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कुंडली मे चंद्रमा के शुभ और अशुभ योग-केमद्रुम वोशि वेशि व उभयचरी योग kundli me chandrama

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कुंडली मे चंद्रमा के शुभ और अशुभ योग-केमद्रुम वोशि वेशि व उभयचरी योग kundli me chandrama

kundli me chandrama : कुंडली मे चंद्रमा के शुभ और अशुभ योग अनेक प्रकार के होते है जैसे केमद्रुम योग वोशि योग वेशि योग व उभयचरी योग आदि , यहाँ maihindu.com आपको चंद्रमा के कुछ शुभ और अशुभ योग बता रहा है और आप इन योगों को अपनी कुंडली मे देख उनसे जुड़े उपाय भी कर सकते हैं तो

आइये जानते हैं

कुंडली मे चंद्रमा के शुभ और अशुभ योग

kundli me chandrama

केमद्रुम योग 

यदि जन्म कुंडली में चंद्रमा से दूसरे तथा बारहवें स्थान में कोई भी ग्रह न हो, तो ‘केमद्रुम’ नामक योग होता है। इस योग में जन्म लेने वाला मनुष्य स्त्री-पुत्र से हीन, दुःखी, अपने कुटुंबियों के सुख से हीन, मलिन वस्त्रधारी, नीच, डरपोक, कुत्सित आचार-विचारों वाला, व्यर्थ बोलने वाला, निर्धन परंतु दीर्घायु होता है। ऐसा व्यक्ति चाहे राजा के घर में ही जन्म क्यों लें, फिर भी उसमें उपर्युक्त सभी कुलक्षण पाये जाते हैं।

यदि चंद्रमा केंद्र में हो अथवा किसी अन्य ग्रह से युक्त हो तो ‘केमद्रुम योग’ भंग हो जाता है ।

यदि चंद्रमा पर सभी ग्रहों की दृष्टि पड़ रही हो, तो केमद्रुम योग-जनित अशुभ फल नष्ट हो जाता है और व्यक्ति दीर्घायु, शत्रुओं को जीतने वाला तथा सार्वभौम राजा के पद को प्राप्त करने वाला होता है।

इसी प्रकार यदि केमद्रुम योग में चंद्रमा पूर्ण बिंब होकर शुभ ग्रह की राशि मे हो अथवा उस पर बुध, बृहस्पति और शुक्र को दृष्टि पड़ रही हो तो भी अशुभ फल नष्ट हो जाता है तथा व्यक्ति धन-पुत्रादि से सुखी होकर लोक में यश, प्रसिद्धि तथा सम्मान प्राप्त करता है।

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वोशि योग

यदि जन्म कुंडली में सूर्य से बारहवें स्थान में चंद्रमा को छोड़कर कोई अन्य ग्रह हो, तो ‘वोशि योग’ होता है।

वोशियोग का फल इस प्रकार समझना चाहिए-

यदि सूर्य से बारहवें स्थान पर गुरु की स्थिति हो, तो व्यक्ति धन का संचय करने वाला प्रसिद्ध पुरुष होता है।

यदि सूर्य से बारहवें स्थान पर शुक्र की स्थिति हो, तो व्यक्ति डरपोक, कामी, थोड़ा काम करने वाला तथा पराधीन होता है।

यदि सूर्य से बारहवें स्थान पर बुध हो, तो व्यक्ति कोमल स्वभाव वाला, विनम्र परंतु लज्जाविहीन, दरिद्र तथा अन्य जनों की आलोचना का पात्र होता है।

यदि सूर्य से बारहवें स्थान पर मंगल हो, तो व्यक्ति परोपकारी, परंतु अपनी माता का अहित करने वाला होता है।

यदि सूर्य से बारहवें स्थान पर शनि हो, तो व्यक्ति दयालु, तंद्रायुक्त स्वभाव वाला, वृद्ध के समान आकृति वाला तथा पर-स्त्रीगामी होता है।

वेशि योग

यदि जन्म कुंडली में सूर्य से दूसरे स्थान में चंद्रमा को छोड़कर कोई अन्य ग्रह हो, तो ‘वेशि योग’ होता है। वेशियोग का फल इस प्रकार समझना चाहिए—

यदि सूर्य के दूसरे स्थान पर गुरु हो, तो व्यक्ति धैर्यवान, सत्यवादी, बुद्धिमान, संग्राम में वीरता दिखाने वाला होता है।

यदि सूर्य से दूसरे स्थान पर शुक्र हो, तो व्यक्ति लोक में विख्यात, गुणवान तथा श्रेष्ठ पुरुष होता है। यदि सूर्य से दूसरे स्थान पर बुध हो, तो व्यक्ति प्रियवादी, सुंदर, परंतु दूसरों का अपकार करने वाला होता है।

यदि सूर्य से दूसरे स्थान पर मंगल हो, तो व्यक्ति वाहन चलाने में कुशल तथा युद्ध- क्षेत्र में प्रसिद्धि पाने वाला होता है।

यदि सूर्य से दूसरे स्थान पर शनि हो, तो व्यक्ति वाणिज्य- कला में कुशल, दूसरों के धन का अपहरण करने वाला तथा गुरुजनों का द्वेषी होता है।

इस प्रकार हम कह सकते हैं कि ‘वेशि योग’ में जन्म लेने वाला व्यक्ति अच्छी स्मरण शक्ति वाला, श्रेष्ठ वचन बोलने वाला, सत्त्वगुणी, मंद गति से चलने वाला , कमर से ऊपर पुष्ट शरीर वाला तथा भोगी होता है।

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उभयचरी योग

यदि सूर्य से दूसरे तथा बारहवें दोनों ही स्थानों पर चंद्रमा को छोड़ कोई अन्य ग्रह स्थित हों, तो ‘उभयचरी योग’ होता है। उभयचरी योग में जन्म लेने वाले व्यक्ति कष्ट-सहिष्णु, समदर्शी, मध्यम शरीर वाला, स्थिर, गंभीर, सतोगुणी, कार्यकुशल, पुष्टयोवा वाला, सुंदर, बहुत से नौकर रखने वाला, बंधुओं को आश्रय देने वाला, हृष्ट-पुष्ट भोगी धनी तथा राजा के समान सुखी तथा उत्साही होता है।

निष्कर्ष :

साथियों हम आशा करते है कि ये पोस्ट ” कुंडली मे चंद्रमा के शुभ और अशुभ योग-केमद्रुम वोशि वेशि व उभयचरी योग kundli me chandrama ” आपको अच्छी लगी होगी ,

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श्री गणेश ज्योतिष समाधान 

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