स्थित हैं । चूंकि भगवान गणेश जी यहाँ स्‍वयं प्रकट हुए थे ,किसी ने भी उनकी प्रतिमा स्‍थापित नहीं की थी इसलिए इन मंदिरों को स्‍वयंभू मंदिर भी कहा जाता है।

लेकिन सिद्धिविनायक मन्दिर श्री गणेश जी का एक ऐसा मंदिर है जो अष्टविनायक में नहीं होते हुए भी सिद्धपीठ कहलाता है। सिद्धिविनायक मन्दिर के गणपति के भक्त संसार के हर कोने में हैं लेकिन महाराष्ट्र में इनकी संख्या सबसे अधिक है।

मुंबई का सिद्धिविनायक मंदिर( siddhivinayak temple )

सिद्धिविनायक मंदिर( siddhivinayak temple ) मे गणेश जी सूड़ दाईं ओर मुड़ी है और ऐसी मान्यता है की ऐसे गणपती भक्तों की मनोकामना को शीघ्र पूरा करते हैं  क्योंकि ऐसे गणपति बहुत ही जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं किन्तु हमारे से कोई गलती होने पर उतनी ही जल्दी कुपित भी हो जाते हैं।

सिद्धिविनायक का स्वरूप 

सिद्धिविनायक मंदिर( siddhivinayak temple ) की दूसरी विशेषता यह है यहाँ गणेश जी की मूर्ति की चार भुजाएँ हैं । उनके एक दाएं हाथ में कमल है , ये हाथ ऊपर की ओर उठा हुआ है और बाएं हाथ में अंकुश है और नीचे के दाहिने हाथ में मोतियों की माला और बाएं हाथ में मोदक अर्थात लड्डुओं भरा पात्र है। गणपति के दोनों ओर उनकी दोनो पत्नियां ऋद्धि और सिद्धि विराजित हैं और इस प्रकार गणपती और माता द्व ऋद्धि -सिद्धि के एक साथ पवित्र हृदय से दर्शन करने से धन, ऐश्वर्य, सफलता और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंती है।

सिद्धिविनायक मंदिर( siddhivinayak temple ) मे गणेश जी की मूर्ति ढाई फीट ऊंची है और यह दो फीट चौड़े एक ही काले शिलाखंड – पत्थर के टुकड़े से बनी हुई है।

सिद्धिविनायक के मस्तक पर अपने पिता शिव के समान एक तीसरा नेत्र और गले में एक सर्प की माला लिपटी हुई है।

सिद्धिविनायक मंदिर( siddhivinayak temple ) मे चढ़ने वाला चढ़ावा 

सिद्धिविनायक मंदिर( siddhivinayak temple ) मे दर्शन करने के लिए बड़े उद्योगपतियों,बॉलीवुड स्टार से लेकर नेताओं ,अधिकारियों का आगमन होता ही रहता है। प्रतिवर्ष गणपति पूजा महोत्सव यहां भाद्रपद की चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक विशेष समारोह पूर्वक मनाया जाता है जिसमे यहां बड़ी संख्या मे भक्त आते हैं और इसीलिए यहाँ प्रति वर्ष भारी दान आता है,सिद्धिविनायक मंदिर( siddhivinayak temple ) मे प्रति वर्ष  लगभग 125 करोड़ रूपए का चढ़ावा चढ़ता है और इसकी गितनी भारत के सबसे समृद्ध मंदिरों में भी होती है।

मंगलवार को यहां इतनी अधिक भीड़ होती है कि 4-5 घंटे लाइन में खड़े होने के बाद ही भगवान के दर्शन हो पाते हैं। 

सिद्धीविनायक को “नवसाचा गणपति” या “नवसाला पावणारा गणपति” के नाम से भी जाना जाता है। ये नाम मराठी भाषा मे है जिसका अर्थ है कि जब भी कोई भक्त सिद्धीविनायक की सच्चे मन से प्रार्थना करता है तो बप्पा अर्थात सिद्धिविनायक उसकी मनोकामना अवश्य पूरी करते हैं।

सिद्धिविनायक मंदिर( siddhivinayak temple ) मे चांदी के चूहे

सिद्धिविनायक मंदिर( siddhivinayak temple ) के अंदर चांदी की बनी चूहों की दो बड़ी मूर्तियां स्थित हैं और ऐसी मान्यता है कि यदि आप उन चाँदी के चूहों के कानों में अपनी इच्छाएं बोलते हैं तो वो आपकी इच्छा भगवान गणेश जी को जाकर बताते हैं। इसलिए ऐसा करते हुए वहाँ आपको बहुत से श्रद्धालु में दिख जाएंगे। ये थे सिद्धिविनायक मंदिर( siddhivinayak temple ) से जुड़े कुछ रोचक तथ्य, जिनके बारे में आपको पता होना चाहिए।

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History of siddhivinayak temple

सिद्धिविनायक मंदिर का इतिहास

ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1692 में हुआ था किन्तु सरकारी अभिलेखों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण श्री लक्ष्मण विथु पाटिल नाम के एक स्थानीय ठेकेदार के द्वारा 19 नवम्बर 1801 मे हुआ था ।

एक तथ्य ये भी है कि मंदिर के निर्माण में लगने वाला धन एक कृषक महिला ने दिया था जिसकी कोई संतान नहीं थी। चूंकि उसकी कोई संतान नही थी इसलिए वो इस मंदिर को बनवाना चाहती थी जिससे भगवान गणेश जी के पास जो आए वो उनके आशीर्वाद से संतान प्रपट कर सके और इस प्रकार कोई भी महिला बांझ न रहे ।

सिद्धिविनायक मंदिर( siddhivinayak temple ) का प्रारम्भिक स्वरूप बहुत छोटा था। वर्ष 1991 में महाराष्ट्र सरकार ने इस मंदिर के भव्य निर्माण के लिए 20 हजार वर्गफीट की भूमि प्रदान की। आज सिद्धिविनायक मे पाँच तल हैं और सिद्धिविनायक मंदिर( siddhivinayak temple ) मे प्रवचन ग्रह, गणेश संग्रहालय और दूसरे तल पर एक चिकित्साल्य है जहां रोगियों का निशुल्क उपचार किया जाता है और इसी तल पर रसोईघर भी है जहां एक लिफ्ट लगी है जो सीधे गर्भग्रह में आती है और पुजारी गण भगवान गणपति के लिए निर्मित प्रसाद व लड्डू इसी मार्ग से लाते हैं।

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सिद्धिविनायक मंदिर( siddhivinayak temple ) का गर्भगृह

वर्तमान मे ये मंदिर बहुत भव्य बन गया है , मंदिर के ‘गभारा ’ अर्थात गर्भगृह को इस प्रकार बनाया गया है कि अधिक से अधिक संख्या मे भगवान गणपती भक्त उनका सभामंडप से सीधे दर्शन कर सकें।

गर्भग्रह के चबूतरे पर चांदी का सुंदर मंडप है जिसके ऊपर स्वर्ण शिखर बना हुआ है जहां सिद्धिविनायक विराजते हैं। गर्भग्रह में 3 द्वार हैं जिन पर अष्टविनायक, अष्टलक्ष्मी और दशावतार की आकृतियां चित्रित हैं और इन ही द्वारों से भक्त जन दर्शन के लिए जाते हैं ।

siddhivinayak temple darshan timming

सिद्धिविनायक मंदिर मे दर्शन का समय 

सिद्धि विनायक मंदिर में दर्शन का समय कोरोनाकाल मे बदलता रहता है वैसे यहाँ दर्शन एक जनवरी से प्रातः 7 बजे से लेकर दोपहर 12 बजे तक और उसके बाद आधे घंटे के ब्रेक के बाद दोपहर 12:30 बजे से लेकर साँय 7 बजे तक हो रहे है . दर्शन के लिए आप ऑनलाइन बुकिंग करवा सकते है और समय मिलने के बाद QR क्यूआर कोड की सहायता से सिद्धिविनायक मंदिर में दर्शन हो जाएंगे ,

सिद्धिविनायक मंदिर मे वरिष्ठ नागरिकों, गोद में बच्चों को लेने वाली माताओं, विकलांग व्यक्तियों, एनआरआई और विदेशियों के लिए दर्शन की विशेष  व्यवस्था है। इसके साथ ही सिद्धिविनायक के ऑनलाइन लाइव दर्शन भी किए जा सकते ।

मंदिर में पीने का पानी,जूते रखने का स्थान,  वॉश रूम, व्हील चेयर और चिकित्सा की सुविधा हमेशा रहती है।

आप चाहें तो भगवान सिद्धिविनायक की ऑनलाइन पूजा भी कर सकते है जिसके लिए आपको online booking करवानी होगी , online pooja booking के लिए आप यहाँ click कर सकते है : Online Pooja Booking 

सिद्धिविनायक मंदिर कैसे जाएँ How to reach Siddhivinayak Temple

सिद्धिविनायक मंदिर जाने के लिए अनेक साधन है क्योंकि सिद्धिविनायक मंदिर भारत की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाली नगरी मुंबई मे स्थित है इसलिए सिद्धिविनायक मंदिर आप वायुमार्ग,रेलमार्ग  या सड़क मार्ग से सरलता से जा सकते है 

वायुमार्ग से सिद्धिविनायक मंदिर कैसे 

How to reach Siddhivinayak Temple by Air

सिद्धिविनायक मंदिर से मुंबई हवाई अड्डे (BOM) तक लगभग 12 किमी की दूरी है और ये दूरी लगभग 13 मिनट के समय मे पूरी हो जाती है।

ट्रेन से सिद्धिविनायक मंदिर कैसे जाएँ

How to reach Siddhivinayak Temple by Train

सिद्धिविनायक मंदिर का निकटतम रेलवे स्टेशन दादर है। यहाँ भारत के विभिन्न नगरों से नियमित ट्रेन आती हैं , दादर रेलवे स्टेशन (Station code :DDR) से टैक्सी के द्वारा 10 – 15 मिनट मे आप मंदिर पहुँच सकते है । Western Suburban Railway के stations Elephinston Road, Lower Parel और Mahalaxmi से भी मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।

सड़क से सिद्धिविनायक मंदिर कैसे जाएँ

How to reach Siddhivinayak Temple by Road

दादर रेलवे स्टेशन से सिद्धिविनायक मंदिर लगभग 15 मिनट की पैदल दूरी पर है। दादर रेलवे स्टेशन से, आप प्रभादेवी पहुँचने के लिए या तो साझा टैक्सी या रिजर्व टैक्सी ले सकते हैं।निजी बसें हैं जो सिद्धिविनायक मंदिर के लिए विभिन्न मार्गों से चलती हैं। तो मुंबई कैसे पहुंचे सिद्धिविनायक मंदिर चिंता की बात नहीं है।

यदि आप दक्षिण मुंबई क्षेत्र में हैं, तो आप कैब या B.E.S.T (बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट) बसों का विकल्प चुन सकते हैं। local ट्रेन से भी मंदिर तक पहुंच सकते है । 

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